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Abhi Too Main Jawan Hun

सुष्मिता ने अपनी जवानी में जो खोया था उसका जब उसे एहसास हुआ तो वह 45 साल की उम्र में उसे पाने की कोशिश में लग गई क्या खोया था सुष्मिता ने? जिससे वह 45 साल की उम्र में यह कहकर पाना चाहती थी कि ‘ अभी तो मैं जवान हूं ‘



भाग 1



 



सुष्मिता गोवा के प्रसिद्ध तट की रेत पर चलती हुई समुद्र की लहरों को
देख रही थी। 45 साल की उम्र में, जब अधिकतर लोग जीवन में स्थायित्व और आराम की
तलाश करते हैं, सुष्मिता का जीवन अब भी व्यस्त और वक॔ ओरिएंटेड था। इस समय भी वह
एक बड़ी बिजनेस डील के सिलसिले में गोवा के इस खूबसूरत समुद्र तट पर मौजूद थी।
क्लाइंट, जो कि अपने क्षेत्र का बहुत बड़ा नाम था, इसी तट  के पास के होटल मैं कहीं ठहरा हुआ था। हालांकि,
सुष्मिता को ये सब निजी तौर पर कभी आकर्षित नहीं करता था। उसके लिए हमेशा से एक ही
चीज मायने रखती थी—उसका बिजनेस।



सुष्मिता का बचपन दिल्ली में बीता था। वह हमेशा से एक मेहनती और
होशियार लड़की थी। परिवार वाले उसे डॉक्टर या इंजीनियर बनने की सलाह देते थे,
लेकिन उसने शुरू से ही तय कर लिया था कि वह खुद का बिजनेस खड़ा करेगी। 25 की उम्र
में उसने एक छोटे से स्टार्टअप के साथ शुरुआत की। जहां उसकी सहेलियां शादी और
रिश्तों की बात करती थीं, सुष्मिता अपनी कंपनी के विस्तार के लिए योजना बनाती रहती
थी।



 



गोवा की यह यात्रा



 भी उसके बिजनेस का ही हिस्सा
थी। हालांकि, जब वह इस तट पर पहुंची, तो उसका ध्यान कुछ क्षण के लिए समुद्र की
सुंदरता में खो गया। तट की लहरें, हवा का ठंडा झोंका और सूर्य की किरणों का पानी
पर चमकना, सब कुछ उसे एक अनकही शांति दे रहे थे।



 



उसने खुद से पूछा, “क्या मेरी जिंदगी में भी ऐसी ही शांति हो
सकती है?” लेकिन यह विचार बस कुछ ही पलों का मेहमान था। वह जल्द ही अपने काम
में लौट आई और क्लाइंट से मिलने के लिए तैयार होने लगी।



 



सुष्मिता समुद्र तट पर खड़ी होकर लहरों को देख रही थी। हर लहर जैसे
उसे अतीत की ओर खींच रही थी। वह दिन याद आ रहा था जब वह कॉलेज में थी, और उसकी
जिंदगी में पहली बार किसी के लिए खास एहसास जागा था। राकेश, उसकी क्लास का सबसे
होशियार और आकर्षक लड़का, उसकी तरफ खिंचाव का कारण बन गया था। लेकिन यह खिंचाव
ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया, क्योंकि उसी समय उसकी जिंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया,
जिसने उसे हमेशा के लिए बदल दिया।



 



भाग 2



 



कॉलेज के दिनों में, जब सुष्मिता अपने सपनों और पढ़ाई में व्यस्त थी,
उसे अचानक खबर मिली कि उसके पिता की तबीयत बहुत खराब है। वह भागती हुई घर पहुंची,
जहां उसके पिता बिस्तर पर लेटे हुए थे। उनकी आंखों में दर्द और चिंता साफ झलक रही
थी। उन्होंने सुष्मिता का हाथ पकड़ा और कहा, “तुम सबसे बड़ी हो, सुष्मिता। अब
यह परिवार और हमारा बिजनेस तुम्हारे हाथों में है।”



 



उनके ये शब्द सुष्मिता के दिल में गूंजते रहे। उस दिन उसने अपने सारे
सपनों और इच्छाओं को एक तरफ रख दिया और अपने परिवार और बिजनेस को संभालने का फैसला
किया।



 



सुष्मिता ने अपने पिता के बिजनेस को संभालने के लिए दिन-रात मेहनत
की। उसे बिजनेस की ज्यादा समझ नहीं थी, लेकिन उसने हर छोटी-बड़ी चीज़ सीखी। उसने
अपने कर्मचारियों का विश्वास जीता और अपने पिता के बिजनेस को नई ऊंचाइयों तक
पहुंचाया।



 



आज, इतने सालों बाद, जब वह गोवा के इस समुद्र तट पर खड़ी थी, उसे
अपने जीवन के वो सारे पल याद आ रहे थे। उसने सोचा, “क्या मैंने अपनी जिंदगी
को सही तरीके से जिया है? क्या मैंने अपने लिए कुछ किया है?”



 



लेकिन फिर उसने खुद को समझाया, “मैंने जो किया, वह मेरे परिवार
और मेरे बिजनेस के लिए था। और यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।”



 



 उसने समुद्र की लहरों को
देखा और महसूस किया कि जिंदगी भी इन लहरों की तरह है—कभी शांत, कभी उग्र, लेकिन
हमेशा चलती रहती है।



 



सुष्मिता समुद्र तट पर खड़ी होकर गहरी सोच में डूबी हुई थी। उसकी
आँखें समुद्र की लहरों पर थीं, लेकिन उसका मन अतीत की यादों में खोया हुआ था। वह
अपने पिता के अंतिम शब्दों, कॉलेज के दिनों और राकेश के साथ बिताए गए कुछ लम्हों
को याद कर रही थी। अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह एक झटके से
वर्तमान में लौट आई। उसने पीछे मुड़कर देखा, और सामने एक प्रभावशाली व्यक्तित्व
खड़ा था—उसका क्लाइंट अक्षय।



 



भाग 3



 



अक्षय लगभग 30 साल का एक सुंदर और आत्मविश्वास से भरा युवक था।
सुष्मिता ने सोचा भी नहीं था कि उसका क्लाइंट इतना आकर्षक होगा। अक्षय ने हल्की
मुस्कान के साथ कहा, “आपसे मिलकर खुशी हुई, सुष्मिता जी। मैंने आपके काम के
बारे में बहुत सुना है।” उसकी विनम्रता और आत्मविश्वास सुष्मिता को प्रभावित
कर गया।



 



अक्षय ने सुष्मिता को पास ही के एक रेस्टोरेंट में एक-एक ड्रिंक के
लिए आमंत्रित किया। सुष्मिता ने पहले तो सोचा कि यह एक अनौपचारिक मुलाकात है,
लेकिन फिर उसने इसे स्वीकार कर लिया।



 रेस्टोरेंट का माहौल शांत और
सुकून भरा था। दोनों ने एक-दूसरे की जिंदगी, उनके काम और उनके दृष्टिकोण के बारे
में बात की। 



