
प्रेम में डूबे राहुल ने सीमा की आंखों में आंखें डालकर उसे अपने दिल के रॉकेट पर बिठाकर चांद के पार ले जाने का वादा किया था, लेकिन एक दिन… राहुल ने अपने वादे के साथ-साथ सीमा का दिल भी तोड़ दिया ! ..क्यों ?…कैसे?.. और किसके लिए? जानने के लिए पढ़ें, प्यार और भावनाओं से लबरेज कहानी, ‘ चांद के पार चलो’
भाग 1
एक चमकती हुई सुनहरी शाम थी। सीमा पार्क की हरी-भरी घास पर खड़ी थी, उसकी नज़रें गहराई में फैले चांद की चमकीली रोशनी आसमान पर थीं। हर बार की तरह, उसका इंतज़ार उस शख्स के लिए था, जिसने उसके दिल में एक खास जगह बना ली थी। राहुल था वह। राहुल, उसका साथी, जल्दी ही आ गया। उसकी आँखें चमक रही थीं, और उसके हाथ में उसकी पसंदीदा कॉफी थी।
“क्या तुम हमेशा ऐसे ही लेट आते हो?” सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी आवाज़ में शिकायत कम और स्नेह ज्यादा था।
राहुल हंसते हुए बोला, “जानेमन, देर नहीं करता। तुम्हारे इंतज़ार में समय का पता ही नहीं चलता।”
दोनों पास-पास बेंच पर बैठ गए। उनकी बातें पूरे माहौल को हल्की सी गर्मजोशी से भर देती थीं।
“तुम्हें पता है, राहुल,” सीमा ने कहा, “मुझे लगता है कि इस दुनिया में सबसे खूबसूरत चीज़ों में से एक किसी के साथ अपने दिल की बात साझा करना है।”
राहुल ने उसकी ओर देखा। “और मेरे लिए, सबसे खूबसूरत चीज़ों में से एक यह है कि मुझे तुम्हारे साथ वह पल बिताने का मौका मिलता है।”
उन्होंने एक-दूसरे से प्यार भरी नज़रें साझा कीं। दोनों जानते थे कि उनके दिल एक दूसरे के लिए बने थे।
राहुल ने सीमा का हाथ पकड़ते हुए कहा, “क्या तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी? मैं चाहता हूं कि हम हमेशा साथ रहें।”
सीमा मुस्कुराई, उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उसने हल्के से राहुल के हाथ को दबाते हुए कहा, “मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी। प्यार में हम ऐसे साथी हैं जो कोई बाधा नहीं रोक सकती।”
उस वक्त राहुल ने अपने दिल की गहराई से एक वादा किया। “सीमा, मैं हर पल तुम्हें खुश रखने की कोशिश करूंगा। तुम्हारे साथ हर मुश्किल का सामना करूंगा।”
सीमा ने भी उस पल में अपना वादा किया। “और मैं हमेशा तुम्हारे सपनों का साथ दूंगी। तुम्हारा हर संघर्ष मेरा संघर्ष होगा।”
दोनों ने खुद को उस खूबसूरत पल में खो दिया।
पार्क का वह छोटा कोना उनकी हँसी, वादों और प्यार भरी बातों से भर गया। समय उनके लिए थम गया था। उनके दिलों में इस वादे के साथ एक विश्वास था कि उनका प्यार हर मुश्किल पार कर जाएगा।
भाग 2
सीमा और राहुल ने गले लगकर वादा किया था कि वे एक-दूसरे के साथ हर हाल में खड़े रहेंगे। उनकी आँखों में विश्वास था और दिलों में एक अडिग प्यार। जब राहुल ने सीमा को पार्क में अलविदा कहा, उसे नहीं पता था कि उसका घर लौटना उसकी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देगा।
राहुल के घर पहुँचते ही उसकी माँ उसकी ओर दौड़ती हुई आईं।
“राहुल, तुम्हारे पिता की तबीयत बहुत खराब है। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा है,” उनकी आवाज़ काँप रही थी।
“क्या हुआ, माँ? वो तो सुबह ठीक थे,” राहुल ने चिंतित होकर पूछा।
माँ ने आंसुओं को पोछते हुए कहा, “डॉक्टर कह रहे हैं कि उनका दिल कमजोर हो रहा है। हमें उनकी देखभाल करनी होगी।”
राहुल का दिल बैठ गया। वह तुरंत अस्पताल भागा। उसके पिता बिस्तर पर लेटे हुए थे, उनकी आंखों में थकावट और दर्द झलक रहा था।
“पापा, आप ठीक हैं?” राहुल ने उनके पास बैठते हुए पूछा।
“बेटा, मैं ठीक हूँ। लेकिन तुम्हें अब ज़िंदगी की जिम्मेदारी उठानी होगी। घर का ख्याल रखना, और अपनी माँ का भी।” उनके शब्दों में भारीपन था।
राहुल ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया। उसने तय किया कि अब वह अपने परिवार के लिए और भी जिम्मेदार बनेगा।
दूसरी तरफ, सीमा भी राहुल की चिंता को महसूस कर रही थी। उसने उसे कई बार कॉल किया, लेकिन राहुल जवाब नहीं दे रहा था।
जब राहुल ने आखिरकार फोन उठाया, सीमा ने कहा, “राहुल, क्या हुआ? तुम इतने परेशान क्यों हो?”
राहुल ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “सीमा, मेरे पिता की तबीयत बहुत खराब है। मैं उनकी देखभाल में लगा हूँ। मुझे पता नहीं कि हमारे वादों का क्या होगा।”
सीमा ने उसे सांत्वना दी, “राहुल, प्यार सिर्फ खुशियों में साथ होने का नाम नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ, हर मुश्किल में। तुम जो भी फैसला लो, मैं तुम्हारे साथ खड़ी हूँ।”
राहुल को सीमा के शब्दों ने सुकून दिया।
अगले कुछ दिनों में, राहुल ने अपने पिता की देखभाल में दिन-रात एक कर दिए। सीमा भी उसका सहारा बनने के लिए राहुल के घर आई।
“सीमा, तुम्हें यहाँ आने की ज़रूरत नहीं थी,” राहुल ने कहा।
“यह सिर्फ तुम्हारी नहीं, हमारी ज़िम्मेदारी है। प्यार में हम एक-दूसरे की मुश्किलों का हिस्सा बनते हैं,” सीमा ने दृढ़ता से कहा।
भाग 3
शाम का समय था। सीमा बगीचे की उस जगह बैठी थी, जहाँ वह और राहुल अक्सर मिला करते थे। हवा में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन सीमा के दिल में बेचैनी थी। उसे लगा जैसे राहुल कुछ परेशान है।
कुछ ही देर में राहुल वहाँ आया। उसके चेहरे पर थकावट और चिंता साफ दिखाई दे रही थी। सीमा तुरंत खड़ी हुई।
“राहुल, तुम ठीक तो हो?” सीमा ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा।
राहुल ने उसके हाथों को पकड़ते हुए एक गहरी सांस ली और बोला, “सीमा, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।”
सीमा ने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा, “क्या हुआ, राहुल? तुम इतने परेशान क्यों हो?”
