
दुनिया झुकेगी इंसानियत गिड़गिड़ाएगी, पुण्य का अंत होगा और शैतानियत का होगा नंगा नाच क्योंकि… राज करेगा शैतान
भाग 1
‘ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग..’
लगातार तीसरी बार डोर बेल बजी थी। डोर बेल की आवाज से मोनिका की आँखें आखिर खुल गई। उसने कसमसाकर करवट बदली और दूसरी साइड मुँह करके तकिए से मुँह ढककर सो गई। लेकिन तभी एक बार फिर से डोर बेल बज उठी।
“कौन है जो सोने ही नहीं दे रहा है?” बड़बड़ाते हुए मोनिका अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गई। उसने सामने दीवार घड़ी पर नजर डाली। रात के एक बज रहे थे।
“रात की एक बजे कौन आया होगा?” अभी वह सोच ही रही थी कि तभी बाहर से किसी पिल्ले के रोने की आवाज सुनाई दी।
“पता नहीं क्या माजरा है, बाहर जाकर देखना होगा!”
मोनिका बिस्तर से उठी और अपने घर के बाहरी दरवाजे के पास आ पहुँची। उसने जल्दी से झाँककर बाहर देखा। बाहर कोई दिखाई नहीं दिया, सिवाय एक छोटे से पिल्ले के। पिल्ला लगातार कूँ कूँ कर रहा था।
“बड़ी ठंड है! इतनी ठंड में इस पिल्ले को यहाँ किसने छोड़ दिया, बेचारा ठंड से तड़पकर मर जाएगा। लेकिन डोर बेल किसने बजाई थी?” सोचते हुए उसने दरवाजा खोलकर बाहर झांककर देखा लेकिन सिवाय उस रोते हुए पिल्ले के वहां कोई और दिखाई नहीं दे रहा था। बहुत प्यारा पिल्ला था।
मोनिका धीमे कदमों से उसके पास आ पहुँची। पिल्ला अभी भी कूँ कूँ कर रहा था। साथ ही साथ उसकी आँखों में भयानक लाली दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे पिल्ले को अपने सामने अपनी मौत नज़र आ रही हो।
जैसे ही मोनिका की नजर उसकी आँखों पर गई वह भी सहम गई। उसने वापस आसपास नजरें दौड़ाई लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। मोनिका अब उससे सिर्फ चार कदमों की दूरी पर थी।
ठीक उसी समय कूँ कूँ की आवाज भयानक गुर्राहट में बदल गई। वह छोटा सा पिल्ला अब खतरनाक तरीके से गुर्रा रहा था। मोनिका की तो हालात ही खराब हो गई। उसने मारे डर के अपने कदम पीछे खींच लिए और अपनी नजर पिल्ले पर गड़ा दी। लेकिन अब वहाँ पर कोई पिल्ला मौजूद नहीं था। वहाँ पर इस समय जो कुछ भी था उसे देखकर मोनिका के होश उड़ चुके थे।
“गुर्रर घुर्र”
भयानक आवाज से आसपास का माहौल काँप उठा। मोनिका के सामने एक बहुत ही खतरनाक शैतान खड़ा था। मुँह में लंबे-लंबे दाँत, हाथ के पंजों में चाकू जैसे नाखून और पूरे जिस्म से आई भयानक बदबू मोनिका का दम घोंटने लगी।
वह वापस मुड़कर अपने घर के अंदर भाग जाना चाहती थी। लेकिन तभी एक भयानक लात उसकी छाती पर पड़ी और वह उछलती हुई अपने घर के अंदर जा गिरी। पलक झपकते ही वह शैतान भी ठीक उसके सामने खड़ा था।
“भड़ाक” की आवाज के साथ दरवाजा भी बंद हो चुका था।
“क्या हुआ? क्या गिरा मोनिका? क्या कर रही हो तुम?” मोनिका की मम्मी की आवाज आई और साथ ही साथ कुछ ही पलों में वह भी वहाँ मौजूद थी। सामने जो कुछ भी था उसे देखकर जैसे वह पत्थर की मूर्ति बनकर खड़ी रह गई। उनके गले से आवाज तक नहीं निकल रही थी। इधर मोनिका फर्श पर पड़ी पड़ी चीखती जा रही थी और वह शैतान भयानक तरीके से मोनिका की तरफ आगे बढ़ता जा रहा था।
“नहीं….नहीं! मेरी बेटी को कुछ मत करना। कुछ मत करना मेरी बेटी को। दूर हो जाओ यहाँ से!” चिल्लाती हुई अचानक मोनिका की माँ मोनिका के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई।
अब तक मोनिका के पापा और उसका भाई भी वहाँ आ चुके थे। शैतान के चेहरे के भाव पहले से भी ज्यादा खतरनाक दिखाई देने लगे। उसके चेहरे की हैवानियत पल प्रतिपल बढ़ती जा रही थी। उसने एक झटके में अपना हाथ आगे बढ़ाया और मोनिका की माँ का गला पकड़ लिया।
“हुर्रर”
खतरनाक गुर्राहट के साथ शैतान ने अपना मुँह खोला। उसका मुह सामान्य इंसानों के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा था। एक ही झटके में शैतान ने मोनिका की माँ का सिर अपने मुँह में दबाया और दूसरे ही पल एक तेज झटका दिया जिससे मोनिका की माँ का सिर धड़ से अलग हो गया।
शैतान उनके सिर को चबा चबाकर खाने लगा।
“माँ…माँ..” चीखता हुआ मोनिका का भाई हाथ में हॉकी स्टिक लेकर शैतान के ऊपर झपट पड़ा। लेकिन इससे पहले कि वह शैतान को छू पाता। शैतान का हाथ घूमा और उसके भाई का सिर धड़ से अलग होता हुआ दिखाई दिया।
पूरे कमरे में खून का फव्वारा उड़ा, जो मोनिका और उसके पापा के चेहरे को रंगता हुआ दीवारों पर फैलता चला गया। शैतान ने मोनिका की माँ के शरीर को एक तरफ उछाल दिया और अब वह दोबारा मोनिका की तरफ बढ़ने लगा।
“रुक जा! शैतान रुक जा! वरना मैं गोली चल दूँगा।” मोनिका के पापा की काँपती हुई तेज आवाज कमरे में गूँज उठी। आवाज सुनकर शैतान और मोनिका एक साथ उनकी तरफ देखने लगे।
हाथों में पिस्टल थामे वे बुरी तरह काँप रहे थे। फिर भी हिम्मत करके वे किसी तरह शैतान के सामने खड़े थे। शैतान के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कुराहट खेलने लगी और फिर वह तुरंत मोनिका के पापा की तरफ घूम गया।
“पापा भाग जाओ यहाँ से! आप भाग जाओ! प्लीज पापा भाग जाओ!” मोनिका चिल्ला उठी लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे मोनिका के पापा शैतान के सामने पत्थर की मूर्ति बनकर खड़े हो चुके थे। शैतान लगातार उनकी तरफ बढ़ रहा था। तभी मोनिका के पापा के हाथों ने हरकत की और उन्होंने गोली चला दी।
“धाँय धाँय धाँय”
पिस्तौल से निकला हुआ शोला शैतान के जिस्म में समाता चला गया। लेकिन शैतान पर जैसे उसका रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़। वह उसी तेजी से लगातार मोनिका के पापा की तरफ बढ़ता चला जा रहा था। अचानक एक झटके में उसने मोनिका के पापा का वह हाथ पकड़ लिया जिस हाथ में पिस्टल थमी हुई थी और एक तेज झटका दिया।
तेज झटके से मोनिका के पापा का हाथ कटकर शैतान के हाथों में झूल गया। एक भयानक डकार मोनिका के पापा के मुँह से निकली। कमरे के फर्श पर खून की नदी बहने लगी और इसी के साथ मोनिका की दर्द से भरी हुई भयानक चीख उबल पड़ी।
हाँफती और काँपती हुई मोनिका अपने बिस्तर पर उठकर बैठ चुकी थी। उसका पूरा शरीर पसीने से लथपथ पड़ा हुआ था। साँस सुपरफास्ट ट्रेन की तरह दौड़ रही थी। उसने अपने आसपास देखा। सब कुछ सही सलामत दिखाई दिया।
क्रमशः
भाग 2
मोनिका के चेहरे पर आतंक के भाव थे। उसका सारा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। उसके मुंह से आश्चर्य से भरे हुए शब्द निकले, “ओफ्। एक बार फिर एक भयानक सपना। आखिर क्यों आ रहे हैं मुझे ऐसे सपने? कौन है यह शैतान जो सपने में आकर मुझे मारने की कोशिश करता है?”
मोनिका नाम की उस 17 वर्षीय लड़की के दिमाग की दीवारों से सैकड़ो सवाल ठोकरें मार रहे थे और अफसोस की बात यह थी कि उसके पास किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं था।
****
वहीं दूसरी तरफ उस भयानक जंगल में चारों तरफ कालिख की सी कालिमा पसरी हुई थी। उस कालिमा को चीरने का प्रयास करती हुई दो मशालें सामने के दो पेड़ों पर लटक रही थी। दोनों मशालों के ठीक बीच वाली जगह में एक भयानक सा नरकंकालों का सिंहासन सा बना दिखाई दे रहा था। और उस सिंहासन के दोनों तरफ नरमुंड सजे हुए थे। सिंहासन पर बैठा एक भयानक शक्ल वाला शख्स माहौल को और भी ज्यादा भयानक बना रहा था। उसका चेहरा मारे गुस्से के धधक रहा था और आंखें तो जैसे अंगार बनी हुई थीं।
तभी दो शैतान जैसे दिखने वाले शख्स वहाँ प्रकट हुए।
“दैत्यराज अंगोरा की जय हो, अंधेरे के राजा की जय हो।” एक शैतान ने जयकार की।
“तुम लोग आज तक जिसका पता लगाने में धरती आसमान एक किए हुए थे, मैं यहीं बैठे-बैठे ही उसका पता लगा लिया है, और अब मैं उस लड़की को, जो मेरा काल बनकर आई है, खत्म करके अमरता पा लूँगा, हा हा हा हा, अब मुझे कोई नहीं रोक पाएगा, कोई भी नहीं।” अंगोरा नाम के उस शैतान ने कहा और जोर जोर से हँसने लगा।
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ड्रीमलाइट डिस्को क्लब शहर का जाना माना क्लब था। जहां बड़े बड़े रईसजादे इंटरटेनमेंट के लिए आते थे। वो एक बहुमंजिला इमारत थी, जो बाहर से जितनी शांत दिखाई दे रही थी, उसके अंदर उतनी ही ज्यादा धूम मची हुई थी।
रंग बिरंगी लाइट से सजा वह क्लब पूरी तरह कपल्स से भरा हुआ था। सभी कपल्स एक दूसरे के गले में बाहें डाले झूम रहे थे। वेस्टर्न म्यूजिक उन्हें पागल बना रहा था।
सनी एक्साइटेड आवाज में बोला, “वाओ! कितना मजा आ रहा है, अब बस विक्की सर का इंतजार है, उनके आते ही महफिल का मजा दुगना हो जाएगा।”
“सचमुच यार, अगर तू मेरी लाइफ में नहीं आया होता तो मैं कब का विक्की सर को प्रपोज कर चुकी होती, उनका डांस देख कर मैं पूरी तरह से पागल जाती हूँ।” जूली ने कहा तो यह सुनते ही सनी मस्ती में झूमता झूमता अचानक से रुक गया। उसने जूली की तरफ घूर कर देखा तो वो खिलखिला कर हँसने लगी।
“अरे! इतना सीरियस मत हो, मैं तो बस मजाक कर रही थी, हा हा हा।” जूली ने हँसते हुए कहा।
उधर उसके दोस्त भी ठहाके लगाकर हँसने लगे। तभी अचानक एक पल के लिए शोर थम गया, क्लब में चारों तरफ अंधेरा सा छा गया। वेस्टर्न म्यूजिक अचानक से बंद हो गया। सभी लोग आसपास नजरे दौड़ाने लगे, उन सभी के थिरकते हुए कदम अचानक से रुक गए।
ठीक उसी समय सामने स्टेज पर हल्के नीले रंग की लाइट जगमगा उठी, कुछ देर बाद लाइट बंद चालू होने लगी, उसी के साथ वहां म्यूजिक की मनमोहक धुन बजने लगी।
तभी अचानक से माइक पर एक आवाज गूंज उठी, “आ रहे हैं…. आप सभी के दिलों पर…
राज करने….
बोलो कौन???”