अक्षय ने अपने बिजनेस की शुरुआत और संघर्ष की कहानी साझा की। उसने
बताया कि कैसे उसने अपनी कंपनी को इतने कम समय में सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
सुष्मिता ने भी अपने पिता की मौत और बिजनेस संभालने की जिम्मेदारियों के बारे में
बात की। उनकी बातचीत में इतनी गहराई थी कि समय का पता ही नहीं चला।



 



सुष्मिता ने महसूस किया कि यह मुलाकात सिर्फ बिजनेस के बारे में नहीं
थी। अक्षय के व्यक्तित्व ने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिंदगी काम के अलावा
भी है। उसने महसूस किया कि वह बहुत लंबे समय से अपने काम में इतनी उलझी हुई थी कि
उसने जिंदगी के छोटे-छोटे सुखों को नजरअंदाज कर दिया।



 



अक्षय ने सुष्मिता से कहा, “आपने अपने परिवार और बिजनेस के लिए
जो किया है, वह अद्भुत है। लेकिन अब शायद वक्त आ गया है कि आप अपने लिए भी समय
निकालें।” अक्षय की ये बात सुष्मिता के दिल में कहीं गहरी उतर रही थी। यहां
उसकी सुष्मिता की अक्षय से बिजनेस के बारे में बहुत सारी बातें हुई और फिर वह
बातें कल की मीटिंग के लिए टल गई।



 



भाग 4



 



 अगले दिन सुष्मिता और अक्षय
गोवा के मशहूर “गो डैडी” रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे। शाम का वक्त था,
और बाहर समुद्र की लहरों का शोर हल्की रोशनी और संगीत के माहौल में घुल गया था।
उनके सामने दो बियर के गिलास रखे थे, जिनसे हल्की ठंडक महसूस हो रही थी। लेकिन
दोनों के बीच हो रही बातचीत ने माहौल को और भी जिंदादिल बना दिया।



 



सुष्मिता ने एक गिलास उठाया और हल्की सी मुस्कान के साथ कहा,
“तो, अक्षय, बिजनेस की बात कब शुरू करें?” उसकी आवाज़ में वही
आत्मविश्वास था, जिसने उसे बिजनेस की दुनिया में नाम दिलाया था।



 



अक्षय ने गिलास उठाते हुए एक पल के लिए उसे देखा और मुस्कराते हुए
जवाब दिया, “सुष्मिता जी, हमेशा बिजनेस की ही बात करती हैं क्या? कभी अपने
बारे में सोचा है? कभी शीशे में देखा है खुद को, बिना किसी जिम्मेदारी या काम के
बारे में सोचे?”



 



सुष्मिता उसकी यह बात सुनकर चौंक गई। शायद यह पहली बार था कि किसी ने
उससे इस तरह का सवाल पूछा था। वह हल्के से हंसी और कहा, “मैंने अपनी जिंदगी
हमेशा परिवार और काम को समर्पित की है। मेरे पास खुद के बारे में सोचने का वक्त कब
था?”



 



अक्षय ने उसे ध्यान से देखा और कहा, “मुझे यकीन है कि आपकी
मेहनत और समर्पण की कोई तुलना नहीं है। लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि आपकी जिंदगी
में भी वो छोटे-छोटे पल होने चाहिए जो सिर्फ और सिर्फ आपके लिए हों?”



 



सुष्मिता ने कुछ पल सोचा और अपनी जिंदगी की तस्वीरें उसके सामने आने
लगीं—पिता की मौत, बिजनेस संभालने की जिम्मेदारी, और हर रोज़ नए संघर्ष। उसने कहा,
“शायद आप सही कह रहे हैं, लेकिन मुझे कभी लगा ही नहीं कि ये मेरे लिए संभव
है।”



 



अक्षय ने मुस्कान के साथ कहा, “संभव और असंभव तो बस सोच की
बातें हैं। आपने जो कुछ भी हासिल किया है, वो असंभव सा ही था। लेकिन फिर भी आपने
किया। तो अब अपनी खुशी के लिए कुछ करना क्यों असंभव लगता है?”



 



यह सुनकर सुष्मिता पहली बार सोच में पड़ गई। उसने महसूस किया कि
अक्षय की बातों में वाकई सच्चाई थी। उसने खुद को हमेशा दूसरों की उम्मीदों और
जिम्मेदारियों में इतना खो दिया कि अपने लिए कभी कुछ नहीं सोचा।



 



सुष्मिता ने हल्के स्वर में कहा, “अक्षय, आपने इतने कम समय में
इतनी सफलता कैसे हासिल की? यह सब कैसे किया आपने?”



 



अक्षय ने अपने गिलास से एक सिप लेते हुए जवाब दिया, “शुरुआत में
यह सब आसान नहीं था। लेकिन मैंने सीखा कि जिंदगी में बैलेंस बनाना जरूरी है। मैंने
सीखा कि काम और खुशियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। शायद यही वजह है कि मैं
आपको कह रहा हूं कि आप भी अपनी जिंदगी में थोड़ा संतुलन लाएं।”



 



सुष्मिता ने उसकी बात पर ध्यान दिया और महसूस किया कि अक्षय की सलाह
कितनी महत्वपूर्ण थी।



 



शाम धीरे-धीरे बीत रही थी। दोनों ने अपनी बातचीत को आगे बढ़ाया, जहां
सुष्मिता ने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए, तो अक्षय ने अपनी नई सोच और दृष्टिकोण
से उसे प्रेरित किया।



 



अंत में अक्षय ने कहा, “सुष्मिता जी, जिंदगी एक बार ही मिलती
है। उसे पूरी तरह से जीना चाहिए। आप अपने बिजनेस में कमाल की हैं, लेकिन अब वक्त
है कि आप अपनी खुशी पर भी ध्यान दें।”



 



सुष्मिता ने पहली बार महसूस किया कि शायद उसे वाकई अपनी जिंदगी के
बारे में फिर से सोचने की जरूरत है। अक्षय के साथ हुई इस बातचीत ने उसकी सोच और
जीवन में एक नई दिशा देने का काम किया।



यह रात सिर्फ एक बिजनेस मीटिंग नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसी मुलाकात थी
जिसने सुष्मिता को अपनी जिंदगी के बारे में नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया। उसने
तय किया कि वह न सिर्फ अपने बिजनेस को, बल्कि अपनी जिंदगी को भी नई ऊंचाइयों तक ले
जाएगी।



 



भाग 5



 



सुष्मिता के जीवन में हर पल उसकी सफलता और संघर्ष की गाथा का प्रमाण
था। वह फाइव स्टार होटल के सजीले कमरे में आराम कर रही थी, जहां उसकी हर चीज
आलीशान थी। पर आज उसने देर से उठने का फैसला किया, क्योंकि बीती रात अक्षय के साथ
उसकी बिजनेस मीटिंग काफी लंबी चली थी। मीटिंग के दौरान बिजनेस के संकल्प के
साथ-साथ उसकी अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की परतें भी खुल गई थीं। अक्षय,  ने कुछ प्रश्न पूछे थे जो न केवल व्यापारिक थे
बल्कि व्यक्तिगत भी। उसने बिना झिझक के अपनी जिंदगी के संघर्ष और संतोष को खोलकर
रख दिया था। यह वार्तालाप उसके दिमाग में गूंज रहा था।