राहुल ने अपनी आवाज़ को नियंत्रित करते हुए कहा, “पापा की तबीयत…बहुत खराब है। डॉक्टर ने बताया है कि उन्हें गंभीर दिल की बीमारी है। उनका इलाज यहाँ मुमकिन नहीं है। हमें उन्हें विदेश ले जाना पड़ेगा।”
सीमा यह सुनकर चौंक गई। वह कुछ पल के लिए खामोश रही, फिर धीरे से बोली, “राहुल, यह तो सच में गंभीर बात है। लेकिन तुम परेशान मत हो। सब कुछ ठीक हो जाएगा।”
राहुल ने उदासी से मुस्कुराते हुए कहा, “सीमा, मुझे नहीं पता कि वहाँ कितना वक्त लगेगा। इलाज में हफ्ते, शायद महीने भी लग सकते हैं। इस दौरान मैं तुम्हारे साथ नहीं रह पाऊँगा।”
सीमा ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, “राहुल, प्यार सिर्फ साथ बिताए हुए लम्हों में नहीं होता। यह उन वादों और विश्वास में भी होता है, जो हम एक-दूसरे के लिए रखते हैं। मैं तुम्हारे साथ हूँ, चाहे तुम जहाँ भी हो।”
राहुल ने उसे और भी ज्यादा कसकर पकड़ते हुए कहा, “सीमा, मैं तुम्हें अकेला छोड़ने का ख्याल भी बर्दाश्त नहीं कर सकता। लेकिन पापा के लिए मुझे यह करना होगा।”
सीमा ने अपनी आवाज़ को मजबूत करते हुए कहा, “राहुल, यह वक्त तुम्हारे परिवार के लिए खड़े होने का है। मैं जानती हूँ कि तुम एक जिम्मेदार बेटे हो। मैं तुम्हारे फैसले में तुम्हारा साथ दूंगी।”
राहुल की आँखों में आँसू थे। उसने कहा, “तुम सच में मेरी सबसे बड़ी ताकत हो, सीमा। मुझे यकीन नहीं होता कि मैं इतना भाग्यशाली हूँ कि तुम मेरी ज़िंदगी में हो।”
सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, “और मैं भी यही सोचती हूँ, राहुल। अब हमें इस मुश्किल वक्त का सामना करना होगा। लेकिन याद रखना, ये दूरी हमारे प्यार को और मजबूत करेगी।”
राहुल ने अपनी यात्रा की तैयारियाँ शुरू कर दीं। सीमा हर कदम पर उसके साथ थी, उसका हौसला बढ़ा रही थी। जिस दिन राहुल को जाना था, सीमा उसे स्टेशन तक छोड़ने आई।
“राहुल, वादा करो कि तुम हर दिन मुझसे बात करोगे,” सीमा ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा।
राहुल ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “मैं तुमसे हर रोज़ बात करूंगा, चाहे कुछ भी हो। और जैसे ही सब कुछ ठीक हो जाएगा, मैं तुम्हारे पास लौट आऊंगा।”
सीमा ने उसके हाथों को थामते हुए कहा, “मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी। और हमेशा तुम्हारे साथ खड़ी रहूंगी।”
राहुल ने उसे गले लगाते हुए कहा, “तुम्हारे बिना यह सब करना मुश्किल होता। मैं तुमसे वादा करता हूँ, सीमा, कि हम जल्द ही फिर से एक साथ होंगे।”
भाग 4
एयरपोर्ट पर हलचल भरी हुई थी। लोगों की भीड़, ताजा हवा और विदाई की भावनाएं वहाँ का माहौल बना रही थीं। सीमा राहुल और उसके पिता को विदेश यात्रा के लिए विदा करने आई थी। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन आँखों में एक अनकहा दर्द था। यह विदाई आसान नहीं थी, लेकिन सीमा खुश थी कि राहुल अपनी जिम्मेदारी को निभाने जा रहा है।
राहुल ने सीमा की तरफ देखा। उसकी आँखों में वह गहराई थी, जिसे सीमा हमेशा पसंद करती थी। “सीमा, मुझे नहीं पता कि वहाँ कितना वक्त लगेगा, लेकिन मेरा दिल हर पल तुम्हारे पास रहेगा।”
सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल, यह वक्त मुश्किलों का है। लेकिन मैं जानती हूँ कि तुम्हारी ताकत तुम्हारे परिवार से प्यार है। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी।”
राहुल के पिता ने सीमा की ओर देखते हुए कहा, “बेटा, तुमने हमारे परिवार को बहुत सहारा दिया है। तुमसे राहुल को बहुत ताकत मिलती है।”
सीमा ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा, “पापा जी, आप चिंता मत कीजिए। सब कुछ ठीक हो जाएगा।”
एयरपोर्ट पर विदाई का वह पल आया। राहुल ने सीमा को गले लगाते हुए कहा, “सीमा, यह दूरी हमारे प्यार को कमजोर नहीं करेगी। तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी।”
सीमा ने मुस्कान के साथ कहा, “और मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ी रहूंगी। जल्दी वापस आना, राहुल।”
जैसे ही सीमा ने उन्हें विदा किया, उसकी आँखों में आंसू थे। लेकिन उसने खुद को संभाला। “यह तो सिर्फ एक छोटा सा फासला है,” उसने अपने आप से कहा।
सीमा घर वापस आई। वह राहुल को विदा करने के बाद संतुष्ट थी कि उसने सही फैसला किया। लेकिन उसे क्या पता था कि उसके घर पर एक नया मोड़ उसका इंतजार कर रहा है।
जैसे ही वह घर में दाखिल हुई, उसकी छोटी बहन खुशी ने दौड़कर उसे गले लगाया। “दीदी, दीदी! तुम्हें पता है, माँ-पापा ने तुम्हारे लिए एक रिश्ता तय किया है।”
सीमा हक्का-बक्का रह गई। उसने तुरंत पूछा, “क्या? कैसा रिश्ता? खुशी, तुम क्या कह रही हो?”
खुशी ने उत्साह से बताया, “दीदी, वो लड़का बहुत अच्छा है। उसका नाम विक्रम है। वह बड़े बिजनेस फैमिली से है और बहुत स्मार्ट है। माँ-पापा को लगता है कि तुम्हारा भविष्य उसके साथ बहुत अच्छा होगा।”
सीमा का दिल जैसे टूट गया। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। उसने खुद को संभालते हुए खुशी से पूछा, “क्या माँ-पापा ने मुझसे पूछे बिना यह तय कर लिया?”
खुशी ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “दीदी, माँ कह रही थीं कि तुम्हारा भला चाहती हैं। और उन्होंने सोचा कि तुम्हारे लिए यह सबसे अच्छा रहेगा।”
सीमा के दिल में एक तूफान था। उसने तुरंत माँ-पापा से बात करने का फैसला किया।
सीमा ने माँ-पापा से कहा, “माँ, पापा, मुझे आपसे बात करनी है।”
माँ ने उसे शांत करने की कोशिश की, “बेटा, हम सब तुम्हारे लिए अच्छा ही सोच रहे हैं। विक्रम बहुत अच्छा लड़का है। तुम्हारे भविष्य के लिए यह रिश्ता सही रहेगा।”
सीमा ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “माँ, मैं समझती हूँ कि आप मेरे लिए अच्छा चाहती हैं। लेकिन मेरे दिल में राहुल के लिए प्यार है। हमने एक-दूसरे से वादे किए हैं। मैं उससे अपना रिश्ता नहीं तोड़ सकती।”
पापा ने थोड़े सख्ती से कहा, “सीमा, राहुल अब यहाँ नहीं है। उसकी जिम्मेदारियाँ अलग हैं। हमें नहीं पता कि वह कब वापस आएगा। तुम्हारे लिए एक स्थिर भविष्य ज़रूरी है।”
सीमा की आँखों में आँसू थे। उसने कहा, “पापा, प्यार सिर्फ भविष्य की योजनाओं पर नहीं टिका होता। यह विश्वास और समर्पण पर आधारित होता है। मैं राहुल से प्यार करती हूँ, और मैं उसका इंतजार करूंगी।”
सीमा ने अपने दिल में ठान लिया कि वह राहुल के वादों को निभाएगी। उसने माँ-पापा से स्पष्ट कहा, “मैं आपकी भावनाओं की कद्र करती हूँ। लेकिन मैं उस रिश्ते को नहीं स्वीकार कर सकती, जो मेरे दिल के खिलाफ हो।”
माँ ने उसे गले लगाते हुए कहा, “बेटा, अगर यह तुम्हारा फैसला है, तो हम तुम्हारा साथ देंगे। लेकिन याद रखना, यह फैसला आसान नहीं होगा।”
सीमा ने मजबूती से कहा, “माँ, मैं मुश्किलों के लिए तैयार हूँ। मैं राहुल का इंतजार करूंगी।”
भाग 5
राहुल अपने पिता को लेकर विदेश के एक बड़े अस्पताल में पहुँचा। अस्पताल का माहौल गंभीर था। हर तरफ डॉक्टर, नर्स और मरीजों की हलचल थी। राहुल ने अपने पिता को व्हीलचेयर पर बैठाया और रिसेप्शन पर जाकर डॉक्टर से मिलने का समय तय किया।
रिसेप्शनिस्ट ने कहा, “डॉक्टर थोड़ी देर में आएंगे। आप वेटिंग एरिया में बैठ सकते हैं।”
राहुल ने अपने पिता को आराम से बैठाया और खुद वेटिंग एरिया में जाकर बैठ गया। उसके मन में कई सवाल थे—क्या इलाज सफल होगा? क्या वह अपने पिता को ठीक होते देख पाएगा?