“विक्की.. विक्की… विक्की”
पूरे क्लब में फिर से शोर मच गया, म्यूजिक एक बार फिर पूरे जोश में बजने लगा, पूरा क्लब मस्ती में झूमने लगा।
विक्की वह डांसर था, जिसका नाम सुनते ही लोग एक्साइटेड हो जाते थे। उसके डांस में वह जादू था, जो लाखों की भीड़ इकट्ठा कर सकता था, लेकिन ड्रीमलाइट क्लब की पूरी जिम्मेदारी इसी के ऊपर थी और उसकी वजह थी उसकी गर्लफ्रेंड करिश्मा!
विक्की उस समय पूरे जोश में अपनी परफॉर्मेंस दे रहा था और ऑडियंस उसके एक एक स्टेप पर पागल हुए जा रही थी। क्लब के अंदर का आलम यह था कि हर किसी पर बेहोशी छाई हुई थी।
तभी अचानक से लोगों की भीड़ में शोर मच गया। शोरगुल सुन कर विक्की ने डांस बंद कर दिया, उसकी नजर भी सामने भीड़ पर थी।
वो माइक पर बोला, “क्या हुआ? तुम लोग शोर क्यों मचा रहे हो?”
कहते हुए वो भी स्टेज से नीचे उतर गया और भीड़ को चीरता हुआ आगे बढ़ने लगा।
“सर, यहां एक लड़का तड़प रहा है, लगता है इसे हार्ट अटैक आया है!” रवि नाम के लड़के ने कहा।
“तो तुम लोग तमाशा क्यों देख रहे हो? इसे जल्द से जल्द क्लब के बाहर क्लीनिक में ले जाओ वरना बेचारा यहीं दम तोड़ देगा।” विक्की ने कहा तो उसकी बात सुन सनी उनके सामने आकर खड़ा हो गया।
“सर, लेकिन अब बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। क्लब का रूल है कि शो शुरू होने के बाद क्लब पूरी तरह से लॉक हो जाता है, आप ही बताइए, हम इसे बाहर कैसे ले जाएं?” सनी ने कहा।
क्लब के फर्श पर पड़ा वो लड़का बुरी तरह से छटपटा रहा था, विक्की ने उस लड़के को ध्यान से देखा,उस लड़के के मुंह से झाग निकल रही थी, ये देख विक्की शॉक्ड रह गया।
“क्या इसने ड्रग ली है? इसके मुंह से तो झाग निकल रही है।” विक्की ने सभी पर नजर मारी।
विक्की की बात का किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। म्यूजिक भी अब पूरी तरह बंद हो चुका था, सिर्फ लाइट्स जगमगा रही थीं। विक्की ने चारों तरफ देखा, सभी लोग खामोश खड़े थे।
ये देख वो घुटने के बल फर्श पर बैठ गया और उसने अपनी नाक उस लड़के के मुंह के पास लाकर सूंघने की कोशिश की।
“इसने तो ड्रग ही लिया है, लेकिन ये क्लब के अंदर ड्रग लेकर कैसे आया? यहां तो अंदर आने से पहले कड़ी जांच होती है।” विक्की बोला।
एक लड़की धीमी आवाज में बोली, “सर, ड्रग्स तो क्लब के अंदर ही मिल जाती है, जांच तो इसलिए होती है कि कोई बाहर से ड्रग लेकर ना आए और क्लब की ड्रग्स ही खरीदे। इसलिए जिसे भी ड्रग्स की जरूरत होती है वो क्लब के अंदर से ही ड्रग खरीदता हैं।”
उस लड़की की बात सुन विक्की हैरान रह गया।
क्रमशः
भाग 3
उस लड़की की बात सुन विक्की हैरान रह गया। इससे पहले कि वह कुछ बोल पाता, एक दूसरा लड़का बोल उठा, “तो इसमें गलत क्या है? हम यहां एंजॉय करने आते हैं, सारी चीजें यहीं मिल जाती हैं, हमें ड्रग्स के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ता और साथ ही साथ पुलिस की भी कोई टेंशन नहीं रहती।”
उस लड़के की बात सुन विक्की का दिमाग ठनक गया। अभी भी वो लड़का फर्श पर पड़े पड़े छटपटा रहा था।
जैकी नाम का लड़का बोला, ” सर, आप तो इस क्लब के एम्पलाई हैं, प्लीज़ सर, जल्दी से कुछ कीजिए वरना ये लड़का मर जाएगा, देखिए ये कितनी बुरी तरह से छटपटा रहा है!’
विक्की को जैसे अचानक से होश आया, वो तेजी से क्लब के दूसरी तरफ भागा, दूसरी मंजिल पर एक साथ कई केबिन बने हुए थे, उन्हीं केबिन में से एक में बॉस का ऑफिस शामिल था।
विक्की के दिमाग में बहुत सारी बातें एक साथ चल रही थी वह दिल का अच्छा इंसान था, उसने मन में सोचा, “मैं तो बस अपनी गर्लफ्रेंड करिश्मा की वजह से इस क्लब में जॉब कर रहा था, मुझे क्या पता था कि यहां इस तरह का काम होता है।”
सोचते हुए वो तेजी से बॉस के ऑफिस की तरफ बढ़ गया। कुछ ही सेकंड में विक्की बॉस के ऑफिस के सामने खड़ा था।
ऑफिस का गेट अंदर से बंद था, विक्की ने अपना हाथ आगे बढ़ाया ही था कि तभी उसके कानों में आवाज़ सुनाई पड़ी, “मास्टर, तुम तो इस धंधे के मास्टरमाइंड हो, इतनी सफाई से स्मगलिंग करते हो कि किसी को कानों कान खबर नहीं होती।”
विक्की ऑफिस के बाहर खड़े होकर गौर से सुन रहा था, यह उसके बॉस की आवाज थी, तभी दूसरी आवाज उसके कानों में पड़ी, “यस बॉस, अगर मैं सफाई से काम नहीं करूंगा तो मेरा धंधा चौपट हो जाएगा, फिर मुझे कौन पूछेगा?”
“कोई पूछे या ना पूछे, यह बाद की बात है, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि हमारे क्लब में ड्रग्स की खेंप अभी तक पहुंची क्यों नहीं? जबकि स्टॉक में अब बिल्कुल भी ड्रग्स नहीं बची है और तुम हो कि अपने मुंह से अपनी तारीफ किए जा रहे हो, बताओ ऐसे कैसे काम चलेगा?” बॉस की गुस्से भरी आवाज आई।
अचानक दूसरे आदमी की आवाज में घबराहट सुनाई देने लगी, “अरे सर गलती हो गई, आप टेंशन मत लीजिए, आज रात ही खेप पहुंचा दी जाएगी, आप बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए।”
यह सारी बातें सुन कर विक्की के चेहरे का रंग उड़ गया।
“इसका मतलब इस क्लब में यह सब भी होता है, यह तो बिल्कुल गलत बात है। मुझे इसका विरोध करना चाहिए, ये हमारे युवाओं के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।” विक्की मन में सोच रहा था, उसी समय एक ऐसी आवाज उसकी कानों में पड़ी जिसे सुन कर वह और ज्यादा परेशान हो गया।
कमरे के अंदर से आवाज आई जो कि एक लड़की की थी, “तो मिस्टर मास्टर, अपने आदमियों से पता करो कि खेप कब तक पहुंच जाएगी? हमारे क्लाइंट बार बार डिमांड कर रहे हैं, क्लब में महफिल अपने शबाब पर है, कहीं ऐसा ना हो कि रंग में भंग पड़़ जाए।”
यह आवाज करिश्मा की थी। विक्की की गर्लफ्रेंड करिश्मा की! विक्की बुरी तरह से तिलमिला गया।
“इसका मतलब मेरी गर्लफ्रेंड भी इन सबमें शामिल है, मुझे उसे समझाना होगा, उसे इन सबसे निकालना होगा।” सोचते हुए विक्की फिर से ऑफिस के दरवाजे की तरफ बढ़ा।
उसने ऑफिस के दरवाजे पर हाथ रखा ही था कि तभी अचानक “भड़ाक” की आवाज करके वो खुद ब खुद खुल गया, उसके सामने उसकी गर्लफ्रेंड करिश्मा खड़ी थी।
“अरे! विक्की तुम? तुम यहां क्या कर रहे हो, तुम तो परफॉर्मेंस दे रहे थे ना?” करिश्मा ने चौंक कर पूछा।
“वह सब छोड़ो, पहले मुझे यह बताओ कि तुम यहां क्या कर रही हो?” विक्की गुस्से से बेकाबू हुआ जा रहा था।
” यह कैसी बात कर रहे हो! आज से पहले तो तुमने मुझसे कभी इस तरह गुस्से में बात नहीं की थी।” करिश्मा हैरान थी।
“मैं तुमसे जितना पूछ रहा हूं सिर्फ उतना बताओ। तुम यहां क्या कर रही है?” विक्की का लहजा जस का तस था।
उसकी बात सुनते ही करिश्मा की आंखों में अजीब से भाव दिखाई देने लगे, ऐसा लग रहा था जैसे वो अभी हंटर लेकर विक्की की पिटाई कर देगी, फिर भी उसने जैसे तैसे खुद को संभाल लिया।
“विक्की डार्लिंग, तुम्हें हो क्या गया है, तुम ऐसी बातें क्यों कर रहे हो?” करिश्मा ने खुद पर काबू रखते हुए पूछा।
“मुझे पता नहीं था कि तुम ये काम भी करती हो, देखो करिश्मा यह बहुत बुरा काम है, मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूं इसलिए समझा रहा हूं, अब ये गलत काम बंद कर दो और कोई अच्छा काम करो, जिससे समाज और दुनिया में तुम्हें रिस्पेक्ट मिले वरना किसी न किसी दिन तुम्हारा भांडा फूटेगा और तुम जेल की सलाखों के पीछे जा पहुंचोगी। मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे साथ ऐसा कुछ हो।” विक्की एक सांस में बोलता ही चला गया।
“मैंने… मैंने ऐसा क्या कर दिया कि तुम मुझे उपदेश देने लगे। मैंने कोई गलत काम नहीं किया।” करिश्मा ने अनजान बनने की एक्टिंग की।
“सब कुछ जानते हुए अनजान मत बनो, मैंने तुम्हारी और बॉस की सारी बातें सुन ली है। देखो करिश्मा, यह सब गलत रास्ते हैं उनसे बाहर निकल आओ, मैं इसमें तुम्हारी पूरी हेल्प करूंगा।” विक्की ने समझाया।
करिश्मा ने पीछे घूम कर ऑफिस के अंदर देखा, उसका बॉस पहले ही दरवाजे तक आ चुका था, उसने करिश्मा को कुछ इशारा किया।
करिश्मा मुस्कुराकर विक्की की तरफ आगे बढ़ी, उसने विक्की का हाथ अपने हाथों में थाम लिया और उसे खींचती हुई एक तरफ ले जाने लगी।
करिश्मा उस समय छोटे-छोटे कपड़ों में थी, जिसमें उसका जिस्म नुमायां हो रहा था, विक्की चाहकर भी उसका विरोध नहीं कर सका। उसकी नज़र करिश्मा के खुबसूरत जिस्म से हट ही नहीं रही थी, यह देख करिश्मा के होंठों पर कुटिल मुस्कुराहट खेलने लगी।
विक्की उसके साथ साथ चलने लगा लेकिन साथ ही साथ वह उससे पूछते जा रहा था, ” करिश्मा, तुम मुझे कहां ले जा रही हो?”