 



सुबह जब वह जागी, तो उसकी आंखों में हल्का सा थकान और चेहरे पर एक
गहरी सोच की झलक थी। वह धीरे-धीरे बिस्तर से उठी और बाथरूम की ओर बढ़ी। गर्म पानी
की बौछारों से उसके शरीर और मन को ताजगी का अहसास हुआ। स्नान के बाद जब वह बाथरूम
से बाहर निकली, तो उसकी नजर सामने दीवार पर लगे आदमकद शीशे पर पड़ी। उसने अपने
शरीर को देखा—माना कि उसकी उम्र 45 साल की हो चुकी थी, लेकिन उसका शरीर अभी भी
जवानी के रंगत से भरा था। उसकी त्वचा में एक चमक थी, और उसके व्यक्तित्व में
आत्मविश्वास की गर्माहट। उसके शरीर का एक-एक कसबल ठीक वैसे ही था जैसे किसी 25 साल
की युवती का होता है उसके होंठ गुलाब की पंखुड़ियां से थे उसके नैन नक्श किसी भी
हीरोइन को मात कर देने वाले थे,



 



उसकी नजर अपने बालों पर गई, जो उसकी उम्र के बावजूद घने, लंबे और
चमकदार थे और आज भी एकदम स्याह काले थे। बालों की लहरें उसके कंधों पर गिर रही
थीं, जैसे कि वह खुद में एक कृति हो। उनकी प्राकृतिक चमक और जीवंतता उसकी सुंदरता
की पराकाष्ठा को दर्शाती थी। ऐसा लगता था कि उसके बाल भी उसकी कहानी का हिस्सा
थे—हर लहर में उसकी शक्ति और हर चमक में उसका दृढ़ संकल्प झलकता था।



 



उसने अपने प्रतिबिंब को घूरते हुए खुद से कहा, “क्या मैं वाकई
अपनी उम्र को महसूस करती हूँ? या मेरी सोच ही मेरा असली स्वरूप है?”



 



इसी विचार के साथ, सुष्मिता होटल के कमरे में मौजूद खिड़की के पास
पहुँची। बाहर का नजारा अद्भुत था—शहर का भाग दौड़ और उसके भीतर का शांत वातावरण।
उसने एक गहरी सांस ली और सोचने लगी कि वह अब कहाँ है, और उसकी जिंदगी में अगला कदम
क्या होगा। अक्षय ने जो बातें पूछी थीं, वे अब उसके मानस पर छाई हुई थीं। क्या वह
केवल अपने बिजनेस और उसके टारगेट के पीछे भागती रही है? क्या उसकी जिंदगी का कोई
गहरा अर्थ होना चाहिए, एक ऐसा उद्देश्य जो आत्मा को भी संतुष्टि प्रदान करे?



 



वह धीरे-धीरे कमरे के कोने में रखे काउच पर बैठ गई। उसके मन में एक
विचार आया—उसकी जिंदगी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। उसने खुद से वादा किया कि
वह अपने अनुभवों को एक नई दिशा देगी। चाहे वह बिजनेस हो या व्यक्तिगत जीवन, वह नई
ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।



उसने अपने फोन को उठाकर अक्षय को एक मैसेज भेजा: “कल की बातचीत
ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। मैं अपने जीवन को एक नया अर्थ देना चाहती हूँ।
हमें जल्दी ही मिलना चाहिए और इस पर चर्चा करनी चाहिए।”



 



अक्षय ने तुरंत जवाब दिया, “यह मेरी भी सोच थी। हम अगले कदम की
योजना बनाते हैं।”



 



सुष्मिता मुस्कुराई। उसने महसूस किया कि वह केवल अपनी जवानी के रंगत
से नहीं बल्कि अपने विचारों और संकल्प से भी अपनी उम्र को मात दे रही है। उसने एक
कप कॉफी बनाई और खिड़की के पास बैठकर शहर की हलचल को देखती रही। बाहर की भागदौड़
उसे यह एहसास दिला रही थी कि जिंदगी रुकने का नाम नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नाम
है।



 



भाग 6



 



 



सुष्मिता ने आज सुबह खुद को एक अलग अंदाज में तैयार किया। उसने एक
लाल रंग की ड्रेस पहनी थी, जो उसके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को और निखार रही थी।
उसके बाल खुले हुए थे, और हल्का मेकअप उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था। जब वह
होटल के कॉन्फ्रेंस रूम में अक्षय से मिलने पहुँची, तो अक्षय की नजरें उस पर टिक
गईं। वह कुछ पल के लिए चुप रह गया, जैसे शब्दों ने उसका साथ छोड़ दिया हो।



 



“अक्षय,” सुष्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “क्या हुआ?
कुछ कहना है?”



 



अक्षय ने खुद को संभालते हुए कहा, “तुम… आज बहुत अलग लग रही
हो। तुम्हारा यह अंदाज… सच में कमाल है।”



 



सुष्मिता ने हंसते हुए जवाब दिया, “धन्यवाद, अक्षय। कभी-कभी
बदलाव जरूरी होता है, है ना?”



 



बैठक शुरू हुई, और दोनों ने अपने व्यवसायिक मुद्दों पर चर्चा की।
सुष्मिता ने अपनी योजनाओं को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किया, और अक्षय ने उसकी
हर बात को ध्यान से सुना। उनकी बातचीत में एक सहजता थी, जो उनके लंबे समय के सहयोग
और आपसी समझ को दर्शाती थी।



 



“तो, सुष्मिता,” अक्षय ने कहा, “मुझे लगता है कि यह
डील फाइनल हो चुकी है। तुम्हारी योजना वाकई प्रभावशाली है।”



 



सुष्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद, अक्षय। यह सब
तुम्हारे सहयोग के बिना संभव नहीं होता।”



 



बैठक खत्म होने के बाद, अक्षय ने उठते हुए कहा, “अब मुझे चलना
चाहिए। कल की मीटिंग के लिए कुछ तैयारी करनी है।”



 



सुष्मिता ने खिलखिलाते हुए कहा, “रुको, अक्षय। कल तुमने मुझे
ड्रिंक ऑफर किया था, याद है? आज मेरी बारी है।”



 



अक्षय ने हैरानी से उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “सच
में? यह तो सरप्राइज है।”



 



सुष्मिता ने कहा, “हां, चलो। होटल के लाउंज में चलते हैं। वहां
आराम से बैठकर बात करेंगे।”



 



दोनों लाउंज में पहुंचे और एक कोने की टेबल पर बैठ गए। सुष्मिता ने
वेटर को बुलाकर दो ड्रिंक्स ऑर्डर कीं। अक्षय ने उसकी ओर देखते हुए कहा,
“तुम्हारे इस आत्मविश्वास और अंदाज ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है,
सुष्मिता।”



 



सुष्मिता ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “अक्षय, यह सब अनुभव और
समय का नतीजा है। लेकिन तुम्हारी तारीफ के लिए धन्यवाद।”



 