वह इन्हीं विचारों में खोया हुआ था कि अचानक एक हलचल ने उसका ध्यान खींचा।
एक सुंदर लड़की, जिसकी आँखों में गहरी उदासी थी, तेजी से वेटिंग एरिया की ओर भागी। उसके कदमों में बेचैनी थी, और उसकी आँखों में आँसू थे। राहुल ने उसे देखा, लेकिन पहले तो समझ नहीं पाया कि वह क्या करने जा रही है।
लड़की शीशे की दीवार की ओर बढ़ी। उसकी चाल से साफ था कि वह कुछ गलत करने जा रही है। राहुल ने तुरंत स्थिति को भांप लिया।
“रुको!” राहुल ने जोर से आवाज़ लगाई।
लेकिन लड़की ने उसकी बात अनसुनी कर दी और दीवार की ओर दौड़ने लगी। राहुल ने बिना समय गँवाए तेजी से उसकी ओर भागा।
राहुल ने लड़की को दीवार से ठीक पहले पकड़ लिया। उसने उसे कसकर पकड़ते हुए कहा, “तुम क्या कर रही हो? यह क्या पागलपन है?”
लड़की ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन राहुल की पकड़ मजबूत थी। उसने रोते हुए कहा, “मुझे छोड़ दो! मेरा जीवन अब किसी काम का नहीं है।”
राहुल ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “तुम्हारा जीवन बहुत कीमती है। जो भी समस्या है, उसका हल निकाला जा सकता है। लेकिन यह रास्ता सही नहीं है।”
लड़की ने रोते हुए कहा, “तुम नहीं समझोगे। मैंने सब कुछ खो दिया है। मेरे पास जीने का कोई कारण नहीं बचा।”
राहुल ने उसे शांत करने की कोशिश की। “देखो, मैं नहीं जानता कि तुम्हारे साथ क्या हुआ है। लेकिन मैं जानता हूँ कि हर समस्या का हल होता है। चलो, बैठकर बात करते हैं।”
राहुल ने लड़की को वेटिंग एरिया में ले जाकर बैठाया। उसने पानी का गिलास दिया और कहा, “अब बताओ, क्या हुआ? मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ।”
लड़की ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “मेरा नाम आर्या है। मैं एक डॉक्टर थी। लेकिन कुछ महीने पहले, एक ऑपरेशन के दौरान मेरी गलती से एक मरीज की जान चली गई। उसके परिवार ने मुझ पर केस कर दिया। मेरी नौकरी चली गई, और मेरे अपने परिवार ने भी मुझसे मुँह मोड़ लिया। अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा।”
राहुल ने उसकी बात ध्यान से सुनी। उसने कहा, “आर्या, मैं समझ सकता हूँ कि तुम पर क्या बीत रही है। लेकिन एक गलती तुम्हारे पूरे जीवन को परिभाषित नहीं कर सकती। तुमने जो किया, वह जानबूझकर नहीं था।”
आर्या ने आँसू पोंछते हुए कहा, “लेकिन लोग मुझे माफ नहीं करेंगे। मैं खुद को माफ नहीं कर सकती।”
राहुल ने उसकी ओर देखते हुए कहा, “माफी माँगना और खुद को माफ करना ही पहला कदम है। तुमने जो किया, वह गलती थी, लेकिन तुम इसे सुधार सकती हो।”
राहुल और आर्या की बातचीत ने आर्या को थोड़ा सुकून दिया। उसने महसूस किया कि शायद उसकी ज़िंदगी में अभी भी उम्मीद बाकी है।
राहुल ने कहा, “देखो, मैं यहाँ अपने पिता के इलाज के लिए आया हूँ। लेकिन अगर तुम चाहो, तो मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश कर सकता हूँ।”
आर्या ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “तुमने आज मेरी जान बचाई है। शायद भगवान ने तुम्हें मेरी ज़िंदगी में भेजा है।”
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “कभी-कभी अजनबी भी हमारे जीवन में फरिश्ता बनकर आते हैं।”
भाग 6
राहुल और आर्या वेटिंग एरिया में बैठे थे। एक पल के लिए दोनों खामोश थे। आर्या अपनी भावनाओं से लड़ने की कोशिश कर रही थी, और राहुल उसे समझाने में जुटा हुआ था।
“आर्या, मैंने जो भी कहा, वह सिर्फ तुम्हें हिम्मत देने के लिए था। तुम एक मजबूत इंसान हो। तुम्हारे अंदर वह काबिलियत है जो तुम्हें इन मुश्किलों से जीत दिला सकती है।”
आर्या आँखों में आँसू भरकर बोली,”तुम नहीं जानते, राहुल। मैंने अपने पिता को भी दुखी कर दिया है। उनके सपनों को तोड़ दिया। मेरे जीने का कोई कारण नहीं बचा।”
राहुल: “हर किसी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सब कुछ गलत लगता है। लेकिन यही वह समय होता है जब हमें खुद को साबित करना होता है। अगर तुम इतनी बड़ी डॉक्टर बनी हो, तो यह तुम्हारी मेहनत और काबिलियत का ही नतीजा है।”
आर्या ने राहुल की बातों को ध्यान से सुना। शायद उसके शब्दों में एक सच्चाई थी जो उसे समझ आ रही थी।
तभी वेटिंग एरिया में एक गहरी आवाज़ के साथ किसी ने कहा, “आर्या?”
राहुल और आर्या दोनों ने मुड़कर देखा। एक मध्यम आयु का व्यक्ति, सफेद कोट और गले में स्टेथोस्कोप डाले हुए, उनकी ओर बढ़ रहा था। राहुल तुरंत समझ गया कि यही डॉक्टर त्रेहन है जिससे वह मिलने आया था।
डॉक्टर ने आर्या को देखकर राहत की सांस ली और कहा, “आर्या, तुम यहाँ हो! मैंने तुम्हें हर जगह ढूंढा। क्या तुम्हें पता है, मैं कितना चिंतित था?”