“अभी तो तुम चुपचाप चलते रहो, बहुत दिनों से तुम मुझसे अकेले में मिलने की रिक्वेस्ट कर रहे थे ना? आज मैं तुमसे अकेले में मिलने को तैयार हुई हूँ इसलिए चुपचाप मेरे साथ चलो।” करिश्मा ने कहा।
वह उसे खींचते हुए एक सीक्रेट कमरे में ले आई और उसकी तरफ प्यार भरी नजरों से देखने लगी, विक्की भी उसकी इस अदा पर दीवाना होने लगा लेकिन उसे कहां पता था कि जल्द ही वह ऐसे गड्ढे में गिरने वाला था जहां से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
क्रमशः
भाग 4
“बड़े दिन बाद तुम मुझे इस तरह से देख रही हो आखिर बात क्या है?” विक्की ने पूछा।
करिश्मा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया, वो अपनी ड्रेस उतारने लगी, अब वह पहले से भी बहुत कम कपड़ों में थी। विक्की उसे देखकर ओर भी ज्यादा आकर्षित होने लगा था। अचानक करिश्मा ने अपनी ब्रा से कोई पुड़िया निकाली और मुस्कुराने लगी।
विक्की भी उत्सुकता से उस पुड़िया की तरफ देखने लगा।
“ये..ये क्या है करिश्मा ? ये पुड़िया कैसी है?” वह हैरान हुआ।
“ये परफार्मेंस बढ़ाने वाला पावडर है, ये तुम्हें अच्छा लगेगा, जरा मेरे पास तो आओ, कितने दिनों से तुम मुझसे इस तरह मिलना चाहते थे, मगर अब क्या हुआ अब तो बिल्कुल भोले से बन रहे हो, चलो कम ऑन! आज मेरा मन है तुम्हारे साथ इंटिमेट होने का, कम ऑन डियर!” करिश्मा ने जाल फेंका और विक्की फंसता चला गया।
वह मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा, इससे पहले की वह कुछ करता, करिश्मा ने पुड़िया खोल कर अपनी छाती पर लगा ली और अब एक बार फिर विक्की की तरफ देखने लगी, विक्की हैरानी से उसे तकने लगा था।
“यह तुमने क्या किया करिश्मा ? वो पाउडर तुमने क्यों लगा लिया?” विक्की ने हैरानी से पूछा।
“कम ऑन डियर, इसे लिक करो, बहुत अच्छा लगेगा, आओ तो सही, जल्दी आओ, देखो बड़े दिनों बाद हमें यह मौका मिला है, मैं चाहती हूं आज तुम्हारी सारी शिकायत दूर हो जाए क्योंकि मैंने तुम्हें कभी इंटिमेट होने का मौका नहीं दिया।” मादक अंदाज में करिश्मा बोल उठी।
उसकी बात सुनकर विक्की का चेहरा खिल उठा, उसने आगे बढ़कर करिश्मा को अपनी बाहों में भर लिया और उसकी छाती पर लगे पाउडर को अपनी जीभ से लिक करने लगा, जैसे-जैसे वह लिक कर रहा था वैसे वैसे उस पर नशा छाने लगा था, अंत में उसने नशे की झोंक में जोर से करिश्मा को अपनी बाहों में भर लिया और उसे ऐसे किस करने लगा जैसे पहले कभी किस ना किया हो, करिश्मा भी इसमें उसका पूरा साथ दे रही थी, जल्दी ही दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए और एक दूसरे की बाहों में लिपटकर बेड पर जा गिरे।
दोनों एक दूसरे के साथ अंतरंग होने लगे, जहां विक्की पूरे मन से करिश्मा से प्यार कर रहा था, वही करिश्मा की आंखों में कुछ ओर ही एक्सप्रेशन दिखाई दे रहे थे।
धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे में खोते चले गए, अंत में पसीने से भीगकर दोनों बिस्तर पर गिर पड़े।
विक्की आज बहुत खुश था, उसकी तमन्ना पूरी हो गई थी, वह मुस्कुराते हुए करिश्मा की तरफ देख रहा था।
“अच्छा लगा ना तुम्हें ये पाउडर! कैसा था बताओ?” करिश्मा ने मुस्कुरा कर पूछा।
पाउडर का नाम सुनते ही अचानक विक्की के दिमाग में ड्रग्स वाली बात घूम गई।
” वह तो ठीक था लेकिन यहां क्लब में जो कुछ भी हो रहा है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है, करिश्मा मैं कहता हूँ, तुम इन सब से बाहर आ जाओ। यह सब गलत काम है, अगर कभी पकड़ी गई तो तुम्हें जेल भी हो सकती है और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें जेल हो, तुम्हारी बदनामी हो या कोई तुम्हें उल्टा सीधा कहे।” विक्की फिर से समझाने की कोशिश करने लगा।
करिश्मा बिफर पड़ी, ” बकवास बंद करेगा या नहीं? कब से देख रही हूं बक बक करते जा रहा है, चुपचाप अपना काम नहीं कर सकता क्या? देख इस धंधे में बॉस भी शामिल है, इसलिए हमारा कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता और दूसरी बात, मैं क्यों जेल जाऊंगी? मैं तो बॉस की एक एंप्लॉय हूं, अगर यहां छापा पड़ा या ऐसा वैसा कुछ हुआ तो बॉस ही पकड़ा जाएगा इसलिए तुम अपना काम करो, मैं अपना काम करूंगी और बॉस को उनका काम करने दो।”
विक्की तुरंत उठकर बैठ गया, ” करिश्मा , तुम समझ नहीं रही हो, यह सिर्फ बॉस का काम नहीं है, इससे यंगस्टर्स की लाइफ खराब होती है, यह बहुत बुरा काम है और मैं चाहता हूं कि तुम ऐसे काम से दूर रहो। अगर तुम मुझे दिल से चाहती हो तो प्लीज इन सबसे बाहर निकल आओ।” अंतिम शब्दों में रिक्वेस्ट की थी विक्की ने।
” लगता है तू ऐसे नहीं मानेगा, देख तूने ज्यादा चपड़ चपड़ की तो तू इस नौकरी से ही हाथ धो बैठेगा लेकिन अगर तू मेरी बात मानेगा तो मैं तेरी पेमेंट दुगनी तिगुनी करवा सकती हूं।”
यह सुनते ही विक्की के चेहरे पर सीरियस एक्सप्रेशन आ गए। उसने करिश्मा की आंखों में झांकते हुए कहा, “करिश्मा , क्या तुम्हें लगता है कि मैं पैसे की लालच में गलत काम करूंगा? नहीं कभी नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा! मुझे नहीं चाहिए बढ़ी हुई पेमेंट और कान खोल कर सुन लो, मैं पुलिस कंप्लेंट करने जा रहा हूं, मैं तुम्हें एक बार फिर से समझाने की कोशिश कर रहा हूं, प्लीज इन सब से बाहर आ जाओ क्योंकि तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो इसलिए मैं नहीं चाहता कि तुम ऐसे गलत कामों में पड़ो, मेरी बात सुन रही हो ना?”
लेकिन करिश्मा की नजर उस समय कहीं और थी, करिश्मा उसकी पीठ के पीछे देखने लगी। उसकी आंखों में अजीब से भाव थे, ऐसा लग रहा था जैसे विक्की के पीछे कोई खड़ा होकर उसे इशारों में कुछ समझा रहा हो।
विक्की ने जब करिश्मा कों अपने पीछे देखते हुए पाया तो वह तुरंत पीछे की तरफ घूम गया, ठीक उसी समय करिश्मा ने बिल्ली की तरह उछल कर बेड के पास पड़ा हुआ फ्लावर पॉट उठाया और उसे विक्की के सिर पर दे मारा।
“आऽऽऽh!”
विक्की चीखा और लड़खड़ाते हुए फर्श पर जा गिरा। करिश्मा एक बार फिर बिल्ली की तरह उछली और विक्की की छाती पर जाकर बैठ गई। वो पूरी ताकत से विक्की का गला दबाने लगी। विक्की उससे बचने के लिए हाथ पैर चलाने लगा।
“ मैंने तुझे कितनी बार समझाया लेकिन तुझे समझ नहीं आया, हमारी पुलिस कंप्लेंट कराने चला था, आज मैं तुझे यमराज के पास पहुंचा दूंगी, अब तू वहीं से कंप्लेंट करते रहना।” कहते हुए करिश्मा ने विक्की के गले पर अपना दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया, विक्की ने अपनी ताकत इकट्ठी करके एक तेज झटका करिश्मा को दिया, जिससे वह उछल कर दूर जा गिरी।
“ मुझे पता नहीं था कि तू ऐसी है वरना मैं तुझे जाने कब का छोड़ चुका होता लेकिन तू तो चालक लोमड़ी से भी ज्यादा चालाक निकली, अच्छा हुआ आज तेरी सच्चाई मेरे सामने आ गई, तुझे क्या लगा था तु मुझे ऐसे मार देगी, नहीं ऐसा कभी नहीं हो पाएगा, अब तो तुझे जेल जरूर जाना पड़ेगा, मैं अभी पुलिस बुलाता हूं।”
कहते हुए विक्की ने अपना फोन निकाल कर पुलिस को कॉल करना चाहा लेकिन तभी पीछे से उसकी पीठ पर एक मुक्का पड़ा, वो मुंह के बल बिस्तर पर जा गिरा।
उसकी नाक टूट गई, वह अभी उठ भी नहीं पाया था की तभी तीन-चार लोगों ने आकर उसे बुरी तरह जकड़ लिया। विक्की ने सामने की तरफ देखा तो उसका बॉस उसकी तरफ गुस्से में तिलमिलाते हुए उसकी तरफ बढ़ता चला आ रहा था।
क्रमशः
भाग 5
तीन-चार लोगों ने विक्की को बुरी तरह जकड़ लिया था। उसका बॉस गुस्से में तिलमिलाते हुए उसकी तरफ बढ़ता चला आ रहा था।
“बॉस, यह पुलिस कंप्लेंट करने जा रहा था, मैंने इसे समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन इस पर तो जैसे सच्चाई का भूत सवार है। लगता है इसे मरने की कुछ ज्यादा ही जल्दी है।” करिश्मा अपने बॉस के करीब जाते हुए बोली।
“मुझे पता है, मैंने पूरी बात सुन ली है, मैं बस यह देखना चाहता था कि ये तुम्हारे काबू में आता है या नहीं। तुम टेंशन मत लो, इसे हम अपने तरीके से समझा देंगे।” बॉस ने मुस्कुराते हुए कहा और इसी के साथ वह धीरे धीरे विक्की की तरफ आगे बढ़ा, उसका चेहरा बहुत खतरनाक दिखाई दे रहा था, उसने विक्की की आंखों में आंखें डाली।
“लगता है, तुझे ईमानदारी का कीड़ा काट खाया है, देख अगर तू हमारे साथ काम करेगा तो फायदे में रहेगा। तेरी सैलरी भी बढ़ा देंगे क्योंकि तू मेरा एक खास एम्प्लाई है, एक अच्छा डांसर है, हम तुझे ऐसे ही मारना नहीं चाहते, अगर हम तुझे मारेंगे तो हमारा ही नुकसान होगा, इसलिए अभी भी समझा रहा हूँ कि हमारे साथ मिल जा इससे हमारा भी फायदा होगा और तेरा भी।” बॉस ने उसे समझाने की भरपूर कोशिश की।
“कभी नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा, मैं गलत काम में तुम्हारा साथ कभी नहीं दूंगा। मैं एक कलाकार हूँ, अपने हुनर से पैसे कमाता हूँ, तुम्हारी तरह ड्रग्स का कारोबार नहीं करता। मैं अभी भी समझा रहा हूं, इस देश की युवा पीढ़ी को ड्रग्स का आदी मत बनाओ। ये हमारे देश का भविष्य है।” विक्की की टोन अभी भी वही थी।
उसकी बात सुन बॉस के जबड़े कसने लगे। वो तेजी से आगे बढ़ा, उसने एक तेज मुक्का विक्की के पेट पर मारा, विक्की के मुंह से खून निकलने लगा, वह खून की उल्टियां करने लगा। बॉस ने उसकी कॉलर पकड़ी और उसके चेहरे पर तमाचा जड़ दिया।