ड्रिंक्स के दौरान, दोनों ने न केवल अपने व्यवसायिक मुद्दों पर बल्कि
अपनी व्यक्तिगत जिंदगी पर भी चर्चा की। अक्षय ने कहा, “सुष्मिता, तुम्हारी
जिंदगी के बारे में जानकर हमेशा लगता है कि तुमने हर चुनौती का सामना बड़ी हिम्मत
से किया है।”



 



सुष्मिता ने जवाब दिया, “अक्षय, जिंदगी हमें हर दिन कुछ नया
सिखाती है। और मैं मानती हूं कि हर अनुभव हमें मजबूत बनाता है।”



 



उनकी बातचीत गहरी होती गई, और दोनों ने महसूस किया कि उनके बीच न
केवल व्यवसायिक बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी एक खास जुड़ाव है। जब रात गहराने लगी,
तो अक्षय ने कहा, “सुष्मिता, आज का यह समय मेरे लिए बहुत खास था। तुम्हारा यह
अंदाज और तुम्हारी बातें हमेशा याद रहेंगी।”



 



सुष्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “अक्षय, यह तो बस शुरुआत है।
जिंदगी में और भी कई मौके आएंगे, जब हम इस तरह बैठकर बात करेंगे।”



 



अक्षय ने कहा, “मैं इस पल का इंतजार करूंगा।”



 



दोनों ने एक-दूसरे को अलविदा कहा और अपने-अपने रास्ते चले गए। लेकिन
उस रात, दोनों के दिलों में एक नई शुरुआत की उम्मीद और उत्साह था।



 



भाग 7



 



सुष्मिता का जीवन एक नई दिशा की ओर बढ़ चुका था। कल रात होटल में
अक्षय के साथ हुई बातचीत ने उसके मन में एक गहरी छाप छोड़ी थी। उसने महसूस किया कि
केवल व्यवसायिक सफलता ही जीवन का उद्देश्य नहीं हो सकता। इसके साथ-साथ इंसानियत,
दया और सहृदयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इसी सोच के साथ वह अपने ऑफिस पहुँची,
और उसके बदले हुए रवैये ने सभी को चकित कर दिया।



 



सुष्मिता ऑफिस में हमेशा अपनी कड़क और अनुशासनप्रिय छवि के लिए जानी
जाती थी। उसके कर्मचारी उससे डरते थे, और कई बार उनकी शिकायतें भी होती थीं कि वह
भावनात्मक रूप से कठोर हैं। लेकिन आज, उसकी आभा में एक नई ऊर्जा थी। वह मुस्कुराते
हुए ऑफिस में दाखिल हुई, और सबसे पहले उसने अपने सहायक प्रियंका को बुलाया।



 



“प्रियंका,” उसने मधुर स्वर में कहा, “आज का शेड्यूल
क्या है? और हाँ, तुमने अपनी छुट्टियों के लिए जो एप्लिकेशन दी थी, वह मैंने मंजूर
कर दी है। परिवार के साथ समय बिताना बहुत ज़रूरी है।”



 



प्रियंका, जो अक्सर सुष्मिता के पास आते हुए झिझकती थी, आश्चर्यचकित
होकर बोली, “धन्यवाद, मैम। आपने… आपने सच में मंजूर कर दिया? मैं बहुत
आभारी हूँ।”



 



सुष्मिता मुस्कुराई, “हाँ, प्रियंका। और अगर तुम्हें किसी और
चीज़ की ज़रूरत हो, तो बेझिझक मुझसे कहो।”



 



इस छोटी-सी बातचीत ने पूरे ऑफिस में एक नई लहर पैदा कर दी। कर्मचारी
फुसफुसा रहे थे, “क्या ये वही सुष्मिता हैं जिन्हें हम जानते हैं?” हर
कोई उसके बदले हुए व्यवहार को देख रहा था और उसकी प्रशंसा कर रहा था।



 



दोपहर के समय कैंटीन में कर्मचारियों के बीच बातचीत चल रही थी। अजय,
जो सुष्मिता की टीम में एक जूनियर अधिकारी था, बोला, “आज मैम कुछ अलग लग रही
थीं। क्या आप लोगों ने देखा? उन्होंने प्रियंका की छुट्टी मंजूर कर दी!”



 



अनुराधा ने कहा, “हाँ, और जब मैं उन्हें चाय देने गई, तो
उन्होंने मुझसे मेरा हालचाल भी पूछा। ये तो पहली बार हुआ है!”



 



रवि, जो अक्सर सुष्मिता की आलोचना करता था, इस बार उसकी प्रशंसा करने
से खुद को रोक नहीं सका। उसने कहा, “शायद उन्होंने महसूस किया है कि सख्ती से
हमेशा काम नहीं बनता। मुझे लगता है, वो अब हमें समझने की कोशिश कर रही हैं।”



 



कैंटीन में सभी कर्मचारी सुष्मिता के नए रूप की सराहना कर रहे थे। यह
बदलाव उनके लिए एक सुखद आश्चर्य था।



 



शाम को, सुष्मिता ने पूरे ऑफिस को मीटिंग रूम में बुलाया। सब लोग सोच
रहे थे कि यह मीटिंग किसी सख्त निर्देश के लिए होगी, लेकिन उनके बदले हुए स्वरूप
को देखकर उत्सुकता थी।



 



सुष्मिता ने कहा, “आज मैं आप सबसे एक खास बात करना चाहती हूँ।
मैंने महसूस किया है कि काम की जिम्मेदारियों में कई बार मैं आप सबकी भावनाओं और
ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर देती थी। लेकिन अब मैं यह बदलाव लाना चाहती हूँ। मैं
चाहती हूँ कि हमारा ऑफिस एक ऐसी जगह हो, जहां आप न केवल काम करें, बल्कि खुशी और
सुकून भी महसूस करें।”



 



अजय ने झिझकते हुए कहा, “मैम, आपके इन शब्दों से हमें बहुत
हौसला मिला है। हमने हमेशा आपके अनुशासन की तारीफ की है, लेकिन अब हम आपके इस
व्यवहार से और भी प्रेरित हैं।”



 



सुष्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद, अजय। यह बदलाव मैं
अकेले नहीं कर सकती। हमें मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां हर कोई अपनी पूरी
क्षमता से काम कर सके और साथ ही खुश भी रहे। अगर किसी को कोई समस्या है, तो आप
मुझसे बेहिचक साझा कर सकते हैं।”



 



मीटिंग खत्म होते ही, सभी कर्मचारियों ने तालियों से सुष्मिता का
स्वागत किया। यह उसके लिए एक नया अनुभव था, और उसने महसूस किया कि उसके इस बदले
हुए रवैये से केवल ऑफिस का माहौल ही नहीं, बल्कि उसके अपने दिल की संतुष्टि भी बढ़
रही थी।



 



उस शाम जब सुष्मिता अपने केबिन में बैठी थी, प्रियंका ने आकर कहा,
“मैम, आज का दिन वाकई खास था। आपका यह बदलाव हमारे लिए बहुत मायने रखता
है।”



 



सुष्मिता ने कहा, “प्रियंका, यह बदलाव मेरे लिए भी मायने रखता
है। मैंने महसूस किया है कि सख्ती से हम केवल काम तो करवा सकते हैं, लेकिन लोगों
का दिल नहीं जीत सकते। और मैंने सीखा है कि जिंदगी केवल काम के लिए नहीं, बल्कि
खुशी बाँटने के लिए भी है।”