आर्या: “पापा… मैं… मुझे माफ कर दीजिए।”
डॉक्टर गहरी सांस लेते हुऐ बोला: “तुम्हें माफी माँगने की ज़रूरत नहीं है, बेटा। मैं तुम्हारा पिता हूँ। मुझे पता है कि तुम पर क्या बीत रही है। लेकिन इस तरह का कदम उठाने का विचार भी कैसे आया?”
राहुल ने कदम आगे बढ़ाते हुए कहा, “डॉक्टर साहब, मैं राहुल हूँ। मैंने आर्या को गलत कदम उठाने से रोक लिया। मुझे लगा कि उसे मदद की ज़रूरत है।”
डॉक्टर ने राहुल की ओर मुड़कर देखा। उनकी आँखों में गहरी कृतज्ञता थी।
डॉक्टर: “राहुल, तुमने मेरी बेटी की जान बचाकर मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है। मैं इसे कभी नहीं भूल सकता।”
राहुल ने विनम्रता से कहा, “यह मेरी ज़िम्मेदारी थी। मैंने वही किया जो सही था।”
डॉक्टर त्रेहन ने राहुल को बैठने का इशारा किया और कहा, “राहुल, मैं तुम्हारा परिचय जानना चाहूंगा। क्या तुम यहाँ किसी मरीज के लिए आए हो?”
राहुल: “हाँ, डॉक्टर साहब। मैं अपने पिता को लेकर आया हूँ। उन्हें दिल की गंभीर बीमारी है। मैंने सुना था कि आप इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, इसलिए मैं मदद मांगने के लिए यहाँ आया।”
डॉक्टर त्रेहन ने गंभीरता से सुना और कहा, “तुम्हारे पिता कहाँ हैं? मैं तुरंत उनकी जाँच करूंगा।”
राहुल ने वेटिंग एरिया में इशारा किया, जहाँ उसके पिता बैठे थे। डॉक्टर ने सिर हिलाते हुए कहा, “चलो, पहले उनकी जाँच करते हैं।”
इस बीच, राहुल की बातें और उसका साहस आर्या के दिल को छू गया। उसने महसूस किया कि जिंदगी कितनी अनमोल है और हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है। उसने खुद से वादा किया कि वह अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश करेगी।
आर्या ने राहुल से कहा, “तुमने मेरी जिंदगी को एक नई दिशा दी है। मैं हमेशा आभारी रहूँगी।”
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर मेरी बातें तुम्हें हिम्मत दे सकीं, तो यह मेरी जीत है।”
डॉक्टर ने राहुल के पिता की जाँच की और उन्हें भर्ती करने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “तुम्हारे पिता को तुरंत इलाज की ज़रूरत है। मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगा कि वह जल्दी ठीक हो जाएं।”
राहुल ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, “डॉक्टर साहब, आपकी मदद के लिए मैं आपका आभारी हूँ।”
डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने मेरी बेटी को बचाकर मुझे एक पिता का कर्ज़दार बना दिया है। यह मेरा कर्तव्य है कि मैं तुम्हारे पिता की मदद करूं।”
आर्या ने अपने पिता से वादा किया कि वह खुद को संभालेगी और अपनी जिंदगी को फिर से सही दिशा में लेकर जाएगी। उसने राहुल से वादा किया कि वह अपने अनुभवों से और भी मजबूत बनेगी।
डॉक्टर ने राहुल से कहा, “तुम्हारी और मेरी इस मुलाकात ने मुझे यह सिखाया है कि हम चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हों, हमें अपने परिवार के लिए समय निकालना चाहिए।”
राहुल ने कहा, “डॉक्टर साहब, मैं भी अपने परिवार की कद्र अब और ज्यादा समझता हूँ।”
इतना कह कर राहुल अपने पापा को लेकर अस्पताल से बाहर की तरफ चल दिया उसे इस बात की खुशी थी कि अब डॉक्टर त्रेहन की वजह से उसके पापा को अच्छा इलाज मिल जाएगा लेकिन अस्पताल से बाहर जाते राहुल को क्या मालूम था कि उसके मिलने से कोई और भी किसी और को भी बहुत खुशी मिली थी और वह थी डॉक्टर त्रेहन की वह बेटी आर्या जो राहुल को अस्पताल से बाहर जाते हुए ठीक वैसे ही देख रही थी जैसे कोई तालाब में खिले हुए अपने मनपसंद कमल के फूल को जी भर के देखता है।
भाग 7
आर्य सुबह जल्दी उठ गई थी। उसके चेहरे पर एक अलग सी चमक थी जो उसकी आँखों से झलक रही थी। उसकी हर हलचल में उत्साह था, और उसके दिल में एक अजीब सी खुशी। वह हमेशा की तरह अपने पिता, डॉक्टर त्रेहन के लिए नाश्ता बनाने गई। लेकिन आज उसकी मुस्कान देखकर डॉक्टर त्रेहन भी हैरान थे।
डॉक्टर त्रेहन ने अपने अखबार को एक तरफ रखते हुए कहा, “आर्या, तुम कुछ अलग लग रही हो। आज तुम्हारे चेहरे पर वह उदासी नहीं है जो पिछले दिनों से दिख रही थी। कुछ अच्छा हुआ है क्या?”
आर्या ने एक गहरी सांस ली और मुस्कुराई। “पापा, हाँ, बहुत कुछ अच्छा हो रहा है। मैं बहुत दिनों बाद कुछ महसूस कर रही हूँ जो मुझे खुशी दे रहा है।”
डॉक्टर त्रेहन ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “क्या बात है, बेटा? मुझे बताओ। मुझे अच्छा लगेगा अगर तुम्हारे जीवन में कुछ अच्छा हो रहा है।”
आर्या ने थोड़ी झिझकते हुए कहा, “पापा, यह एक शख्स से जुड़ा हुआ है।”
डॉक्टर त्रेहन ने आश्चर्य से कहा, “एक शख्स? कौन है वह? और ऐसा क्या हुआ जिससे तुम इतनी खुश हो?”
आर्या ने थोड़ी देर चुप रहकर खुद को संभाला। फिर उसने कहा, “पापा, वह राहुल है। वही शख्स जिसने मुझे उस दिन अस्पताल में बचाया था। उसने मुझे एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करने का साहस दिया। मुझे नहीं पता कि यह क्या है, लेकिन मैं उसकी बातों से प्रभावित हूँ। उसकी सादगी, उसका साहस और उसकी इंसानियत ने मेरे दिल को छू लिया।”
डॉक्टर त्रेहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल? तो वह वही लड़का है जिसने मेरी बेटी को कूदने से रोका था। यह तो कमाल है।”
आर्या: “हाँ, पापा। मुझे ऐसा लगता है जैसे वह मेरी जिंदगी में एक फरिश्ता बनकर आया है। उसके शब्दों ने मेरी सोच बदल दी। अब मुझे महसूस होता है कि जिंदगी की हर समस्या का समाधान है, और हमें सिर्फ उम्मीद के साथ आगे बढ़ना चाहिए।”
डॉक्टर त्रेहन ने आर्या की बातें सुनकर राहत की सांस ली। उन्हें हमेशा चिंता थी कि आर्या अपने पुराने दुखों से बाहर नहीं आ पाएगी। लेकिन आज उसकी खुशी देखकर वह बहुत खुश थे।
डॉक्टर त्रेहन ने कहा, “बेटा, यह तो बहुत अच्छी बात है। मुझे खुशी है कि तुम्हें कोई ऐसा इंसान मिला जो तुम्हारे दिल को समझता है और तुम्हें नई ऊर्जा देता है।”
आर्या: “पापा, मैं पहले बहुत डरती थी। मुझे लगता था कि मैं कभी किसी पर भरोसा नहीं कर पाऊंगी। लेकिन राहुल ने मुझे विश्वास करना सिखाया।”
डॉक्टर त्रेहन ने गंभीरता से कहा, “आर्या, प्यार और लगाव कभी-कभी हमारी सोच से भी ज्यादा ताकतवर होते हैं। और मैं हमेशा चाहता था कि तुम्हें कोई ऐसा इंसान मिले जो तुम्हें खुश रखे।”
आर्या अब हर दिन राहुल के बारे में सोचती थी। वह उसकी बातों को याद करती थी और महसूस करती थी कि उसकी ज़िंदगी में एक नया मोड़ आया है। उसने अपनी पुरानी गलती को भूलकर एक नई शुरुआत करने का फैसला किया।
डॉक्टर त्रेहन ने एक दिन आर्या से पूछा, “तो बेटा, क्या तुमने राहुल से फिर बात की?”