विक्की ख़ून थूकते हुए बोल उठा, “तू चाहे मुझे कितना भी मार ले। लेकिन मैं तेरे साथ काम नहीं करूंगा, विक्की ने आज तक कोई गलत काम नहीं किया है और ना ही वो अपनी आंखों के सामने गलत काम होता देख सकता है। तुम सबको जेल जाना होगा, तुम लोग हमारे देश की युवा पीढ़ी को गलत राह में धकेल रहे हो।”
“अबे तू इतनी बकर बकर क्यों कर रहा है, वो सब तेरे सगे वाले है क्या? जो तू इतना तिलमिला रहा है। तुझे क्या लगा, हमारा क्लब क्या सिर्फ तेरे डांस की वजह से फेमस हुआ है, नहीं इसमें हमारे यहां की ड्रग्स का भी उतना ही हाथ है।” बॉस तिलमिलाया था।
“मुझे पता नहीं था कि तुम इतने नीच इंसान हो, अगर मुझे पहले ही तुम्हारी सच्चाई पता चल जाती तो मैं कब का तुम्हें सलाखों के पीछे डलवा चुका होता।” विक्की ने कहा तो बॉस ने एक बार फिर से उसके पेट में जोर से मुक्का मारा। इस बार भी उसके मुंह से खून निकलने लगा।
उसकी ये हालत देख बॉस के होंठों पर मुस्कुराहट आ गई। वह बोला, “विक्की, हम तुझे जान से भी मार सकते हैं, इस गलतफहमी में मत रहना कि हम तुझे जिंदा छोड़ देंगे।”
विक्की मुस्कुराकर बोला, “ अगर तुम मुझे मार दोगे तो पब्लिक तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेगी किसी न किसी तरीके से ये बात पब्लिक के सामने आ ही जाएगी।”
बॉस के चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट आ गई।
“लेकिन मैं तुझे मारूंगा नहीं, मैं तुझे जिंदा दफनाऊंगा, मेरे साथ गद्दारी करने वाले को मैं ऐसी सजा देता हूं कि देखने वालों की आत्मा काँप जाती है, तेरा हश्र देख आगे से कोई हमारे खिलाफ जाने की सोचेगा भी नहीं।”
कहने के साथ ही उसने अपने आदमियों को इशारा किया। उसके आदमी तुरंत कमरे से बाहर निकल गए।
जब वो वापस लौटे तो उनके हाथों में एक बड़ा सा ताबूत था। उस ताबूत को देखते ही विक्की की आंखों में डर दिखाई देने लगा, लेकिन वो अब भी अपनी बात पर अड़ा हुआ था।
“अब तक हमने तुझे मौका दिया था लेकिन अब और नहीं मिलेगा। अब मरने के लिए तैयार हो जा।” बॉस की आवाज सर्द थी।
विक्की की नजर ताबूत पर जमी हुई थी, वो डर से थर थर कांपने लगा।
विक्की डर से चीखा, “ नहीं, मुझे जाने दो। बचाओ…बचाओ।”
बॉस ने तुरंत अपने आदमियों को इशारा किया, इशारा पाते ही उसके आदमियों ने विक्की के मुंह पर टेप लगा दी। और उसके हाथ पैर रस्सियों से बांध दिए। फिर उसे जिंदा ही ताबूत में बंद कर दिया, विक्की ताबूत में छटपटाता रहा, हाथ पैर मारने की कोशिश करने लगा लेकिन उन हैवानों पर कोई असर नहीं हो रहा था।
“हाहाहाहाहा” बॉस ठहाके लगाकर हँसने लगा।
‘’ जाओ, इस गद्दार को ले जाकर जिंदा ही दफना दो, किसी को कानों कान खबर नहीं होना चाहिए। जाओ।” बॉस ने कहा।
“ओके बॉस, आप टेंशन मत लीजिए, इसे हम ठिकाने लगा देंगे।” उसके आदमियों ने कहा और उस ताबूत को लेकर पास के ही क्रिश्चियन कब्रिस्तान में जा पहुंचे, ताबूत के अंदर अभी भी विक्की जोर जोर से छटपटा रहा था लेकिन उन जल्लादों पर कोई असर नहीं पड़ रहा था।
उन लोगों ने जल्दी ही कब्रिस्तान में एक गहरा गड्ढा खोद डाला और उन्होंने विक्की के ताबूत को उस गड्ढे में दफन कर दिया।
ताबूत दफ़नाने के बाद उन गुंडों के लीडर ने कहा, “चलो, इसका काम तो हो गया। बॉस को खबर कर देता हूँ।”
इसी के साथ उसने बॉस को कॉल करके सुचना दे दी और अपने आदमियों को लेकर वहां से निकल गया।
उन लोगों के वहां से जाते ही आसमान में भयानक तरीके से बादल अपना कब्जा जमाने लगे और हवाएं गुजरते हुए पलों के साथ तेज और तेज होती चली गई।
साथ ही साथ अचानक बड़ी भयानक आवाज के साथ बिजली कड़की और ऐसा लगा जैसे बिजली का एक टुकड़ा उस जगह पर आकर गिरा हो, जिस जगह पर विक्की को दफनाया गया था।
“बूम भड़ाक” की भयानक आवाज हुई और इसी के साथ एक जबरदस्त धमाके से कब्रिस्तान चीख उठा। धमाका इतनी तीव्रता के साथ हुआ था कि एक पल को ऐसा लगा जैसे कब्र फाड़कर मुर्दे जाग उठे हो।
क्रमशः-
भाग 6
ड्रीमलाइट डिस्को क्लब में आज एक बार फिर से महफिल सजी हुई थी। ऑडियंस का शोर शराबा महफिल में जान भर रहा था। चारों तरफ जाम पर जाम टकराए जा रहे थे, लेकिन आज पहले जैसा जोश नहीं था क्योंकि उनका चहेता डांसर विक्की हफ्तों से गायब था और इसी लिए सभी कपल्स ड्रग्स लेकर मदहोश हुए जा रहे थे।
“लगता है आज भी मजा नहीं आएगा, विक्की सर का अभी तक कुछ पता नहीं चला है, विक्की सर होते तो मजा दुगना हो जाता।” सनी ने उदास स्वर में कहा।
“पता नहीं यार, विक्की सर को आखिर हुआ क्या है? वो क्लब क्यों नहीं आ रहे हैं और क्लब के एम्पलाइज भी कुछ बता नहीं रहे।” जुली की आवाज आई ।
“हो सकता है विक्की सर बीमार हों, शायद इसीलिए वो नहीं आ पा रहे होंगे।” रवि ने कहा।
“अगर ऐसा है तो क्लब वालों को बताना तो चाहिए ना, हम लोग रोज यहां विक्की सर के इंतजार में घंटो तक रुके रहते हैं लेकिन हर बार उनकी जगह कोई ओर आ जाता है, और हमारा सारा मजा बेकार हो जाता है।” अनामिका भी चुप नहीं थी।
लोग बातें ही कर रहे थे कि ठीक उसी समय म्यूजिक बंद हो गया और लाइट भी बंद चालू होने लगी।
“लगता है विक्की सर आ रहे हैं, क्योंकि उनके आने पर ही ऐसी लाइट जलती बुझती हैं, वो ऐसे ही शानदार एंट्री लेते हैं।” सनी के चेहरे पर स्माइल आ गई।
ठीक तभी हल्का सा लेकिन डरावना म्यूजिक बजने लगा, सभी कपल्स पहले तो म्यूजिक पर झूमने लगे, धीरे धीरे वो म्यूजिक तेज होने लगा और साथ ही साथ डरावना भी होता जा रहा था।
“अरे यार, ये हॉरर मूवी का म्यूजिक किसने लगा दिया? यह म्यूजिक तो दिमाग खराब कर रहा है, इसे जल्दी से बदलो।” सनी चीखा।
“सचमुच यार, मुझे तो डर लगने लगा है, एक तो लाइट भी बंद हो गई है, नीली रोशनी अचानक से जल रही है, फिर बुझ रही है। मेरी तो हालत खराब हो रही है।” जुली भी बोल पड़ी।
“हो सकता है विक्की सर इस बार हमें सरप्राइज दे रहे हो!” अनामिका ने कहा ।
“नहीं, ऐसा हो ही नहीं सकता, विक्की सर ने एक बार हमें बताया था कि वो ऐसा कभी भी नहीं करते, उन्हें हॉरर वैसे भी पसंद नहीं है।” रवि ने बात काटी।
“ये म्यूजिक तो धीरे धीरे ओर भी कर्कश होता जा रहा है, लगता है ये हमारे कान के पर्दे फाड़ देगा।” जुली बोल पड़ी।
अचानक म्यूजिक तेज होते होते इतना तेज हो गया कि वहां मौजूद कपल्स को अपने कानों पर हाथ रखना पड़ा।
लोग चिल्लाने लगे, “बंद करो, बंद करो इस म्यूजिक को, जल्दी से बंद करो वरना हमारे कान के पर्दे फट जाएंगे।”
एक लड़का बोला, “अरे! यह क्या हो रहा है, यह कैसा मजाक है, इस तरह का हॉरर म्यूजिक और उसके ऊपर से इतनी लाउड वोल्यूम में! मैं कहता हूं इसे बंद करो, हम यहां एंजॉय करने आए हैं परेशान होने के लिए नहीं।”
एक लड़की चिल्लाई, “ देखो स्टेज पर कोई आ रहा है।”
सभी ने घूम कर स्टेज की तरफ देखा, हल्की लाल रंग की रोशनी चारों तरफ फैली हुई थी, जो धीरे धीरे डार्क रेड होने के साथ साथ डरावनी होती जा रही थी, सभी के चेहरे पर बारह बजे हुए थे। सभी लोग चिल्लाने लगे, “ यह क्या हो रहा है हमारे साथ? यह कैसा मजाक है, प्लीज कोई इसे बंद करवाओ!”
लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ कर पाता या समझ पाता, स्टेज पर दो नर कंकाल एक साथ आए जिन्हें देखते ही वहां मौजूद सभी कपल्स की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। दोनों नर कंकाल गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड की तरह बाहों में बाहें डाल कर स्टेज पर परफॉर्मेंस देने लगे, उनकी परफॉर्मेंस बहुत ज्यादा खतरनाक थी।
स्टेज पर कभी लाल लाइट फैल रही थी, कभी नीली और कभी बिल्कुल अंधेरा हो रहा था। दोनों कंकालो की आंखों में जैसे लाल लाल बल्ब टिमटिमा रहे थे।
म्यूजिक तेज और तेज होता जा रहा था। लोगों के कान से खून निकलने लगा। लोग चिल्ला चिल्ला कर इधर उधर भागने लगे लेकिन भागने का कहीं रास्ता नहीं था। क्लब चारों तरफ से बंद था। स्टेज पर खतरनाक डांस अभी भी चालू था।
तभी स्टेज पर मौजूद एक नर कंकाल ने अपने हाथ फैलाए और जैसे जैसे वह अपने दोनों हाथों को पास लाता जा रहा था, वैसे वैसे आसपास मौजूद बीयर की बोतल और ग्लास हवा में उड़ कर एक दूसरे के पास आती जा रही थी। अचानक उसने जोर से ताली बजाई और उसी के साथ बीयर की बोतल और ग्लास आपस में तेजी से टकराई, टकराते ही वे चूर चूर हो गई।
ढेर सारा कांच वहां मौजूद कपल्स के ऊपर एक साथ गिरा। सभी की आंखें एकाएक मारे डर के बंद हो गईं। लेकिन कुछ देर तक जब कुछ भी नहीं हुआ तो उन लोगों ने डरते डरते अपनी आंखें खोलीं, ऊपर की तरफ देखा, म्यूजिक अब बंद हो चुका था। स्टेज पर चल रहा डांस भी रुक चुका था। दोनों नर कंकाल एकदम ऐसे खड़े थे जैसे डांसर अपने ऑडियंस का अभिवादन कर रहा हो।
“हमारे ऊपर अभी अभी ढेर सारा कांच गिरने वाला था लेकिन गिरा नहीं, कहीं हमें भ्रम तो नहीं हुआ?” एक घबराई आवाज आई।
“नहीं नहीं.. अरे वह देखो ऊपर, हमारे ऊपर इतना सारा कांच हवा में लहरा रहा है।” दूसरा लड़का बोल उठा।
डर के मारे सभी ऊपर देखने लगे। ठीक तभी एक बार फिर भयानक म्यूजिक चालू हो गया। म्यूजिक चालू होते ही उनके सिर के ऊपर मौजूद कांच का गुबार हवा में किसी चक्रवात की तरह घूमने लगा। घूमते घूमते वह धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगा।
“अरे भागो यहां से! भागो जल्दी भागो! वरना यह कांच हम सभी को बोटी बोटी कर डालेंगे।” सनी चिल्लाते हुए भागा।
“सारे दरवाजे बंद है, हम कहां भागेंगे? कहां जाएंगे? किस तरफ से जाएंगे?”
“हमें क्लब के मालिक को, क्लब के मैनेजर को कॉल करनी होगी!”