 



प्रियंका ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम सब आपके साथ हैं, मैम। और
यह बदलाव हमारे ऑफिस के लिए नई शुरुआत होगी।”



 



उस दिन सुष्मिता ने महसूस किया कि एक सख्त ऑफिसर होने से ज्यादा
संतोषजनक है एक ऐसा लीडर बनना, जो अपने कर्मचारियों की भलाई और खुशी का ख्याल रखे।



 



भाग 8



 



सुष्मिता एक महत्वाकांक्षी और मेहनती प्रोजेक्ट मैनेजर थी। उसे हाल
ही में अक्षय से एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला था, जो कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
सुष्मिता ने अपनी टीम को इकट्ठा किया और काम शुरू कर दिया। टीम में हिमांशी और
हरप्रीत भी थे, जो दोनों बहुत प्रतिभाशाली और मेहनती थे।



काम शुरू होने के कुछ घंटों बाद, सुष्मिता ने देखा कि हिमांशी और
हरप्रीत अपनी सीटों पर नहीं हैं। उसने सोचा कि वे शायद किसी मीटिंग में गए होंगे,
लेकिन जब उसने मीटिंग रूम में देखा, तो वे वहाँ नहीं थे। सुष्मिता को थोड़ा अजीब
लगा, इसलिए उसने उन्हें खोजने का फैसला किया।



वह एक शांत और अलग केबिन की ओर बढ़ी, जिसका उपयोग आमतौर पर छोटे
समूहों की बैठकों के लिए किया जाता था। जब उसने दरवाजा खोला, तो वह यह देखकर हैरान
रह गई कि हिमांशी और हरप्रीत एक-दूसरे के करीब बैठे थे और एक-दूसरे में पूरी तरह
से खोए हुए थे, दोनों ने एक दूसरे को अपनी बहू के आगोश में जकड़ रखा था और दोनों
के हॉट एक दूसरे के फोटो से ऐसे चिपके हुए थे जैसे उन्हें फेविकोल से चिपका दिया
गया हो, सुष्मिता को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।



उसे पता था कि हिमांशी और हरप्रीत अच्छे दोस्त थे, लेकिन उसने कभी
नहीं सोचा था कि उनके बीच कुछ और भी हो सकता है। वह थोड़ी देर के लिए वहीं खड़ी
रही, यह तय करने की कोशिश करती रही कि उसे क्या करना चाहिए। फिर उसने धीरे से
दरवाजा खटखटाया।



“अरे, तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो?” उसने पूछा।



हिमांशी और हरप्रीत चौंक गए और जल्दी से अलग हो गए। उनके चेहरे शर्म
से लाल हो गए।



“हम… हम बस बात कर रहे थे,” हिमांशी ने हकलाते हुए कहा।



“मुझे पता है,” सुष्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा।
“लेकिन मुझे लगा कि तुम दोनों काम कर रहे होगे।”



“हम कर रहे थे,” हरप्रीत ने कहा। “लेकिन हम थोड़ी देर
के लिए रुक गए।”



“ठीक है,” सुष्मिता ने कहा। “लेकिन हमें इस प्रोजेक्ट
को समय पर पूरा करना है। इसलिए, कृपया वापस काम पर लग जाओ।”



हिमांशी और हरप्रीत ने सिर हिलाया और अपनी सीटों पर वापस चले गए।
सुष्मिता ने दरवाजा बंद कर दिया और अपने डेस्क पर लौट आई। वह अभी भी थोड़ा हैरान
थी, लेकिन उसे खुशी थी कि उसने उन्हें परेशान नहीं किया।



अगले कुछ दिनों में, सुष्मिता ने देखा कि हिमांशी और हरप्रीत
एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता रहे थे। वे लंच ब्रेक में एक साथ बैठते थे और अक्सर
देर रात तक साथ काम करते थे। सुष्मिता ने सोचा कि क्या उनके बीच कुछ चल रहा है,
लेकिन उसने उनसे इसके बारे में नहीं पूछा।



एक शाम, जब सुष्मिता देर तक काम कर रही थी, तो उसने देखा कि हिमांशी
और हरप्रीत एक साथ केबिन में जा रहे हैं। उसने सोचा कि वे शायद मीटिंग कर रहे
होंगे, लेकिन उसे संदेह हुआ। उसने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर देखा।



वह यह देखकर चौंक गई कि हिमांशी और हरप्रीत एक-दूसरे को किस कर रहे
थे। सुष्मिता को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। वह तुरंत केबिन से बाहर
निकल गई और अपने डेस्क पर लौट आई।



वह सोच रही थी कि उसे क्या करना चाहिए। उसे पता था कि हिमांशी और
हरप्रीत दोनों ही प्रतिभाशाली और मेहनती कर्मचारी थे,



अगले दिन, सुष्मिता ने हिमांशी और हरप्रीत को अपने कार्यालय में
बुलाया।



“मुझे पता है कि तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है,” उसने
कहा।



हिमांशी और हरप्रीत ने एक-दूसरे को देखा और फिर सुष्मिता को देखा।



“हम… हम प्यार में हैं,” हिमांशी ने कहा।



“मुझे खुशी है कि तुम दोनों खुश हो,” सुष्मिता ने कहा।
“लेकिन मुझे यह भी पता है कि कार्यालय में रोमांस समस्याएँ पैदा कर सकता है।
इसलिए, मैं चाहती हूँ कि तुम दोनों इस बारे में सोचो कि तुम क्या कर रहे हो।”



हिमांशी और हरप्रीत ने सिर हिलाया।



“हम समझते हैं,” हरप्रीत ने कहा। “हम सावधान
रहेंगे।”



सुष्मिता ने उन्हें जाने दिया और अपने डेस्क पर लौट आई। उसे उम्मीद
थी कि हिमांशी और हरप्रीत अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं और काम पर ध्यान
केंद्रित कर सकते हैं।



अगले कुछ हफ्तों में, सब कुछ सामान्य रहा। हिमांशी और हरप्रीत ने काम
पर ध्यान केंद्रित किया और उनके बीच कोई समस्या नहीं हुई। सुष्मिता को राहत मिली।



एक दिन, जब सुष्मिता अक्षय के कार्यालय में थी, तो उसने देखा कि
हिमांशी और हरप्रीत एक साथ अंदर जा रहे हैं। उसे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन उसने कुछ
नहीं कहा।



कुछ देर बाद, हिमांशी और हरप्रीत बाहर आए और सुष्मिता को देखकर चौंक
गए।



“हम… हम बस अक्षय से बात कर रहे थे,” हिमांशी ने कहा।



“मुझे पता है,” सुष्मिता ने कहा। “लेकिन मुझे लगा कि
तुम दोनों काम कर रहे होगे।”



“हम कर रहे थे,” हरप्रीत ने कहा। “लेकिन हम थोड़ी देर
के लिए रुक गए।”