आर्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, पापा। वह अपने पिता के इलाज में व्यस्त है, लेकिन वह हर दिन मुझे संदेश भेजता है। उसकी बातें मुझे सुकून देती हैं।”
डॉक्टर त्रेहन ने हल्के से हंसते हुए कहा, “तो अब मेरी बेटी को भी लगाव हुआ है। मुझे बहुत खुशी है।”
डॉक्टर त्रेहन ने आर्या से राहुल के बारे में और जानने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “तो, आर्या, राहुल कैसा है? उसकी क्या बातें तुम्हें प्रभावित करती हैं?”
आर्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “पापा, वह बहुत साधारण है लेकिन उसमें एक खास बात है। वह हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश करता है। वह अपने परिवार को सबसे ऊपर रखता है। उसकी इंसानियत और उसकी मेहनत ने मुझे बहुत प्रभावित किया है।”
डॉक्टर त्रेहन ने सिर हिलाते हुए कहा, “तो वह एक अच्छा लड़का लगता है। मुझे खुशी है कि तुम्हें कोई ऐसा मिला जो तुम्हारे दिल को छू गया।”
आर्या ने अपने पिता से वादा किया कि वह राहुल के साथ अपनी भावनाओं को लेकर गंभीर रहेगी और अपने जीवन को एक नई दिशा देगी। डॉक्टर त्रेहन ने उसे प्रोत्साहित किया और कहा, “आर्या, मैं तुम्हारे हर फैसले में तुम्हारा साथ दूँगा। बस खुद को हमेशा मजबूत बनाए रखो।”
आर्या ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “पापा, मैं वादा करती हूँ कि मैं अपनी ज़िंदगी को एक नई शुरुआत दूंगी। और राहुल के साथ जो भी कदम उठाऊंगी, वह सोच-समझकर होगा।”
जीवन को एक नई दिशा देगी। डॉक्टर त्रेहन ने उसे प्रोत्साहित किया और कहा, “आर्या, मैं तुम्हारे हर फैसले में तुम्हारा साथ दूँगा। बस खुद को हमेशा मजबूत बनाए रखो।”
अपनी बेटी की बात सुनकर डॉक्टर त्रेहन के चेहरे पर शांति के ठीक वैसे ही भाव थे जैसे उस खिलाड़ी के चेहरे पर उस समय होते हैं जब वह एक बड़ी मैराथन दौड़ने के बाद फर्स्ट आता है। शांति के इन्हीं भाव के साथ डॉक्टर त्रेहन ने राहुल से आर्या के बारे में बात करने का मन बना लिया था।
भाग 8
राहुल ने अपने पिता के इलाज के दौरान विदेश में एक किराए का घर ले लिया था।
जैसे ही वह अपने पिता को घर लेकर पहुँचा, उन्होंने उन्हें आरामदायक बिस्तर पर लिटा दिया। राहुल ने पानी का गिलास लाकर उनके सिरहाने रखा और कहा, “पापा, अब आप आराम कर सकते हैं। मैं पास ही हूँ। अगर कुछ ज़रूरत हो तो बस आवाज़ दें।”
पिता ने मुस्कुरा कर धीरे से सिर हिलाया, लेकिन राहुल उनकी आँखों में थकावट और कमजोरी देख सकता था। वह उन्हें आराम करने के लिए छोड़कर किचन में खाने का कुछ प्रबंध करने चला गया।
कुछ ही मिनटों के बाद, राहुल ने अपने पिता के कमरे से अजीब सी आवाजें सुनीं। वह भागकर कमरे में पहुँचा, तो देखा कि उसके पिता का चेहरा पीला पड़ गया था। वह अपनी छाती पकड़कर दर्द से कराह रहे थे।
राहुल घबरा गया। “पापा! क्या हुआ? बोलिए पापा!”
पिता ने मुश्किल से कहा, “राहुल…मेरी…छाती…दर्द हो रहा है।”
राहुल ने तुरंत उनके हाथ थामे और कहा, “पापा, घबराइए मत। मैं यहाँ हूँ। मैं कुछ करता हूँ।”
राहुल ने उन्हें बिस्तर पर लेटाने की कोशिश की और उनकी हालत को देखकर समझ गया कि यह हार्ट अटैक हो सकता है। अचानक उसे डॉक्टर त्रेहन का दिया हुआ कार्ड याद आया। उसने अपनी जेब टटोली और वह कार्ड निकालते ही तुरंत फोन मिलाया।
फोन की घंटी बजते ही डॉक्टर त्रेहन ने जवाब दिया, “हैलो, राहुल अच्छा हुआ तुमने मुझे फोन कर लिया मैं तुमसे तुम्हें फोन करने ही वाला था”
डॉक्टर त्रेहन की बात पूरी हो पाती उससे पहले ही राहुल घबराए हुए स्वर में बोल उठा! “डॉक्टर त्रेहन, मेरे पापा की तबीयत अचानक खराब हो गई है। उन्हें बहुत तेज़ छाती में दर्द हो रहा है। मुझे लगता है कि यह हार्ट अटैक हो सकता है।
भाग 9
राहुल अपने पिता को हॉस्पिटल लाने के बाद तेजी से डॉक्टर त्रेहन के ऑफिस की ओर भागा। उसके मन में बेचैनी थी और आँखों में केवल अपने पिता की सलामती की चिंता। उसने ऑफिस का दरवाजा खटखटाया, और जैसे ही डॉक्टर त्रेहन ने उसे अंदर बुलाया, वह तुरंत उनके सामने झुककर रोने लगा।
राहुल (गहरे दर्द में): “डॉक्टर साहब, मेरे पापा की हालत बहुत खराब है। मैंने उन्हें यहाँ लाया है क्योंकि मुझे आप पर भरोसा है। आप ही उनकी जान बचा सकते हैं। मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूँ, कृपया उन्हें बचा लीजिए।”
डॉक्टर त्रेहन ने एक पल के लिए राहुल की गंभीर स्थिति को समझा। वह जानते थे कि राहुल की भावनाएँ सच्ची थीं और उसके पिता की हालत नाजुक थी। उन्होंने शांत रहते हुए कहा, “राहुल, मुझे पता है कि तुम्हारे पापा की हालत खराब है। मैं उनकी मदद जरूर करूंगा, लेकिन मुझे तुमसे कुछ चाहिए।”
राहुल (हैरानी और डर से): “डॉक्टर साहब, आप कहिए। मैं आपके लिए कुछ भी करूंगा। बस मेरे पापा को बचा लीजिए। उनका इलाज कर दीजिए।”
डॉक्टर त्रेहन ने राहुल की आँखों में देखा और गंभीरता से कहा, “मैं जानता हूँ कि तुम्हारी मदद करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन एक डॉक्टर के रूप में नहीं, एक पिता के रूप में मैं तुमसे एक वादा चाहता हूँ।”
राहुल ने आशंका से भर कर पूछा “क…कैसा वादा, डॉक्टर साहब?”