उसने जल्दी से अपना फोन निकाला लेकिन फोन निकलते ही उसके हाथ से उछल कर ऊपर कांच के बवंडर में शामिल हो गया।
इसी के साथ एक एक करके सभी की जेब से फोन निकल निकल कर ऊपर कांच के बवंडर में शामिल होता जा रहा था। उनके फोन टुकड़े टुकड़े होकर तेजी से नाच रहे थे और अब धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ते आ रहे थे। लोग चिल्ला चिल्ला कर आसपास की दीवारों की तरफ भाग कर उन्हें पीट रहे थे लेकिन उनकी सुनने वाला वहां कोई नहीं था।
म्यूजिक इतना तेज हो चुका था कि उनकी सहनशीलता के बाहर निकल चुका था। लोग घुटने के बल फर्श पर बैठने लगे।
उसी पल एक लड़की की भयानक चीख पूरे क्लब में गूंज गई। म्यूजिक अभी भी बज रहा था। लोगों ने घूम कर देखा तो मारे डर के उनकी आ आंखें फैल गईं, वे थर थर कांपने लगे।
क्रमशः
भाग 7
उस क्लब में मौत का एक ऐसा तांडव हो रहा था जिसे सभी को अपनी चपेट में ले रखा था।
“ओ माय गॉड यह क्या हो रहा है बचाओ… बचाओ… कोई हमें बचाओ।” तनिषा चिल्लाई।
तनिषा के साथ साथ बाकी लोग भी डर से चिल्लाने लगे। उनके सिर के ऊपर अभी भी बवंडर के साथ ढेर सारे कांच घुम रहे थे। वो सभी काँच तेजी से नीचे की तरफ बढ़ते चले आ रहे थे।
चक्रवात की गति बहुत तेज थी, इतनी तेज कि सिर्फ शीशे की चमक ही दिखाई दे रही थी बाकी कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। पूरे क्लब में लाल हरी नीली लाइट रह रहकर बंद चालू होने लगी थी।
“ ये कांच के टुकड़े जल्दी ही हम सबको काट डालेंगे। हमें…हमें कुछ करना होगा।” सनी चिल्लाया।
“हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते, एक तो बाहर जाने का रास्ता भी बंद है और यहां छुपने तक की जगह नहीं है, तुम्हीं बताओ, हम करें भी तो क्या करें?” रवि ने बेबस होकर कहा।
सनी उस डरावने माहौल से डरकर इधर उधर नजरें दौड़ाने लगा। तभी उसकी नज़र क्लब के अंदर की तरफ गई, उसके चेहरे पर राहत के भाव आ गए।
“उधर उधर बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है और ऊपरी मंजिल की तरफ जाने का रास्ता भी चालू है हम उस तरफ से बाहर निकाल सकते हैं।” सनी ने कहा।
क्लब के अंदर जितने भी लोगों ने ये बात सुनी वो तेजी से बाहर की तरफ दौड़े, लेकिन तभी
“ भड़ाक” की आवाज के साथ उधर का दरवाजा भी बंद हो गया अब उस क्लब में चीख पुकार मच गई थी। सभी लोग चीखते चिल्लाते हुए दीवारों को पीट रहे थे। एक दूसरे के बाल पकड़ पकड़ कर नोंच रहे थे।
उन सभी को ऐसा लगने लगा था जैसे उन्हीं में से किसी ने यह सब किया हो।
ठीक तभी एक लड़का शैतानों की तरह हँसने लगा, उसकी हँसी बहुत डरावनी थी, “ हा हा हा हा”
उस लड़के की भयानक हँसी उस डरावने माहौल को ओर भी ज्यादा डरावना बना रही थी। उस लड़के की आंखें बिल्कुल खून की तरह लाल हो गई थी, उसने अपने साथी के सिर के बाल दोनों हाथों से पकड़ लिए और उसे पूरी ताकत से खींचने लगा।
उसका साथी अपने बाल छुड़ाने के लिए कोशिश करने लगा लेकिन उसकी पकड़ काफी मजबूत थी। ठीक उसी पल उस लड़के ने अपना मुंह खोला, अब उसके लंबे-लंबे दाँत दिखाई देने लगे थे, उसका विकृत चेहरा देख उसका साथी चीखने लगा।
“बचाओ. भू…भूत!”
लड़के ने अपने पैने नुकीले दाँत अपने साथी की गर्दन में गड़ा दिए, और एक झटके से जब बाहर खींचा तो उसके साथी की गर्दन से मांस का एक बड़ा सा लोथड़ा निकलकर लटकने लगा। वो लड़का उस मांस को चबा चबाकर खाने लगा।
“चपड़…चपड…”
बाकि लोगों ने जब ये नजारा देखा तो उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।
प्रशांत घबराते हुए बोल उठा, “ अरे इस लड़के को क्या हो गया? देखो ये तो किसी नरभक्षी की तरह अपने ही दोस्त को खा रहा है। हे भगवान!”
अर्पिता प्यार से बोल उठी, “ उसे क्या देख रहे हो, जरा इधर देखो!”
जैसे ही प्रशांत ने अर्पिता की तरफ देखा, वो डर से थर-थर कांपने लगा। अर्पिता की आंखें पूरी तरह बदल गई थी, उसके चेहरे पर जगह जगह कटा फटा मांस दिखाई देने लगा। वो तेजी से प्रशांत की तरफ बढ़ने लगी।
अर्पिता हँसते हुए बोल पड़ी, “ हा हा हा, क्या हुआ? इतना डर क्यों रहे हो? तुम्हारे हाथ पैर क्यों कांप रहे हैं? क्या हो गया? हा हा हा!”
अर्पिता अपने हाथ आगे करके खतरनाक ढंग से प्रशांत की तरफ बढ़ने लगी, उसके हाथों में तीखे नुकीले नाखून निकल आए थे और उसके जबड़े से नुकीले दाँत निकलने लगे और हाथों के नाखून पैने होने लगे, उसके बाल चारों तरफ लहराने लगे, आंखों के किनारे काले काले घेरे बनने लगे थे।उसने तेजी से प्रशांत का गला पकड़ लिया।
प्रशांत चिल्लाया, “ अर्पिता, ये तुम क्या कर रही हो? छोड़ो मुझे, और और ये तुम्हारे.. तुम्हारे चेहरे को अचानक क्या हो गया?”
अर्पिता ठहाके लगाने लगी, “ हाहाहाहाहा”
उसने प्रशांत के गले पर जोर लगाया, प्रशांत चीखने लगा, “ बचाओ…बचाओ…
लेकिन उसे कौन बचाता? वहां तो सभी अपनी जान बचाने में लगे हुए थे। अर्पिता ने अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ाया और प्रशांत के पेट में घुसेड दिया, एक ही झटके में उसने अपना हाथ बाहर खींच लिया, अब उसके हाथ में प्रशांत की अंतड़ियां थी, प्रशांत की आंखें बाहर आ चुकी थी, उसका सिर एक तरफ लुढ़क गया, अर्पिता उसकी अंतड़ियों को चबा चबा कर खाने लगी।
अर्पिता के मुंह से मांस चबाने की आवाजें आने लगी। तेजी से नाचता हुआ काँच का बवंडर अभी उनके सर से ऊपर था, लेकिन अब धीरे-धीरे वह ओर भी नीचे आता जा रहा था, क्लब में सभी कपल्स एक दूसरे को फाड़ कर खाने लगे थे। कुछ डर से चिल्ला रहे थे, चीख रहे थे, खुद को बचाने की गुहार लगा रहे थे लेकिन वहां ऐसा कोई नहीं था जो उन्हें बचा सकता।
स्टेज पर नर कंकाल फिर से डांस करने लगे, धीरे-धीरे थिरखते हुए उनकी स्पीड लगातार तेज होती जा रही थी। आखिर में वो सब इतना तेज तेज नाचने लगे कि उनके स्टेप्स को समझ पाना ही मुश्किल हो गया, ऐसा लग रहा था जैसे चाबी लगा गुड्डा नाच रहा हो।
जैसे-जैसे वो कंकाल नाचते जा रहे थे, वैसे ही क्लब के अंदर ऑडियंस पर ख़ून सवार होने लगा, वो सभी एक दूसरे को फाड़कर खाने लगे, एक दूसरे का खून पीने लगे। एक दूसरे के बाल पकड़ पकड़ कर उखाड़ने लगे।
किसी लड़के ने अपनी प्रेमिका के कान चबा लिए तो किसी ने अपनी प्रेमिका की गर्दन में दाँत गड़ा दिए।
शीशे का बवंडर अचानक बिल्कुल नीचे आ गया, पूरी स्पीड से नाचता हुआ वह बवंडर वहां मौजूद ऑडियंस के जिस्म को काटने लगा, चारों तरफ ख़ून की बौछार फैलने लगी।
दीवारें खून के छींटों से भर गई, यहां तक की स्टेज पर नाच रहे कंकाल भी लाल हो गए। हर जगह से ख़ून टपकने लगा था। देखते ही देखते वहां मौजूद सभी ऑडियंस का जिस्म छोटे-छोटे टुकड़ों में कट कर क्लब में फैल चुका था। उनकी हड्डियों तक का चूरा बन चुका था।
बवंडर अभी भी थमा नहीं था, उस बवंडर का निशान अब वहां रखी हर एक चीज पर था। वो पूरा क्लब तहस नहस हो चुका था।
म्यूजिक अपने फुल वॉल्यूम पर था, अब वॉल्यूम उस लिमिट को क्रोस कर चुका था, जिसे सुनते ही इंसान के सिर के परखच्चे उड़ जाते हैं।
क्लब के अंदर अब सिर उन लोगों की लाशे पड़ी हुई थी, और स्टेज पर अभी भी वो नरकंकाल डांस कर रहे थे।
क्लब की सभी बेशकीमती चीजें एक एक करके टूट कर उन लाशों पर गिरने लगी।
अचानक वहां जोरदार ठहाके की आवाज आई,
“हा हा हा हा हा हा”
और इसी के साथ एक तेज धमाका हुआ, धमाके के साथ म्यूजिक सिस्टम के परखच्चे उड़ गए।
म्यूजिक सिस्टम के उड़ने के साथ साथ एक-एक करके वहां लगे बल्ब भी फटने लगे, स्टेज पर मौजूद दोनों नर कंकालों का डांस अभी भी जारी था। उनमें से एक ने अपना एक हाथ ऊपर उठाया, उसके ऐसा करते ही क्लब में रखी हुई मेज, कुर्सियां ऊपर हवा में उड़ने लगी।
उसने एक बार फिर जोर से ताली मारी, ऐसा करते ही मेज कुर्सियां आपस में जोर से टकराई, और टकराने के साथ ही टूट कर हवा में बिखर गई।
अब एक बार फिर हवा में टूटी हुई कुर्सी और मेज का बवंडर उठ रहा था, लेकिन यह बवंडर ज्यादा देर नहीं चला, इस बवंडर के खत्म होते ही क्लब के दरवाजे जोर-जोर से खड़खड़ाने लगे, देखते ही देखते वो भी धराशाई हो गए, अब क्लब की छत जोर-जोर से हिलने लगी थी और आखिर में एक तेज धमाका हुआ।
“ भड़ाक” और सब कुछ खत्म हो गया, सबकुछ खत्म!