“ठीक है,” सुष्मिता ने कहा। “लेकिन हमें इस प्रोजेक्ट
को समय पर पूरा करना है। इसलिए, कृपया वापस काम पर लग जाओ।”



हिमांशी और हरप्रीत ने सिर हिलाया और अपनी सीटों पर वापस चले गए।
लेकिन हिमांशी और हरप्रीत के उसे प्यार ने सुष्मिता के दिलों दिमाग में एक हलचल
मचा दी थी उसको ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके दिमाग की स्मृतियों की नसों पर जमी
बरसों के रेत प्यार के हवा के हिलोरों से तेजी से उड़ती जा रही थी और बहुत सी
यादों को बाहर ला रही थी।



 



भाग 9



 



सुष्मिता ने आज सुबह उठते ही कुछ अजीब सा महसूस किया था। उसका दिल
भारी था और मन बेचैन। वह समझ नहीं पा रही थी कि यह अचानक उमड़ती भावनाओं का सैलाब
क्या कह रहा है। काम पर जाने की तैयारी करते समय भी वह कई बार अपने ही विचारों में
खो गई थी। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। आखिरकार उसने
काम से जल्दी छुट्टी लेने का फैसला किया।



 



घर पहुंचने के बाद सुष्मिता ने खुद को शांत करने के लिए एक कप चाय
बनाई। वह बालकनी में बैठी चाय की चुस्की लेते हुए सोचने लगी, “यह सब क्या है?
क्यों मैं अचानक इतनी भावुक हो रही हूं?” लेकिन जवाब उसके पास नहीं था। उस
दिन के कुछ पुराने अनुभव उसकी यादों में तैरने लगे। कुछ काम से जुड़ी घटनाएं, कुछ
व्यक्तिगत अनुभव, और उनमें से एक बार फिर अक्षय का चेहरा उसकी नजरों के सामने आ
गया। अक्षय, जो उसके नए प्रोजेक्ट में साथ काम कर रहा था, उसे देखकर हमेशा एक अलग
ऊर्जा का अनुभव होता था।



 



बहुत देर तक कस्मकश में रहने के बाद उसने अक्षय को फोन करने का फैसला
किया। उसने अक्षय को कॉल मिलाया और थोड़ी हिचकिचाहट के बाद बोली, “अक्षय,
क्या तुम थोड़ी देर बात करने के लिए समय निकाल सकते हो?” अक्षय ने तुरंत हामी
भर दी।



 



कुछ ही समय बाद दोनों एक कैफे में मिले। अक्षय ने सुष्मिता को देखते
ही मुस्कुराकर कहा, “क्या बात है सुष्मिता? तुम परेशान लग रही हो। सब ठीक है
ना?” सुष्मिता ने गहरी सांस ली और कहा, “मैं खुद समझ नहीं पा रही हूं।
लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे मेरे अंदर कुछ बदल रहा है। कुछ ऐसा जो मुझे रोक रहा है
या शायद मुझे नई दिशा दिखाने की कोशिश कर रहा है।”



 



अक्षय ने उसकी बात को ध्यान से सुना और कहा, “कभी-कभी हमें अपने
मन की बात को समझने के लिए थोड़ा समय और खुद को वक्त देने की जरूरत होती है। शायद
यह तुम्हारा दिल तुम्हें कुछ नया करने की ओर इशारा कर रहा है।”



 



उनकी बातचीत के दौरान सुष्मिता ने महसूस किया कि अक्षय की बातें उसे
भीतर से सुकून दे रही थीं। उसने अक्षय को बताया कि काम में एक नई जिम्मेदारी
संभालने के बाद वह खुद को बदलते हुए महसूस कर रही है। यह बदलाव उसे घबराहट भी दे
रहा है, लेकिन साथ ही एक नई उम्मीद भी।



 



अक्षय ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारे भीतर जो बदलाव आ रहा
है, वह तुम्हारे व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के लिए अच्छा ही होगा। हर चुनौती हमें
एक नया अवसर देती है। तुम बस खुद पर विश्वास रखो।”



सुष्मिता  अक्षय के साथ हुई
बातचीत के पल को बार-बार दोहरा रही थी। उसकी बातें मन को राहत दे रही थीं, लेकिन
जाने क्यों, उसके भीतर एक अजीब सी कशमकश चल रही थी। जैसे ही अक्षय उठकर जाने के
लिए तैयार हुआ, सुष्मिता ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया। यह पहली बार था जब उसने
किसी पुरुष का हाथ यूं पकड़ा था। उसके भीतर की हलचल एक लहर बनकर उभर आई।



 



अक्षय ने हैरानी से उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या
हुआ सुष्मिता? सब ठीक है?” उसकी आवाज में वही सहजता और अपनापन था, जिसने
सुष्मिता को हमेशा सुकून दिया था।



 



सुष्मिता ने अपनी नजरें झुका लीं। उसने हल्के स्वर में कहा,
“अक्षय, मुझे नहीं पता कि मुझे क्या हुआ। लेकिन… मैंने कभी खुद को ऐसा
महसूस करते नहीं देखा। शायद मैं तुम्हें रोकना चाहती थी, शायद कुछ और कहना चाहती
थी, लेकिन शब्द नहीं मिल रहे।”



 



अक्षय ने उसकी बात को गौर से सुना और गहरी सांस लेते हुए कहा,
“देखो सुष्मिता, जीवन में कभी-कभी हमें अपनी भावनाओं को समझने का मौका देना
चाहिए। यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि इंसान होने की खूबसूरती है।”



 



सुष्मिता ने उसकी ओर देखा, आंखों में झिझक और भावनाओं का तूफान।
“अक्षय, तुमने हमेशा मुझे समझा है। लेकिन आज जो हो रहा है, वह मैं खुद नहीं
समझ पा रही। यह डर, यह लगाव, यह बेचैनी… क्या तुमने कभी ऐसा महसूस किया
है?” उसने साहस जुटाकर पूछा।



 



अक्षय ने एक पल चुप रहकर उसकी आंखों में झांका। फिर उसने कहा,
“हां, सुष्मिता, महसूस किया है। जब हम किसी से जुड़ते हैं, तो वह सिर्फ उनकी
बातों या आदतों से नहीं होता। यह उस गहराई से होता है, जो बिना शब्दों के हमें
महसूस होती है। लेकिन इसका मतलब समझने के लिए हमें खुद से ईमानदार होना पड़ता
है।”



 



सुष्मिता ने अपने हाथ को तेजी से वापस खींच लिया और थोड़ा झेंपते हुए
बोली, “शायद मैं थोड़ा ज्यादा सोच रही हूं। लेकिन यह भावनाएं मुझे परेशान कर
रही हैं।”



 



अक्षय ने मुस्कुराते हुए कहा, “सुष्मिता, जो भी हो, उसे स्वीकार
करना सबसे पहला कदम है। और याद रखना, तुम अकेली नहीं हो। अगर तुम्हें मुझसे बात
करने की जरूरत हो, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।”



 



उसकी यह बात सुनकर सुष्मिता को थोड़ा सुकून मिला। उसने हल्की मुस्कान
के साथ कहा, “शुक्रिया अक्षय। शायद यह वक्त और खुद को समझने का सही मौका
है।”