डॉक्टर त्रेहन ने गहरी सांस ली और कहा, “मुझे तुम्हारी ज़िंदगी में मेरी बेटी आर्या के लिए एक जगह चाहिए।”
राहुल को यह सुनकर झटका लगा। उसने डॉक्टर त्रेहन की ओर देखा, जैसे वह सोच रहा हो कि क्या उसने सही सुना। उसने थोड़ा पीछे हटते हुए कहा, “डॉक्टर साहब, मैं समझा नहीं। आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?”
डॉक्टर त्रेहन ने गंभीर स्वर में जवाब दिया, “राहुल, मैंने देखा है कि मेरी बेटी तुम्हारे लिए क्या महसूस करती है। और तुम्हारे जैसा लड़का उसकी ज़िंदगी में उसके लिए सही होगा। मैंने आर्या को बहुत दर्द में देखा है। अगर तुम मेरी बेटी के लिए खुशी बन सकते हो, तो यह एक पिता का सौभाग्य होगा।”
राहुल अब पूरी तरह से असमंजस में था। उसने कहा, “डॉक्टर साहब, मुझे आर्या से बेहद इज़्ज़त है। लेकिन मैं इस वक्त केवल अपने पिता की सलामती चाहता हूँ। मैं अभी कोई फैसला नहीं ले सकता।”
डॉक्टर त्रेहन ने शांत स्वर में कहा, “मैं तुम्हें मजबूर नहीं कर रहा, राहुल। लेकिन यह एक मौका है, जिससे हम दोनों एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।”
राहुल के दिमाग में कई विचार चल रहे थे। उसने खुद को शांत करते हुए कहा, “डॉक्टर साहब, मैं आपकी बात समझता हूँ। लेकिन मेरी प्राथमिकता अभी मेरे पापा की जिंदगी है। कृपया उनका इलाज कीजिए।”
डॉक्टर त्रेहन ने उसे आश्वस्त किया, “राहुल, मैं तुम्हारे पापा को बचाने के लिए पूरी कोशिश करूंगा। लेकिन यह बात याद रखना कि मैं एक पिता भी हूँ, और मैं चाहता हूँ कि मेरी बेटी को खुशी मिले।”
डॉक्टर त्रेहन ने तुरंत इलाज शुरू किया। उनके अनुभव और विशेषज्ञता के चलते, उन्होंने राहुल के पिता की स्थिति को संभाल लिया। ऑपरेशन सफल हुआ, और राहुल के पिता अब खतरे से बाहर थे।
राहुल ने राहत की सांस ली और डॉक्टर त्रेहन के पास जाकर कहा, “डॉक्टर साहब, आपने मेरे पापा की जान बचाई है। मैं आपका जीवनभर आभारी रहूँगा।”
डॉक्टर त्रेहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल, यह मेरा कर्तव्य था। लेकिन अब मैं तुमसे एक वादा चाहता हूँ। आर्या के साथ अपने रिश्ते पर सोचो। अगर तुम्हें लगता है कि तुम उसके साथ खुश रह सकते हो, तो उसे एक मौका दो।”
राहुल ने डॉक्टर त्रेहन को देखा। वह जानता था कि डॉक्टर ने जो किया, वह उनकी महानता थी। उसने कहा, “डॉक्टर साहब, मैं इस बारे में जरूर सोचूँगा। लेकिन मैं वादा करता हूँ कि मैं आर्या के साथ कभी भी गलत नहीं करूँगा।”
डॉक्टर त्रेहन ने सिर हिलाते हुए कहा, “बस यही मेरी उम्मीद है, राहुल।”
भाग 10
‘ राहुल, ओ राहुल। जरा देखो तो आज के चांद को, एकदम पूरा चांद है। जरा सा भी कहीं से काम नहीं, बेहद खूबसूरत ,बेहद दिलकश” यह सीमा के कंठ से निकलने वाले प्यार भरे शब्द थे जो वह राहुल से कह रही थी।
इस समय राहुल सीमा के साथ एक खूबसूरत झील के किनारे खड़ा था । आसमान में पूरा चाँद अपनी चमक बिखेर रहा है। उसकी सफेद रोशनी पानी पर ऐसी लग रही थी मानो किसी ने चाँदी की चादर बिछा दी हो। राहुल के पास सीमा खड़ी थी, उसकी आँखें चाँद की तरफ टिकी हुई थीं और उसके चेहरे पर एक गहरी मुस्कान थी।
: “राहुल, तुमने वादा किया था कि आज पूर्णिमा के दिन तुम मुझे चाँद के पार ले जाओगे। क्या तुम्हें याद है?”
“हाँ, सीमा। मुझे याद है। मैंने तुमसे वादा किया था।”
राहुल ने असमंजस भरे स्वर में कहा तो सीमा उसकी ओर देखकर धीरे से बोली, “तो फिर तुम्हारा चेहरा इतना धुंधला क्यों लग रहा है? और यह चाँद…यह चाँद भी धुंधला क्यों होता जा रहा है? राहुल, क्या तुम अपने वादे को निभाओगे?”
राहुल बेताबी बोला “सीमा, मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। मैं अपना वादा जरूर निभाऊंगा।”
सीमा का चेहरा अचानक उदास हो जाता है। वह धीरे-धीरे पीछे हटने लगी है, और उसकी आवाज़ में दर्द झलकने लगा ।
“अगर तुम अपने वादे को निभाने में असमर्थ हो, तो मुझे मत रोकना। चाँद के पार जाने का सपना भी टूट जाएगा।”
राहुल उसकी तरफ दौड़ा है, लेकिन वह उसे रोक नहीं पाया। चाँद का प्रकाश अब पूरी तरह धुंधला हो चुका है, और राहुल अंधेरे में गुम होता चला गया।
राहुल अचानक हड़बड़ाकर जाग गया। उसके माथे पर पसीने की बूंदें थीं और दिल तेजी से धड़क रहा था। वह अपने बिस्तर पर बैठ गया, और उसके मन में सीमा के शब्द गूँजने लगे।
“सीमा…तुमने मुझसे ऐसा क्यों कहा? क्या मैं तुम्हें छोड़ रहा हूँ? नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। मैंने तुमसे वादा किया था कि मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।”
उसने अपने सिर पकड़ लिया। उसकी आँखों में बेचैनी थी। लेकिन इसी के साथ, उसे डॉक्टर त्रेहन का दिया हुआ वादा भी याद आया। उसने सोचा कि कैसे उसने डॉक्टर से कहा था कि वह आर्या को एक मौका देगा।
राहुल (सोचते हुए): “मैं क्या करूँ? सीमा के लिए मेरा प्यार सच्चा है, लेकिन डॉक्टर त्रेहन को भी मैंने वादा किया है। यह सब मेरे लिए इतना मुश्किल क्यों हो रहा है?”