क्रमशः-
भाग 8
“बॉस, जब से हमने विक्की को अपने रास्ते से हटाया है। हमारे क्लब में रंगीनियत कुछ कम हो गई है। पहले जैसे ऑडियंस नहीं आते हैं और ना ही ड्रग्स की सप्लाई पूरी तरह से हो पा रही है।”
करिश्मा ने बीयर से भरी ग्लास बॉस के आगे की। उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। इस समय बॉस क्लब के ही अपने एक लग्जरियस कमरे में मौजूद था और उसके सामने मौजूद थी करिश्मा और करिश्मा के हाथों में थी शराब की बोतल।
“इस समय मैं यहाँ अपना मूड बनाने आया हूँ और तुम वह बातें याद दिलाकर मेरा मूड क्यों खराब कर रही हो। आओ इधर आओ मुझे तुम्हें आज अपने बिल्कुल करीब से देखना है।”
कहते हुए बॉस ने अपना हाथ फैला दिया। करिश्मा मुस्कुराती और इठलाती हुई उसके पास आ गई।
“मैं तो हमेशा आपके करीब ही रहती हूं बॉस। बस मुझे हमारे बिजनेस को लेकर चिंता हो रही थी। वरना आप तो हमेशा बिजी ही रहते हैं, समय ही नहीं मिलता आपको।” करिश्मा ने दोबारा अपनी चिंता जाहिर की।
“अरे! वह साला नचनिया तुम ही तो ढूंढ कर लाई थी अपना फेक बॉयफ्रेंड बना कर। मुझे भरोसा है कि तुम उससे भी अच्छा नाचने वाला ले आओगी और फिर हमारा क्लब धुआंधार चलने लगेगा।”
बॉस की आंखों में शराब का नशा छाता जा रहा था। उसने करिश्मा को अपनी बाहों में खींच लिया। करिश्मा भी अपने बॉस की आंखों में आंखें डालकर जैसे मदमस्त होने लगी थी। एक हाथ में शराब के ग्लास पकड़े हुए बॉस ने करिश्मा के होठों पर किस किया और फिर एक घूंट शराब की लेने के बाद गिलास वापस मेज पर रख दिया।
उसने करिश्मा को अपनी बाहों में भर लिया। उसे गोद में उठाकर पास वाले कमरे के डबल बेड पर लेकर आया और बेड के ऊपर पटक दिया।
बॉस जल्द ही करिश्मा के ऊपर सवार था। उसकी उंगलियां करिश्मा के बदन पर घूम रही थी और करिश्मा की आंखें धीरे धीरे बन्द होती जा रही थीं।
यह दोनों अभी पूरी तरह से वासना में डूबे भी नहीं थे कि तभी ऐसा लगा जैसे पूरा कमरा हिल गया हो।
“यह क्या था बॉस? मुझे ऐसा लगा जैसे पूरा कमरा हिल गया हो। कहीं भूकंप तो नहीं आ गया?” करिश्मा ने घबराकर कहा।
“जहां तुम मौजूद हो वहां भूकंप आना कोई बड़ी बात नहीं है।” शराब के नशे में धुत्त बॉस ने कहा। उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी लेकिन करिश्मा के चेहरे पर परेशानी दिखाई दे रही थी।
“बॉस, आप समझ नहीं रहे हैं। मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है। अभी कुछ ही देर पहले यह कमरा कितनी तेजी से हिल रहा था। ऐसा लगता है जैसे जैसे…”
इससे आगे करिश्मा कुछ और बोलती कि तभी एक बार फिर पूरा कमरा बुरी तरह से हिल गया। इस बार बॉस को भी एहसास हुआ लेकिन इससे पहले कि दोनों में से कोई कुछ समझ पाता। पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
करिश्मा बेड के आसपास टटोलकर अपना मोबाइल फोन ढूंढने लगी। तभी उसका हाथ किसी चीज से टकराया तो वह चौंक गई और इसी के साथ उसके गले से एक डरी हुई सी चीख निकल गई।
“क्या हुआ? तुम चीख क्यों रही हो?” बॉस की आवाज आई।
“बॉस… बॉस! ऐसा लगा जैसे बेड पर किसी कंकाल का हाथ पड़ा हो। हड्डियों जैसी उसकी अंगुलियां मेरी उंगलियों से टच हुई है अभी।”
करिश्मा की बात सुनकर बॉस हँसते हुए बोल उठा, “जब शराब ज्यादा हो जाती है ना डार्लिंग तो ऐसे ही कंकाल और हड्डियां नजर आती है।”
इसी के साथ वह भी अपने मोबाइल को ढूंढने के लिए अपना हाथ इधर उधर करने लगा। तभी उसके हाथ भी किसी चीज पर पड़े तो उसने टटोल कर उस चीज को उठा लिया। उस चीज को देखते ही करिश्मा के होश उड़ गए।
“बॉस बचाओ…बचाओ।” करिश्मा की फटी फटी चीख बॉस को सुनाई दी। लेकिन अंधेरा होने की वजह से बॉस को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
तभी अचानक से पूरा कमरा रोशनी से भर उठा और जैसे ही बॉस की नजर बेड पर गई वह उछल पड़ा। वह बुरी तरह से हड़बड़ाकर बेड से नीचे कूद गया।
बेड पर एक कंकाल ठीक उसी जगह पड़ा हुआ था। जहां अभी कुछ देर पहले उसने करिश्मा को लिटाया था।
“हा हा हा हा! कैसी रही बॉस? कैसा लगा मेरा मजाक! मजा आया या नहीं?” पूरे कमरे में एक कर्कश आवाज गूँज गई।
करिश्मा कमरे के एक कोने में पड़ी बुरी तरह से काँप रही थी। उधर बेड पर पड़ा हुआ कंकाल धीरे से खड़ा हो गया। वह बॉस की तरफ बढ़ने लगा।
“कौन हो तुम? कौन हो? रुक जाओ! रुक जाओ! मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? प्लीज अपनी जगह पर रुक जाओ।”
लेकिन उसकी तरफ बढ़ते हुए उस कंकाल के ऊपर कोई असर नहीं पड़ा। वह अब बॉस के एकदम पास आ चुका था। तभी उसकी नजर करिश्मा पर गई तो वह करिश्मा की तरफ बढ़ गया।
“करिश्मा डार्लिंग! तुम तो मेरी गर्लफ्रेंड थी। फिर यहां इसके कमरे में क्या कर रही हो? आओ करिश्मा डार्लिंग! अब हम मजे करते हैं क्योंकि तुम तो मेरी गर्लफ्रेंड हो ना?”
कंकाल के मुंह से ऐसी बात सुनकर करिश्मा का गला सूख गया। वह और तेजी से कांपने लगी थी। तभी कमरे के बाहर दरवाजे पर खड़े गार्ड धड़धड़ाते हुए कमरे के अंदर आ गए। उनके हाथ में थमी हुई बंदूके कंकाल की तरफ घूम गई और पलक झपकते ही गोलियों का एक बड़ा भारी सैलाब कंकाल की तरफ लपका। गोलियां कंकाल से टकरा टकराकर फर्श पर गिरने लगी। लेकिन कंकाल को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा।
उल्टा उसने घूरकर उन गार्ड्स की तरफ देखा और अपना हाथ उठा दिया। गार्ड्स के हाथ की बंदूके उनके हाथ से निकलकर उल्टा उनकी ही और तन गई और कंकाल के एक ही इशारे पर गोलियों का गुब्बार उन पांचों गार्ड्स की खोपड़ियां खोलता चला गया।
इसी बीच बॉस ने मौका पाकर वहां से भागने की कोशिश की। लेकिन तभी कंकाल में उसकी एक टांग पकड़कर उसे बड़ी तेजी से घूमाकर फर्श पर पटक दिया। बॉस का सिर किसी तरबूज की तरह फट गया। उसका यह हाल देखकर करिश्मा फफक फफक कर रोने लगी।
“मुझे जाने दो प्लीज! मुझे छोड़ दो! मैंने कुछ नहीं किया। मुझे माफ कर दो।”
लेकिन ऐसा लगा जैसे उस कंकाल को कुछ सुनाई ही ना दिया हो। वह करिश्मा की तरफ बढ़ा। उसने उसकी गर्दन अपने पंजे में दबोच ली और एक जोर का झटका दिया। करिश्मा की गर्दन चटाक की आवाज के साथ टूट गई और इसी के साथ कंकाल बाहर निकलता चला गया।
कुछ देर बाद वही कंकाल एक श्मशान में बैठा हुआ था।
“मैं आज इस शमशान की सौगंध खाकर कहता हूं कि मेरे रहते कोई किसी निर्दोष इंसान को तंग नहीं कर पाएगा।”
उसके इतना कहते ही ऐसा लगा जैसे शमशान घाट में बवंडर आ गया हो। तेज हवाएं चलने लगी। पेड़ पौधे बड़ी तेजी से हिलने लगे और आसमान में घने बादल मंडराने लगे। इसी के साथ तेज आवाज में बिजलियां कड़कने लगी।
क्रमशः-
भाग 9
“अब कहाँ जा रही हो बेटी, अभी-अभी तो आई थी बाहर से ही, फिर दोबारा कहाँ चल पड़ी।” मोनिका की माँ ने मोनिका को घर से बाहर निकलते देखकर आवाज लगाई।
“मॉम, मुझे मार्केट में कुछ काम है, मैं बस कुछ देर में आई ज्यादा टाइम नहीं लगेगा।” कहते हुए उसने अपनी रॉयल एनफील्ड निकाली और उस पर सवार हो गई। रॉयल एनफील्ड पर सवार होने के बाद उसे किसी चीज का होश नहीं रहता था।
धड़ाधड़ाती हुई उसकी बाइक तेजी से बाहर निकलती चली गई। उसकी माँ ने उसे देखते हुए अपना सिर हिलाया।
“बड़ी मूडी लड़की है, इसके मूड का कुछ पता नहीं चलता।” कहते हुए वह वापस किचन में चली गई।
उधर मोनिका तेजी से मार्केट की तरफ बढ़ रही थी। उसके खुले हुए बाल तेज हवा के झोंके से लहरा रहे थे। आँखों पर ब्लैक रंग के गोगल्स चढ़े हुए थे और चेहरे पर भरपूर कॉन्फिडेंस के साथ एटीट्यूड की झलक दिखाई दे रही थी। जिसकी नजर उस पर पड़ती, वह उसे देखता ही रह जाता।
अभी इस समय मोनिका मार्केट में इंटर हुई ही थी कि तभी तेज हवाएँ चलने लगी। हवा की गति इतनी तेज थी कि मोनिका को अपनी बुलेट रोकनी पड़ी। उसने आसमान में देखा, आसमान बिल्कुल साफ था, आसपास नजर दौड़ाई, मौसम बिगड़ने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे थे, लेकिन हवा फिर भी पूरी गति से चल रही थी।
“यह अचानक क्या हो रहा है, ना तो मौसम बिगड़ा हुआ है, और ना ही कोई खास बात दिखाई दे रही है, फिर भी इतनी तेज हवाओं के चलने का क्या रहस्य है?”
अभी वह सोच ही रही थी कि तभी उसकी आँखें हैरानी से चौड़ी होती चली गईं। उसके सामने का नजारा एकदम से बदलने लगा था। बड़ी-बड़ी दुकानों की जगह बड़ी-बड़ी कब्रें बनने लगी।
उसने हैरानी से चारों तरफ देखा, कुछ ही देर में पूरा अच्छा भला मार्केट कब्रिस्तान में तब्दील हो चुका था। मोनिका की रॉयल एनफील्ड अभी भी अपनी जगह पर खड़ी थी लेकिन उसके चारों तरफ कब्रें ही कब्रें थी।
“यह क्या हो रहा है मेरे साथ?” मोनिका ने हैरानी से अपने आसपास देखते हुए कहा।
वह अपनी बाइक के पास आई और अभी वह बाइक स्टार्ट करने वाली ही थी कि तभी अचानक ऐसा लगा जैसे पूरा कब्रिस्तान हिलने लगा हो। कब्रिस्तान वाकई हिल रहा था। मोनिका ने गौर से देखा तो कब्रिस्तान में मौजूद कब्रें तेजी से काँप रही थी। अभी वह कुछ समझ भी नहीं पाई थी कि तभी एक जोर का धमाका हुआ और धमाके के साथ ही कब्रिस्तान में मौजूद एक एक करके सभी कब्र फटने लगी।
मोनिका हैरान परेशान यह सब होता हुआ देख रही थी। कुछ ही देर में कब्रों में से मुर्दे उठ उठकर खड़े होने लगे।
हड़बड़ाई सी मोनिका कब्र से निकले हुए मुर्दों के बीच खड़ी थी। वह मुर्दे तेजी से उसकी तरफ बढ़ते चले आ रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वे जोम्बी हों।
लटकते हुए सड़े गले माँस के लोथड़े उन मुर्दों के शरीर से जगह-जगह से कट कट गिर रहे थे। चारों तरफ भयानक दुर्गंध फैल चुकी थी। उनकी जलती हुई आँखें मोनिका पर ही टिकी हुई थी। वे पूरी रफ्तार से उसकी तरफ बढ़ रहे थे।
“यह तो बहुत भयानक दिख रहे हैं, और ऐसा लगता है कि यह जल्दी ही मुझे भी अपनी तरह का जोम्बी बना डालेंगे, अगर मैंने कुछ नहीं किया तो आज मुझे जोंबी बनने से कोई नहीं बचा सकता।” मोनिका ने मन ही मन सोचा। उसकी आँखों में डर दिखाई देने लगा, लेकिन फिर भी उसका दिमाग तेजी से काम कर रहा था। उसने जल्दी से अपनी बाइक में फँसी हुई हॉकी निकाल ली जो वह अक्सर लफंगों की पिटाई में काम लिया करती थी।
ठीक उसी समय एक मुर्दा भयानक तरीके से उसके ऊपर झपटा, इससे पहले कि वह मोनिका तक पहुँच पाता, मोनिका का हाथ घूमा और उस मुर्दे की कनपटी के ऊपर हॉकी का जोरदार वार हुआ।
मुर्दे का सिर फट गया, चारों तरफ खून के छींटे उड़ते हुए दिखाई दिए लेकिन इसी के साथ ही और भी दर्जन भर से ज्यादा मुर्दे एक साथ मोनिका के ऊपर झपटे।