 



अक्षय ने कहा, “बिल्कुल। और याद रखना, कभी-कभी दिल की बातों को
खुलकर कह देना भी जरूरी होता है। अगर तुम्हें लगे कि कुछ कहना है, तो बिना हिचक
बोल देना। वैसे एक बात पूछूं राकेश के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है”



अक्षय ने वे शब्द और वह नाम बड़ी ही सहजता से कहे थे, लेकिन उसे क्या
मालूम था कि उसके शब्दों और उसके लिए हुए नाम ने सुष्मिता के दिलों दिमाग में ठीक
वैसे ही धमाके किये थे जैसे सैकड़ो बम एक साथ फट गए हो।



 



भाग 10



 



 नौजवान स्टेज सिंगर राकेश के
लिए हर शाम एक नई शुरुआत होती थी। क्लब की हलचल और मद्धम रोशनी में उसके सुरों की
मिठास मानो सब कुछ थाम लेती। वह माइक के पास खड़ा होकर अपने दिल का हाल गुनगुनाता
था। सुष्मिता अक्सर उसे सुनने आया करती थी। वह उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा और सपनों की
दुनिया थी।



 



लेकिन उस शाम कुछ अलग था। सुष्मिता ने क्लब के गेट पर कदम रखा, पर
उसकी आंखों में वही चमक नहीं थी। राकेश ने उसे देखा, और उसे देखकर उसकी आवाज़ कांप
गई। गाना खत्म होते ही वह सीधे सुष्मिता के पास गया।



 



**राकेश:** “सुष्मिता, तुम्हारी आंखों में उदासी क्यों है? सब
ठीक है?”



 



**सुष्मिता:** (धीरे से) “राकेश, मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती
हूं। यह बात शायद तुम्हारे लिए आसान न हो, लेकिन यह ज़रूरी है।”



 



राकेश का चेहरा सख्त हो गया। वह समझ गया कि यह आम बात नहीं थी। दोनों
पास की एक टेबल पर बैठ गए।



 



**सुष्मिता:** “राकेश, अब मुझे अपने परिवार और बिजनेस पर ध्यान
देना होगा। मैं तुम्हारे साथ समय बिताने का सुख अब और महसूस नहीं कर सकती।”



 



**राकेश:** (आश्चर्य और दर्द के साथ) “क्या? ऐसा क्यों कह रही
हो? मैं तुम्हारे साथ रहकर तुम्हें सहारा दे सकता हूं। तुम्हें अकेले सब कुछ
संभालने की ज़रूरत नहीं है।”



 



**सुष्मिता:** (आंखों में नमी लिए) “राकेश, मुझे पता है तुम
मेरी मदद करना चाहते हो। लेकिन तुम्हारे साथ रहकर मेरा ध्यान बंट जाएगा। मैं
परिवार और बिजनेस को वह समय नहीं दे पाऊंगी, जो मैं देना चाहती हूं।”



 



राकेश की आंखें भर आईं। वह एक पल के लिए खामोश हो गया। फिर उसने गहरी
सांस ली और उसे समझाने की कोशिश की।



 



**राकेश:** “सुष्मिता, प्यार में बलिदान और सहयोग होता है। मैं
तुम्हारे साथ खड़ा रह सकता हूं। मैं तुम्हारे सपनों को पूरा करने में मदद कर सकता
हूं। हमें एक-दूसरे से दूर जाने की ज़रूरत नहीं है।”



 



**सुष्मिता:** “राकेश, मैं तुम्हारे जज्बात समझती हूं, लेकिन यह
मेरे लिए सही फैसला है। तुम मेरे लिए बहुत मायने रखते हो, लेकिन फिलहाल मैं अपने
परिवार और काम को प्राथमिकता दे रही हूं।”



 



राकेश ने अपनी भावनाओं को दबाने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा।
उसकी आंखों से आंसू छलकने लगे।



 



**राकेश:** “अगर तुम यही चाहती हो तो मैं तुम्हारे फैसले का
सम्मान करूंगा। लेकिन यह जान लो कि मेरे दिल में तुम्हारे लिए प्यार हमेशा
रहेगा।”



 



**सुष्मिता:** (नम आंखों से) “धन्यवाद, राकेश। तुमने मुझे हमेशा
समझा है। मैं उम्मीद करती हूं कि तुम अपनी ज़िंदगी में खुश रहोगे।”



कहकर सुनीता ने तेजी से एक ट्रेन लिया और तेज कदमों से चलती हुई क्लब
से बाहर निकल गई और ऐसा करके उसने अच्छा ही किया क्योंकि ऐसा करके उसने उन आंसुओं
को छुपा लिया था जो उसकी पलकों से बस गिरने ही वाले थे।



 



20 साल पहले की घटना को याद करते हुए सुष्मिता की आंखों से आंसू झर
झर बह रहे थे, वह सामने खड़े अक्षय को हैरानी से देख रही थी.. उस अक्षय को जो मंद
मंद मुस्कुरा रहा था!



 



 “त…तुम तुम राकेश को
कैसे जानते हो?”- सुष्मिता ने आंसू बहाते हुए हैरानी से राकेश से पूछा तो
राकेश वैसे ही मुस्कुराते हुए बोला-



 



” बताऊंगा, सब बताऊंगा। पहले जरा अपनी उन आंखों से आंसुओं को
पौंछ लो जो पुरानी यादों को याद करक तुम्हारी खूबसूरत आंखों को झील बनाये दे रहे
हैं।.. तुम्हारी आंखों में आंसू नहीं उम्मीदें झलकनी चाहिए सुष्मिता! फिर वह
उम्मीद चाहे बिजनेस के टारगेट को पाने की हो या अपने पुराने प्यार राकेश को पाने
की!”



 



भाग 11



 



राकेश की उम्र भले ही 45 साल हो चुकी थी, लेकिन मंच पर उतरते ही उसकी
ऊर्जा और आवाज़ में वही जादू बसा था जो युवाओं को बांधकर रखता था। जब उसने माइक
थामा और सुर छेड़ा, पूरे क्लब में सन्नाटा छा गया। उसकी आवाज़ में लोकगीतों की
मिठास और तरंग थी, जिसने हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया। वह एक ऐसा कलाकार था,
जो संगीत के जरिए लोगों के दिलों में अपनी जगह बना चुका था।



 



तालियों की गड़गड़ाहट में उसकी गूंजती आवाज़ गुम हो चुकी थी कि अचानक
एक आवाज़ उभरी, “राकेश भैया, क्या आज वह गाना नहीं गाओगे जो आपने 25 साल पहले
गाया था?”



 



राकेश ने उस आवाज़ की ओर देखा और उसकी आंखें आश्चर्य से चौड़ी हो
गईं। यह अक्षय था, उसका छोटा भाई, जो वर्षों बाद अचानक उसके सामने खड़ा था। उसकी
उपस्थिति और उसके शब्दों ने राकेश को अतीत की यादों में खींच लिया।



 



**अक्षय:** “भैया, आपने जब वह गाना गाया था, तब उसकी मिठास आज
भी हमारे परिवार में यादगार बनी हुई है। क्या आज इसे सुनने का मौका मिलेगा?”