राहुल ने कमरे में टहलना शुरू किया। वह गहरे विचारों में डूबा हुआ था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। सीमा के लिए उसका प्यार और डॉक्टर त्रेहन का वादा—दोनों उसके दिल और दिमाग पर भारी पड़ रहे थे।
राहुल अपने आप से कहने लगा “सीमा, तुम मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा हो। लेकिन डॉक्टर त्रेहन ने मेरे पिता की जान बचाई है। उनकी उम्मीद को तोड़ना भी गलत होगा। मैं दोनों तरफ से फँस गया हूँ।”
राहुल ने तय किया कि वह खुद को शांत करेगा और सही फैसला लेने की कोशिश करेगा। उसने सीमा से किया हुआ वादा और डॉक्टर त्रेहन से लिया गया संकल्प—दोनों को ध्यान में रखकर एक ऐसा रास्ता ढूंढने की कोशिश की जिससे किसी का दिल न टूटे।
यह रात राहुल के लिए बेहद कठिन थी। लेकिन उसने महसूस किया कि अपने दिल की सुनकर और सही फैसला लेकर वह अपने हर वादे को निभा सकता है।
भाग 11
सीमा आज बहुत खुश थी। उसके चेहरे पर एक अनमोल मुस्कान खिली हुई थी, जो उसकी खुशी को बयां कर रही थी। उसकी खुशी का कारण भी तो खास था—राहुल, उसका प्यार, आज विदेश से लौट रहा था। वह अपने पिता के इलाज के लिए विदेश गया था, और लंबे समय बाद उसकी प्रतीक्षा आज समाप्त होने वाली थी।
सीमा अपने कमरे में बैठी थी, खिड़की से आती चांदनी उसके चेहरे को छू रही थी। यह पूर्णिमा की रात थी, और इस दिन की अपनी एक खास यादें थीं। राहुल और वह, चाँद के साक्षी, हमेशा एक-दूसरे के साथ यह रात बिताने का वादा करते थे। जैसे ही सीमा खिड़की के बाहर पूरा चाँद देखा, उसकी आँखों के सामने एक पुरानी याद ताज़ा हो गई।
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वह रात भी पूर्णिमा की थी। झील के किनारे शांत वातावरण में चाँद की रोशनी झील के पानी में झिलमिला रही थी। राहुल और सीमा झील के किनारे बैठकर बातें कर रहे थे। ठंडी हवा उनके चेहरे को छू रही थी, और हर पल ऐसा लग रहा था मानो समय रुक सा गया हो।
राहुल ने चाँद की ओर इशारा करते हुए कहा “सीमा, देखो यह पूरा चाँद। कितना खूबसूरत है ना?”
सीमा- “हाँ, राहुल। यह चाँद सच में खूबसूरत है। लेकिन तुम्हें पता है, मुझे तो इससे भी खूबसूरत हमारी यह रात लग रही है।”
राहुल बड़े ही मनमोहक ढंग से मुस्कुराया और बोला- “और मैं सोच रहा हूँ, जब एक दिन मैं तुम्हें इस चाँद के पार ले जाऊँगा, तो यह और भी खास हो जाएगा।”
सीमा हैरानी भरी हँसी के साथ बोली “क्या? चाँद के पार? राहुल, तुम पागल हो गए हो क्या? चाँद पर तो रोकेट से जाया जाता है। क्या तुम मेरे लिए रोकेट बनाओगे?”
राहुल शरारती मुस्कान के साथबोला, “रोकेट क्यों बनाऊँ? मेरा दिल ही रोकेट है। मैं तुम्हें अपने दिल की सवारी पर बिठाकर चाँद के पार ले जाऊँगा।”
राहुल की यह बात सुनकर सीमा खिलखिला कर हंस पड़ी और बोली सीमा- “राहुल, तुम और तुम्हारी बातें। तुम मुझे हमेशा हँसाते रहते हो।”
राहुल सीमा की ओर देखकर, गंभीर स्वर में बोला “सीमा, मैं मजाक नहीं कर रहा। एक दिन मैं तुम्हें उन सपनों के पार ले जाऊँगा, जहाँ तुमने कभी जाने की कल्पना भी नहीं की। बस मुझ पर भरोसा रखो।”
सीमा उसकी आँखों में झांकते हुए खुद को खो बैठी। चाँद की रोशनी उनके चारों तरफ फैल गई थी, और वे दोनों उस पल के जादू में पूरी तरह डूब गए थे। समय जैसे थम सा गया !
सीमा को यह याद करते ही उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई। वह अपने कमरे से बाहर आई और अपनी अलमारी से अपनी पसंदीदा साड़ी निकाली। उसने खुद को शीशे में देखते हुए कहा, “आज का दिन खास है। राहुल को देखकर मेरे चेहरे पर वही मुस्कान लौट आएगी जो सिर्फ उसके लिए है।”
वह साड़ी पहनने लगी और अपने गहने सजाने लगी। हर चीज़ वह बहुत सावधानी से कर रही थी, क्योंकि वह चाहती थी कि जब राहुल उसे देखे, तो वह उसकी खूबसूरती में खो जाए।
वह मंत्रमुग्ध सी होकर अपने आप से बोली “आज का दिन सिर्फ हमारा है। मैं उसे बताऊँगी कि मैंने उसका हर वादा याद रखा है। और वह मुझे चाँद के पार ले जाने का अपना सपना जरूर पूरा करेगा।”
जैसे ही सीमा तैयार हुई, उसने अपनी माँ को बताया कि वह एयरपोर्ट जा रही है। माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, तुम्हारी खुशी देखकर हमें भी सुकून मिलता है। जाओ, राहुल को लेकर जल्दी वापस आओ।”
सीमा ने माँ को गले लगाते हुए कहा, “हाँ माँ, मैं जल्द ही राहुल के साथ लौटूँगी।”
सीमा ने एक आखिरी बार अपनी पसंदीदा चूड़ियों को ठीक किया और दर्पण में खुद को देखा। उसके चेहरे पर जो चमक थी, वह किसी भी गहने से ज्यादा अनमोल थी। उसने अपनी कार की चाबी उठाई और एयरपोर्ट के लिए निकल पड़ी।
भाग 12
सीमा की खुशी का ठिकाना नहीं था। वह एयरपोर्ट की ओर दौड़ी चली आ रही थी। उसके दिल में उत्साह की लहरें थीं। लंबे इंतजार के बाद आज वह दिन आया था, जब वह राहुल से मिलने वाली थी। उसने दिल से यह दिन गिना था। जब वह अराइवल क्षेत्र के दरवाजे के पास पहुंची, तो उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। वहां से निकलते यात्रियों के बीच, उसे राहुल नज़र आया।
राहुल के चेहरे पर थकावट थी, लेकिन जैसे ही सीमा ने उसे देखा, उसके चेहरे पर खुशियां उमड़ पड़ीं। लेकिन तभी, उसकी मुस्कान एक पल के लिए थम गई। राहुल के साथ एक लड़की थी—युवा, सुंदर और आत्मविश्वासी। राहुल उसके हाथ को थामे हुए था, जैसे कोई ख्याल रखने वाला साथी हो।
सीमा एक पल के लिए सोच में डूब गई *”यह कौन हो सकती है? लेकिन नहीं, यह मॉडर्न जमाना है। शायद वह उसकी कोई दोस्त हो। राहुल तो मेरा ही है, वह नहीं बदल सकता।”*
सीमा ने अपने विचारों को झटका देते हुए जल्दी से खुद को संभाला। वह राहुल की ओर तेजी से बढ़ी और उसका नाम पुकारते हुए उससे लिपटने के लिए झपटी।
लेकिन जब सीमा राहुल तक पहुँचने ही वाली थी, तभी वह लड़की, जिसका नाम आर्या था, अचानक बीच में आ गई। उसने सीमा को रोका।
“रुको, आप कौन हैं? और आप राहुल की तरफ इस तरह क्यों भाग रही हैं?” आर्य ने कड़क शब्दों में सीमा से पूछा तो सीमा लगभग चौंकते हुए बोली-
“मैं सीमा हूँ। मैं राहुल की मंगेतर हूँ। और तुम कौन हो जो मुझे उसे मिलने से रोक रही हो?”