अगर तुरंत ही मोनिका ने अपने जिस्म को हवा में ऊपर तक ना उछाल दिया होता तो वह उनका शिकार जरूर बन गई होती।
ऊपर की तरफ उछलते हुए उसने एक पेड़ की डाली अपने हाथों से थाम ली और अपने शरीर को एक तेज झटका देकर दूसरी तरफ उछल गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मुर्दे अभी भी चारों तरफ से उसकी तरफ बढ़ रहे थे।
गुजरते हुए समय के साथ मुर्दे मोनिका के पास और पास आते चले जा रहे थे। मोनिका कुछ भी नहीं कर पा रही थी सिवाय अपने में ही सिमटने के। वह हॉकी इधर उधर लहरा रही थी लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा था।
जो भी मुर्दा उसके पास आता वह हॉकी से मारकर उसे उछाल देती थी लेकिन अब एक साथ पचास ज़ोंबी ठीक उस कुछ भी कदम की दूरी पर थे।
वह लगातार वार पर वार कर रही थी लेकिन अब उसकी मौत उसे अपने सामने दिखाई देने लगी थी। लेकिन वह अंत तक हार नहीं मानने वाली थी।
“मैं….मैं मरूँगी भी तो लड़ते हुए ही मरूँगी।” मोनिका ने हॉकी पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए खुद से कहा।
ठीक उसी पल चारों तरफ से चार-पाँच मुर्दे एक साथ उसके ऊपर झपटे। मोनिका को कुछ समझ ही नहीं आया कि वह इस सबसे कैसे बचे। अभी वह सोच ही रही थी कि तभी आसमान में जैसे बिजली सी चमकी। मोनिका ने अपनी आँखें बंद कर ली।
अब उसे लगने लगा था कि उसकी मौत उसके सामने थी लेकिन तभी एक हल्का सा धमाका हुआ और मोनिका को अपने जिस्म में तेज गर्मी महसूस हुई। उसने धीरे धीरे अपने आँखें खोली तो सामने का नजारा देखकर हैरान रह गई।
अभी कुछ ही देर पहले उसकी तरफ तेजी से बढ़ रहे मुर्दे यहाँ वहाँ पड़े हुए थे। उनके जिस्मों से आग की लपटे उठ रही थी। लगभग सभी मुर्दों का यही हाल था।
तभी मोनिका की नजर ठीक अपने बगल में खड़े एक अजीब से शख्स पर पड़ी तो वह दो कदम पीछे हट गई।
“डरो मत, मैं हूँ तुम्हारा मददगार!” उस इंसान की खरखारती हुई आवाज मोनिका के कानों में पड़ी तो वह हैरानी भरी नजरों से उस अजीब से शख्स की तरफ देखने लगी। वह सफ़ेद लिबास में लिपटा शख्स हड्डियों के ढाँचे की तरह नजर आ रहा था।
क्रमशः
भाग 10
“लेकिन तुम वास्तव में हो कौन? और तुमने मेरी जान क्यों बचाई?” मोनिका उस अजीब से मददगार को देखकर हैरान थी।
“मैं भी तुम्हारी तरह एक आम इंसान था, लेकिन फिर मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ, जिससे मैं आम से खास बन गया हूँ, हाँ अब मैं इंसान भी नहीं रह गया हूँ, और ना ही मैं कोई शैतान हूँ, सीधे सीधे तुम मुझे इंसान और शैतान के बीच का कांबिनेशन समझ सकती हो।” सफेद लिबास वाले उसे अजीब से शख्स ने कहा।
“मतलब? मैं कुछ समझी नहीं, आप साफ-साफ शब्दों में क्यों नहीं बताते, आपने मेरी मदद क्यों की और यह सब क्या था? यह लोग मेरे पीछे क्यों पड़े हुए थे?” मोनिका ने थोड़े सख्त लहजे में पूछा।
“इन लोगों के बारे में तो मुझे भी नहीं पता, लेकिन लगता है मुझे अपने बारे में जरूर बताना चाहिए और मुझे ऐसा भी लगता है कि इन फ्यूचर तुम्हें मेरी जरूरत पड़ेगी।” कहते हुए सफेद लिबास वाले उस इंसान ने अपनी गर्दन इधर उधर घुमाई, ऐसा लगा जैसे उन्हें जुंबिश दे रहा हो और फिर वह मोनिका की तरफ मुखातिब हुआ।
“मेरा नाम विक्की था और यह तब था जब मैं एक सामान्य इंसान हुआ करता था, अभी भी तुम मुझे विक्की के नाम से जान सकती हो, मैं एक क्लब में डांसर रहा करता था, और उस समय लोगों के बीच मेरी इतनी धूम थी कि लोग मेरी एक झलक पाने के लिए दीवाने हुआ करते थे…!” सफेद लिबास वाले के इतना बताते ही मोनिका की आँखें चौड़ी हो गई।
“मतलब आप विक्की डांसर हो? जो एक दिन अचानक गायब हो गए थे? उसके बाद उनका कोई अता पता नहीं लगा, ऐसा कैसे हो सकता है, नहीं नहीं, आप झूठ बोल रहे हो।” मोनिका ने कहा और ऊपर से नीचे तक उस सफेद लिबास वाले को देखने लगी।
“हाँ हाँ, मुझे पता था, तुम्हें मेरी बात पर भरोसा नहीं होगा, लेकिन अब तुम्हें विक्की डांसर कहीं नहीं मिलेगा..!” सफेद लिबास वाले ने कहा।
“ठीक है, अगर मैं मान भी लूँ कि आप ही विक्की डांसर हो तो फिर बताओ आप गायब क्यों हो गए? और आपके गायब होने के बाद ऐसा क्या हुआ जो आप वापस ही नहीं आए?” मोनिका के शब्दों में जिज्ञासा भरी हुई थी।
मोनिका के पूछने पर विक्की कुछ पल के लिए शांत हो गया और फिर उसने अपनी पूरी दास्तान उसे सुना डाली।
“उन लोगों ने आपको जिंदा कब्र में दफना दिया, फिर आप वहाँ से बाहर कैसे निकल आए और आपके पास ये सुपरनैचुरल पावर कैसे आई? कहीं आप कोई प्रेत तो नहीं हो?” मोनिका हैरान हुई पड़ी थी।
“मैं लगभग मरने ही वाला था, ताबूत के अंदर पड़ा हुआ मैं पूरी जी जान से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सब बेकार था, मेरे ऊपर धीरे धीरे बेहोशी छाने लगी, मेरा दम घुट रहा था, मैं बस जिंदगी और मौत के मुहाने पर खड़ा था कि तभी आकाश में एक जोर की बिजली चमकी और मुझे ऐसा लगा जैसे उन्हीं में से बिजली का एक टुकड़ा आकर मेरी कब्र पर गिरा हो, मुझे नहीं पता ऐसा कैसे हुआ, लेकिन जैसे ही बिजली मेरी कब्र से टकराई, उस समय मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे अंदर दुनिया भर की ताकत एक साथ पैबस्त हो गई हो। मुझे अपने अंदर बेशुमार ताकत महसूस होने लगी, मेरे एक ही झटके से ताबूत टूट गया और मैं कब्र के बाहर आ गया। सच बताऊँ तो उस समय किसी दैवीय शक्ति की कृपा से मेरे अंदर सुपर नैचुरल पावर का भंडार भर चुका था। यह पावर मिलते ही मैंने सबसे पहले अपने दुश्मनों का खात्मा किया और फिर मैंने इसी शमशान घाट में आकर कसम खाई कि मेरे रहते कभी कोई बेगुनाह, निर्दोष इंसान सताया नहीं जा सकेगा। मैं हर उस इंसान की सहायता करूँगा, जिसकी बेबसी का, मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा होगा, आज तुम इनके चंगुल में फँसी थी, बेबस थी, मजबूर थी, मुझे तुरंत ही पता चल गया और मैं उसी पल यहाँ आ पहुँचा।” विक्की ने अपनी पूरी कहानी बताई जिसे सुनकर मोनिका दंग रह गई।
“इसका मतलब, ड्रीम लाइट क्लब में जो कुछ भी हुआ था, वह कोई एलियन का अटैक या क्लब के मालिक के दुश्मनों की कोई चाल नहीं थी, बल्कि यह सब आपने किया था।” मोनिका की बात सुनकर विक्की मुस्कुराया।
“बताया तो, मैंने अपने दुश्मनों को बुरी तरह तड़पा कर मारा था।” विक्की के चेहरे पर किसी भी तरह के अफसोस के भाव नहीं थे।
“लेकिन यह लोग, जो अभी यहाँ मुझे जान से मारने पर तुले थे, मैंने इनका क्या बिगाड़ा भला, यह मुझे क्यों परेशान कर रहे थे?” मोनिका ने फिर से पूछा।
“यह तो मैं नहीं बता सकता। क्या तुम्हारे साथ पहले भी ऐसा कुछ हुआ था?” विक्की ने पूछा।
“नहीं, ऐसा तो कभी नहीं हुआ, लेकिन हाँ, मुझे अजीब अजीब से सपने जरूर आते रहते हैं, जो बहुत ही खतरनाक होते हैं।” मोनिका ने अपने सपनों को याद करके बताया।
“मेरे पास यह सब जानने का एक तरीका है, आओ मेरे पास आओ।” विक्की की बात सुनकर मोनिका उसके नजदीक जा पहुँची। तभी विक्की ने मोनिका के सिर पर अपना हाथ रख दिया और अपनी आँखें बंद कर लीं। आंखें बंद करते ही मोनिका ने देखा कि उसके चेहरे के हाव-भाव तेजी से बदल रहे थे।
कुछ ही देर में विक्की ने एक झटके से अपनी आँखें खोल दीं।
“मुझे यह तो नहीं पता कि तुम्हारे साथ यह सब क्यों हो रहा है, लेकिन यह सब जानने का एक जरिया हमारे पास जरूर है।” विक्की ने बताया।
“क्या?” मोनिका जानना चाहती थी।
“तुम्हें मेरे साथ चलना होगा, जब मैंने ध्यान लगाया तो मुझे एक मंदिर नजर आया और मुझे ऐसा लगता है कि उस मंदिर पर पहुँचकर ही इस घटना का राज जाना जा सकता है। आओ चलते हैं, देखें आखिर ऐसे शैतान तुम्हारे पीछे क्यों पड़े हुए हैं?” विक्की ने कहा और अपना हाथ मोनिका के सामने फैला दिया।
मोनिका ने एक पल सोचा और फिर अपना हाथ विक्की के हाथों में दे दिया। विक्की ने मुस्कुरा कर अपनी आँखें बंद की, मोनिका ने भी वही किया और जैसे ही दोनों ने आँखें बंद की, ऐसा लगा जैसे वे हवा में उड़ने लगे हों, कुछ सेकेंड बाद ही मोनिका को ऐसा लगा जैसे उसके पैर वापस जमीन पर आकर पड़ गए हो। उसने एक झटके में अपनी आँखें खोल दीं और आँखें खोलते ही सामने का नजारा देखकर वह दंग रह गई। जबकि विक्की के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे।
क्रमशः
भाग 11
“यह मन्दिर तो बहुत पुराना और बहुत बड़ा लग रहा है।” मोनिका ने सामने खड़े उस सदियों पुराने मन्दिर को देखते हुए कहा।
“हाँ, यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और इसमें जो मूर्तियां और दूसरी चीजें मौजूद हैं वह बहुत ही प्राचीन समय की हैं, इस मंदिर को किसने बनाया और किसने यहां उन चीजों को जमा किया यह रहस्य कोई भी अभी तक नहीं जान पाया है, हां इतना जरूर मालूम है कि इस मंदिर के निर्माता संस्कृत के प्रकांड ज्ञाता और बहुत बड़े आर्कियोलॉजिस्ट थे, इसका अंदाजा तुम इसी बात से लगा सकती हो कि उनके पास और क्या क्या हो सकता है। मैंने तो यह भी सुना था कि उनका यहाँ कहीं एक मिनी म्यूजियम भी था, जिसमें उन्होंने कई सारी कीमती और रेयर चीजें इकट्ठा कर रखी थी, खैर इसके बारे में हम बाद में बात करेंगे, अभी सबसे पहले हम मंदिर में चलते हैं, हमें देखना है कि आखिर यहां का असली रहस्य क्या है।” विक्की ने कहा तो मोनिका हैरानी से उसे देखती ही रह गयी।
जबकि विक्की मंदिर के अंदर इंटर होता चला गया और उसी के पीछे पीछे मोनिका भी मंदिर के अंदर घुसती चली गई। वह मंदिर के अंदर जाकर ओर भी ज्यादा सरप्राइज हो उठे।
उस बड़े से मंदिर में अलग अलग सेक्शन बने हुए थे। उन सेक्शन में अलग अलग तरह की मूर्तियाँ और किताबें रखी हुई थी। किसी सेक्शन में धर्म से संबंधित किताबें थी तो किसी में इतिहास से संबंधित, किसी में चिकित्सा तो किसी में ज्ञान विज्ञान, एक सेक्शन ऐसा था जहाँ पर सिर्फ ओर सिर्फ धार्मिक किताबें ही रखी हुई थी, और उससे संबंधित कुछ रेयर चीजें भी रखी हुई थी, मोनिका तुरंत ही आगे बढ़ी और उसने वहां रखी चीजों को उलटना पलटना शुरू कर दिया।
“ये मंदिर कम म्यूजियम ज्यादा लग रहा है।” उसने कहा।
“यह तो किसी शैतान का मुखौटे जैसा लग रहा है!” विक्की की नजर किसी चीज पर गयी तो वह चौंक उठा।
मोनिका ने जब उस तरफ देखा तो वह भी चौंक गई, “इस तरह का मुखौटा तो मुझे अपने सपने में भी दिखाई देता है और शैतान के मुखौटे का इस मंदिर में क्या काम?”