 



**राकेश:** (हैरान होकर) “अक्षय, तुम यहां कैसे? और उस गाने के
बारे में कैसे जानते हो? मैंने इसे बहुत पहले गाया था।”



 



**अक्षय:** “भैया, आपके गानों में जो भावनाएं होती थीं, वे
सिर्फ सुनने वालों को नहीं, बल्कि परिवार को भी छूती थीं। मुझे वह गाना आज भी याद
है क्योंकि वह आपके दिल से निकला था।”



 



राकेश को समझ में आया कि उसके संगीत ने न केवल उसके सुनने वालों के
दिलों को छुआ, बल्कि उसके अपने लोगों के दिलों में भी जगह बनाई। उसकी आंखों में
कुछ पल के लिए चमक आ गई।



 



**राकेश:** “अक्षय, मैं उस गाने को गाऊंगा। लेकिन पहले मुझे
बताओ, इतने साल बाद अचानक कैसे आ गए?”



 



**अक्षय:** “भैया, मैं बहुत सालों से आपसे दूर था। लेकिन आपके
गाने ने मुझे हमेशा महसूस कराया कि आप हमारे पास हैं। आज जब मैंने सुना कि आप इस
क्लब में गा रहे हैं, तो मैंने सोचा क्यों न आपको देखने और सुनने आऊं।”



 



अक्षय की बातों ने राकेश को भावुक कर दिया। उसने माइक फिर से थामा और
उस गाने की शुरुआत की जो उसने 25 साल पहले अपने पहले प्यार के लिए गाया था। उसकी
आवाज़ में हर शब्द, हर सुर में यादों का सागर बह रहा था। वह गाना न केवल अक्षय के
लिए, बल्कि सभी सुनने वालों के लिए एक एहसास बन गया।



 



गाना खत्म होते ही तालियों की गूंज फिर उठी। अक्षय की आंखों में आंसू
थे। वह अपने भाई को गले लगाकर बोला, “भैया, आपकी आवाज़ में हमेशा से प्यार और
जादू था। इसे कभी मत छोड़ना और रही बात आपके आंसुओं की तो मैं बता दूं कि यह गाना
गाते हुए आपकी आंखें ही नहीं रो रही बल्कि उसकी आंखें भी रो रही है जिसने इसे सुना
है और जानते हैं वह कौन है वह जिसके लिए आप 25 
साल पहले यह गाना गाते थे।”



 



भाग 12



 



 



अक्षय मुस्कुराता हुआ हैरान खड़े अपने बड़े भाई राकेश से बोला-*
“भैया,  25 साल पहले आपने इसके लिए यह
गाना गाया था? वह उधर खड़ी है।”



 



राकेश ने अक्षय की ओर देखा और उसके शब्दों को समझने की कोशिश करने
लगा। उसकी नजरें तेजी से भीड़ में घूमीं और तभी उसने उसे देखा। सुष्मिता। वही
सुष्मिता, जिसने कभी उसे छोड़ दिया था। वह अब उसके सामने खड़ी थी। इतना समय गुजर
जाने के बाद भी राकेश ने सुष्मिता को पहचानने में एक पल भी नहीं गंवाया था। उनके
बीच जैसे समय ठहर गया। उनकी आंखें एक-दूसरे में उलझ गईं।



 



**राकेश:** “सुष्मिता… तुम?”



 



**सुष्मिता:** (धीमे स्वर में) “हां, राकेश। मैं हूं।”



 



राकेश के दिल में पुराने ज़ख्म ताजा हो गए। वह मंच से नीचे उतरा और
उसके करीब आया। उसकी आवाज़ कांप रही थी।



 



**राकेश:** “तुम यहां कैसे? इतने साल बाद… तुम्हें देखकर मेरी
आंखों को विश्वास नहीं हो रहा।”



 



**सुष्मिता:** “राकेश, एक समय था जब मैंने तुम्हें अपने परिवार
और बिजनेस के लिए छोड़ दिया था। लेकिन अक्षय ने मुझे बताया कि जीवन में परिवार और
बिजनेस के साथ प्यार भी ज़रूरी होता है। मैं सोचती थी कि प्यार मेरे लिए रुकावट बन
सकता है। लेकिन अब मुझे समझ में आया कि प्यार तो हमें और ताकत देता है।”



 



राकेश की आंखों में नमी आ गई। उसकी पुरानी यादें और वे दर्द, जो उसने
छिपा रखा था, सब बाहर आ गए। वह सुष्मिता को देखकर खामोश खड़ा था।



 



**राकेश:** “सुष्मिता, तुम्हारे बिना जीवन बहुत मुश्किल था।
मैंने तुम्हें भुलाने की कोशिश की, लेकिन हर गीत में तुम ही थीं। तुम्हारा प्यार
कभी खत्म नहीं हुआ।”



 



**सुष्मिता:** “मैं भी बहुत सालों तक यह सोचती रही कि मैं सही
थी। लेकिन अब मुझे एहसास हुआ कि हमने अपनी भावनाओं को दबाया, जबकि हमें उन्हें साथ
जीना चाहिए था। मैं जानती हूं कि हम उम्रदराज हो गए हैं, लेकिन प्यार कभी पुराना
नहीं होता।”



 



अक्षय, जो एक तरफ खड़ा सब देख रहा था, मुस्कुराया। उसने धीरे से कहा,
” भैया ने तुम्हारे बारे में मुझे बहुत बार बताया उन्होंने मुझे तुम्हारी
तस्वीर भी दिखाई, इसीलिए मैंने तुम्हें मिलने और तुम्हें तुम्हारा पुराना प्यार
याद दिलाने के लिए एक ऐसा असाइनमेंट तैयार किया जिसमें मैं तुम्हारा क्लाइंट बनाकर
तुम्हारे पास पहुंच जाऊं। मेरा सोचना और मेरा प्लान सफल हुआ आज तुम और भैया दोनों
एक दूसरे के आमने-सामने हो एक दूसरे के लिए…. वैसे  भैया, वह गाना आज गाना चाहिए जो आपने सुष्मिता
के लिए लिखा था।”



 



राकेश ने माइक उठाया और मंच पर वापस चला गया। उसकी आवाज़ इस बार पहले
से भी अधिक भावुक थी। उसने वह गाना गाया, जो उसने 25 साल पहले लिखा था। उसकी हर
पंक्ति में पुरानी यादें ताजा हो गईं। सुष्मिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। वह
महसूस कर रही थी कि प्यार कितना गहरा और सच्चा था।



 



राकेश ने गाना खत्म किया और भावुकता भरे स्वर में कहने
लगा-“सुष्मिता, यह गाना तुम्हारे लिए था और हमेशा रहेगा। प्यार ने हमें भले
ही अलग किया हो, लेकिन उसने हमें फिर से एक किया है।”



 



सुष्मिता ने मंच की ओर कदम बढ़ाए और राकेश को गले लगा लिया। क्लब की
भीड़ तालियां बजाती रही, लेकिन दोनों के लिए वह क्षण उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा
उत्सव था। प्यार ने एक बार फिर अपनी ताकत को साबित कर दिया।



 





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