“मंगेतर? लेकिन यह कैसे हो सकता है? राहुल मेरे पति हैं।” आर्या के स्वर में ढेर सारी हैरानी भरी हुई थी जबकि उसकी बात सुनकर
सीमा के चेहरे पर एक सन्नाटा सा छा गया। उसके कानों को जैसे आर्या के शब्दों पर यकीन नहीं हो रहा था। उसने राहुल की ओर देखा, जो असहज और हिचकिचाता हुआ खड़ा
सीमा गुस्से और दुःख की अधिकता से लगभग चीख ही पड़ी, “राहुल, यह क्या है? यह लड़की कौन है? और यह तुम्हारे पति होने की बात क्यों कर रही है?”
राहुल जवाब देने की कोशिश करते हुए बोला, “सीमा, प्लीज़… मैं इसे समझा सकता हूँ। चीजें उतनी सरल नहीं हैं जितनी दिख रही हैं।”
आर्य ने बीच में बात काटते हुए कहा: “समझाने की क्या जरूरत है, राहुल? सच्चाई तो यही है कि तुम मेरे पति हो।”
सीमा ने अपनी आँखों में आँसू भरते हुए कहा, “राहुल, यह सब क्या है? तुमने मुझसे झूठ बोला? तुमने मुझसे वादे किए थे, और अब यह सब?”
राहुल न गहरी सांस लेते हुए समझने की कोशिश की,”सीमा, यह सच है कि मैंने तुमसे वादा किया था। लेकिन जब मेरे पापा की जान बचाने का वक्त आया, तो मुझे एक फैसला लेना पड़ा। डॉक्टर त्रेहन ने मुझे आर्या से शादी करने के लिए कहा। मैंने इसे एक ज़िम्मेदारी के तौर पर स्वीकार किया, क्योंकि उन्होंने मेरे पापा की जिंदगी बचाई।”
स “तो यह सब तुम्हारे लिए एक सौदा था? तुमने हमारी मोहब्बत को इतना छोटा समझा?” सीमा का स्वर गुस्से और दर्द से भर चुका था जबकि राहुल पश्चाताप भरे स्वर में बोल रहा था-
“सीमा, मुझे माफ कर दो। मैंने जो किया, वह मजबूरी में किया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैंने तुम्हारे प्यार को छोटा समझा।”
सीमा के दिल पर यह सुनकर गहरी चोट लगी। उसने राहुल की आँखों में देखा, लेकिन वहाँ उसे अब केवल पछतावा दिखा। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
“राहुल, तुमने मेरे विश्वास को तोड़ दिया। मैं तुम्हारा इंतजार करती रही, हर दिन। और तुम… तुमने सब खत्म कर दिया।” कहते हुए सीमा फफक के रो पड़ी।
आर्या भी अब स्थिति को पूरी तरह से समझ चुकी थी इसलिए वह धीरे से बोली, “सीमा, मुझे पता है कि आप कैसा महसूस कर रही हैं। लेकिन राहुल ने जो किया, वह परिस्थितियों की वजह से था। मैं चाहती हूँ कि आप सच्चाई को स्वीकार करें।”
सीमा ने एक पल के लिए कुछ नहीं कहा। फिर उसने गहरी सांस ली और कहा, “सचाई को स्वीकार करना इतना आसान नहीं होता। लेकिन अब मैं समझ गई हूँ कि जो मेरा नहीं हो सकता, उसे पकड़कर रखने का कोई फायदा नहीं।”
कहते हुए सीमा ने अपने आँसू पोछे, राहुल और आर्या को एक आखिरी बार देखा और फिर धीरे-धीरे वहां से चली गई। राहुल ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह जानता था कि अब बहुत देर हो चुकी थी।
भाग 13
एयरपोर्ट की हलचल, लोगों की आवाज़ों और गाड़ियों की चहल-पहल के बीच, सीमा धीमे कदमों से बाहर निकल रही थी। उसकी आँखें लगातार ज़मीन पर थीं, जैसे वह किसी गहरी सोच में डूबी हुई हो। जब उसके कदम रुक गए, तो उसकी नजर आसमान पर जा टिकी।
चाँद अपने पूरे स्वरूप में चमक रहा था। पूर्णिमा का चाँद हमेशा उसके लिए खास रहा था। वह ठिठकी, जैसे चाँद ने उसे उसके पुराने दिनों में खींच लिया हो। यह वही चाँद था, जिसे देखकर राहुल ने उससे वादा किया था—उसे चाँद के पार ले जाने का वादा।
सीमा ने अपनी आँखों को बंद किया, और उसकी यादों में वह दिन सामने आ गया जब राहुल ने उससे यह वादा किया था। झील के किनारे, चाँद की रौशनी के नीचे, दोनों साथ बैठे थे।
राहुल चांद की ओर इशारा करते हुए बोला “सीमा, देखो यह चाँद। कितना शांत और सुंदर है। लेकिन एक दिन मैं तुम्हें इस चाँद के पार ले जाऊँगा।”
सीमा ने हंसते हुए कहा “अरे राहुल, तुम यह चाँद की बातें मत किया करो। चाँद के पार सिर्फ वैज्ञानिक ही जा सकते हैं। क्या तुम मेरे लिए रोकेट बनाओगे?”
राहुल शरारत भरे अंदाज में बोला “रोकेट क्यों? मैं अपने दिल को रोकेट बना दूँगा। बस तुम उसमें बैठो, और हम दोनों चाँद के पार पहुँच जाएँगे।”
सीमा खिलखिलाकर हंस पड़ी “राहुल, तुम और तुम्हारी बातें। सच में, तुम कभी-कभी इतने प्यारे लगते हो कि दिल करता है कि तुम्हारे साथ हर सपना सच कर दूँ।”
यादों का वह झरोखा अचानक खत्म हुआ। सीमा ने अपनी आँखें खोलीं और चाँद को ताकते हुए एक लंबी सांस ली। उसके चेहरे पर एक खामोश दर्द झलक रहा था। वह समझने की कोशिश कर रही थी कि कैसे राहुल ने वादे किए और फिर उन वादों को निभाए बिना उसे छोड़ दिया।
सीमा ने चाँद को देखकर बुदबुदाया, “तुमने कहा था, राहुल, कि तुम मुझे चाँद के पार ले जाओगे। पर अब मैं यहाँ अकेली खड़ी हूँ। और तुमने अपनी दुनिया किसी और के साथ बना ली।”
वह कुछ देर तक चुप रही, उसकी आँखें चाँद पर गड़ी थीं। पर अचानक, जैसे उसकी भावनाएँ फूट पड़ीं। वह ज़ोर से हँसने लगी।
अब सीमा हंसते हुए मानो खुद से कह रही थी “चाँद के पार चलो! चलो, चाँद के पार चलो। राहुल, तुमने वादा किया था। मैंने तो तुम्हारी बात पर यकीन कर लिया था। और देखो, मैं आज भी यहाँ खड़ी हूँ, वही सपना लिए।”
वह हँसती जा रही थी, जैसे उसके अंदर का दर्द उसकी हँसी में घुल रहा हो। हर ठहाके के साथ उसकी आवाज़ और बढ़ रही थी।
सीमा ने अपनी बाहें फैलाई और आसमान में मौजूद चांद को देखकर ठहाके लगाने लगी चांद के पार चलो! मुझे चांद के पार जाना है राहुल, मैं अकेले भी जा सकती हूँ। तुम्हें मेरी जरूरत नहीं। लेकिन मैं चांद के पार जाउंगी अकेली जाऊंगी हा हा हा!”
सीमा अब पहले से भी ज्यादा तेज ठहाके लगाकर हंस रही थी और उसका यह हंसना तब तक जारी रहा जब तक वह बेहोश होकर ना गिर गई!