“इस मुखौटे के पीछे आखिर क्या राज छुपा है और यह मुखौटा बार बार तुम्हारे सपने में क्यों दिखाई दे रहा है?” विक्की भी सोच में डूब गया।
“यह बात ना पहले मेरी समझ में आई और ना अब आ रही है।” मोनिका ने कहा।
ठीक तभी एक हल्का सा धमाके जैसा कुछ हुआ तो दोनों चौंक उठे।
उन्होंने उस तरफ देखा जहां से यह आवाज आई थी, मंदिर के बाहर एक बड़ा सा पीपल का पेड़ था और पेड़ की मोटी सी डाली की तरफ से ही वह आवाज आई थी। उस तरफ नजर पड़ते ही एक बार फिर दोनों चौंक उठे।
सामने पेड़ की डाली पर एक प्रेत उल्टा लटका हुआ था। वह जाने क्या बड़बड़ा रहा था। उसको वहां पर देख कर दोनों हैरान रह गये।
इससे पहले कि वे उससे कोई सवाल जवाब करते, उनके कुछ बोलने से पहले ही वह बोल उठा।
“जाने कितने समय से मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था, आखिर में तुम आ ही गए, एक बहुत जरूरी काम है, जिसे पूरा करने में हमें तुम्हारी जरूरत पड़ेगी विक्की।”
उस प्रेत के मुंह से अपना नाम सुनकर विक्की को जैसे एक झटका सा लगा। उसने बहुत याद करने की कोशिश की लेकिन उस प्रेत से वह पहले कब मिला था, उसे याद नहीं आया।
विक्की अपने दिमाग पर जोर डालते हुए बोल उठा, ” तुमसे पहले भी मैं ना जाने कितने प्रेतों से मिला हूं, लेकिन जहां तक मुझे याद है मैं पहले तुमसे कभी नहीं मिला, तुम मुझे कैसे जानते हो?”
प्रेत एक बार फिर मुस्कुराया और बोला, “मैं सिर्फ तुम्हारा नाम ही नहीं बल्कि तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जानता हूं।”
“क्या..क्या जानते हो तुम मेरे बारे में? और फिर मेरी समझ में यह भी नहीं आ रहा कि तुम मुझे क्यों ढूंढ रहे थे? तुम मेरा इंतजार क्यों कर रहे थे?” विक्की ने पूछा।
“तुम्हारी सारी जिज्ञासाओं का उत्तर तुम्हें मिलेगा लेकिन उससे पहले मेरी बात सुनो।”
उसकी बात सुनकर दोनों हैरानी से एक दूसरे को देखने लगे।
“मुझे श्राप मिला है कि जब तक मैं कोई अच्छा काम नहीं करूंगा, तब तक मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी और मैं बस इसीलिए तुम्हारा इंतजार कर रहा था, क्योंकि मुझे पता है कि तुम अच्छे काम करते हो और मैं तुम्हारे उस काम में मदद करके अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता हूं।” प्रेत ने कहा।
उन दोनों के अभी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह दोनों कभी एक दूसरे का तो कभी प्रेत का मुँह देख रहे थे।
“तुम इतने बेसब्र हो रहे हो तो चलो मैं तुम्हें बता ही देता हूं, ध्यान से सुनो, मोनिका के सपने का राज एक प्राचीन कहानी से जुड़ा हुआ है, और इसका जन्म भी खास उद्देश्य के लिए हुआ है।”
प्रेत के इतना कहते ही एक बार फिर दोनों हैरान रह गए। सबसे ज्यादा हैरानी तो मोनिका को हो रही थी।
प्रेत ने बताना शुरू किया– “यह प्राचीन समय की बात है, उस समय देवों और दैत्यों में भयंकर युद्ध छिड़ा हुआ था। चारों तरफ रक्तपात के साथ भयानक हाहाकार मचा हुआ था।
हिमालय पर्वत की तलहटी में घनघोर जंगल के बीचों बीच अपने एक पैर पर खड़ा हुआ दैत्यराज अंगोरा भयानक तपस्या में लीन था।
“ ॐ नमो नारायण!”
उसकी खतरनाक तपस्या की वजह से आसपास का वातावरण काफी नेगेटिव होना शुरू हो चुका था। उसके शरीर से ऐसी नेगेटिविटी निकल रही थी, जिससे आसपास के पेड़ पौधे जीव जन्तु मरने लगे थे।
आसमान में उड़ते हुए पक्षी गिर गिर कर मर रहे थे। उस दैत्य को कोई रोकने वाला कोई नहीं था।
उसकी तपस्या की वजह से ही चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था। उसकी तपस्या अब अपने चरम पर थी कि तभी वातावरण में एक बहुत ही प्रभावशाली आवाज गूंज उठी-
“रुक जाओ दैत्य राज, रुक जाओ। बस करो।”
वो आवाज इतनी प्रभावशाली थी कि अचानक ही अंगोरा की आंखें खुल गई। उस राक्षस की आंखें देख ऐसा लग रहा था जैसे वो आग उगल रही हो, काले रंग का वह दैत्य बहुत ही भयानक दिखाई दे रहा था।
उसने अपने सामने प्रकट हुई शख्सियत को घूर कर देखा ,फिर अचानक ही उसके चेहरे पर मुस्कान खिल गई।
क्रमशः-
भाग 12
अंगोरा ने मुस्कुराते हुए सामने देखा। सामने साक्षात श्रीहरि विष्णु खड़े मुस्कुरा रहे थे।
“मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूँ अंगोरा, माँगो तुम्हें क्या वरदान चाहिए?” श्रीहरि ने कहा।
“अगर सचमुच आप मेरी तपस्या से प्रसन्न हैं तो मुझे अमरता का वरदान दीजिए, त्रिलोक की किसी भी शक्ति से मेरी मृत्यु संभव न हो।” अंगोरा ने अपनी इच्छा रख दी।
श्रीहरि उसकी ये बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोल उठे, “अंगोरा, हालांकि मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूं लेकिन जो वरदान तुम मांग रहे हो वह असंभव है, मृत्यु तो हर उस जीव की होनी निश्चित है जिसने जन्म लिया है, स्वयं अवतार लेने वाले ईश्वर भी मृत्यु को प्राप्त होते हैं, इसलिए अमरता का वरदान असंभव है, किसी न किसी के हाथों तो एक दिन तुम्हारी मृत्यु होनी ही है, इसलिए कुछ और मांग लो।”
श्रीहरि की बात सुन कर अंगोरा कुछ पल के लिए सोच में पड़ गया। कुछ देर सोचने के बाद एक बार फिर उसके चेहरे पर चमक दिखाई देने लगी।
वह फिर से बोल पड़ा, “तो ठीक है, मेरी मृत्यु सिर्फ ऐसे व्यक्ति के हाथों हो, जिसने मेरे वंश में ही जन्म लिया हो या फिर मेरे किसी वंशज की मदद से ही कोई मुझे मार पाए।”
अंगोरा की बात सुन कर श्रीहरि ने मुस्कुराते हुए उसे वरदान दे दिया, “तथास्तु! ऐसा ही हो! अगर तुम्हें कोई मार भी देगा तो तुम दोबारा जीवित हो उठोगे, तुम्हारे वंशजों की मदद के बिना इस संसार की कोई भी शक्ति तुम्हारा विनाश नहीं कर सकेगी।”
इतना कहने के बाद श्रीहरि तुरंत अंतर्ध्यान हो गए और अंगोरा जोर जोर से ठहाके लगने लगा।
वह हँसते हुए बोला – “श्रीहरि नारायण की बुद्धि भी सठिया गई है, मेरे वंशज मेरे जैसे शक्तिशाली और और वरदान प्राप्त राजा को क्यों मारना चाहेंगे। वैसे भी मैं किसी को इतना शक्तिशाली होने ही नहीं दूंगा जो मुझे खत्म कर सके। हा हा हा!”
ठहाके लगाता हुआ अंगोरा अपने नगर जा पहुंचा। उस दिन उसके राज्य में शानदार उत्सव मनाया गया। ठीक दूसरे ही दिन अंगोरा ने अपनी विशाल सेना तैयार की और पृथ्वी लोक के शक्तिशाली राजाओं पर आक्रमण कर दिया।
देखते ही देखते पृथ्वी लोक पर चारों तरफ हाहाकार मच गया। जहां तक नजर जा रही थी वहां तक लाशें ही लाशें और खून की नदियां बहती हुई दिखाई दे रही थी।
जल्द ही अंगोरा का पूरे पृथ्वी लोक पर अधिकार हो गया।
अंगोरा अपने सेनापति विध्वंसक राज से कहा, “हमने पृथ्वी लोक के समस्त राजाओं को हरा दिया है, अब हमें देवलोक पर विजय प्राप्त करनी है, इसके लिए विशेष तैयारी का जिम्मा मैं तुम्हें सौंप रहा हूं, जल्द से जल्द देव लोक पर चढ़ाई करो।”
अंगोरा की बात सुन कर उसका सेनापति विध्वंसक राज तुरंत तैयारी में लग गया। अब अंगोरा की विशालकाय सेना देवलोक पर आक्रमण के लिए आगे बढ़ रही थी।
जल्द ही देवताओं और राक्षसों की सेना आमने सामने डट कर खड़ी थी। देवराज इंद्र गुस्से भरी नजरों से अंगोरा को घूर रहे थे।
देवराज इंद्र दहाड़ उठे, “अंगोरा, वापस अपने लोक लौट जा वरना सेना सहित मारा जाएगा।”
अंगोरा ने जोर का ठहाका लगाया और हँसते हुए बोल उठा, “बहुत बड़ी गलतफहमी का शिकार हो देवराज, अब तेरे स्वर्ग की गद्दी पर मेरा कब्जा होगा और तू मेरी गुलामी करेगा क्योंकि तूने तो अमृत पी रखा है इसलिए मेरे साथ साथ तू भी अमर है।”
देवराज इंद्र के चेहरे पर गुस्से के भाव पहले से भी ज्यादा साफ दिखाई दे रहे थे।
“मूर्ख दैत्य! लगता है तेरी मौत तुझे यहां तक खींच लाई है, अब तू सेना सहित मेरे हाथों मारा जाएगा।”
कहने के साथ इंद्र ने हवा में अपना हाथ ऊपर उठाया तो भयानक रूप से बिजली चमक उठी, इसी के साथ आकाश में बादल इधर उधर ऐसे भागने लगे मानो तबाही आने वाली हो। एक तेज चमक और गर्जना के साथ इंद्र का वज्र उनके हाथ में आ गया। उधर दूसरी तरफ अंगोरा यह सब देख कर मुस्कुराए जा रहा था। वह अपनी जगह से जरा सा भी नहीं हिला।
मारे गुस्से के काँपते हुए इंद्र ने वज्र का प्रहार अंगोरा के ऊपर किया। वज्र सीधा अंगोरा के सिर के ऊपर लगा, जिससे वह खड़े खड़े दो टुकड़ों में बट गया। पूरी राक्षसी सेना में एक पल के लिए शांति छा गई। दूसरे ही पल चारों तरफ हाहाकर मच गया।
उधर देवताओं की सेना में खुशी की लहर दौड़ गई क्योंकि युद्ध शुरू होने के पहले ही उन्होंने बाजी मार ली थी लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिकने पाई। इससे पहले कि कोई कुछ करता या समझ पाता वातावरण में एक तेज ठहाका गूँज उठा।
“हा हा हा हा हा! मैं अमर हूँ देवराज, मैं अमर हूँ! मुझे कोई नहीं मार सकता! त्रिलोक में ऐसा कोई पैदा ही नहीं हुआ है जो मुझे खत्म कर सके!”
सभी ने हैरानी से आवाज की दिशा में देखा तो अंगोरा वापस सही सलामत खड़ा जोर जोर से हँस रहा था। उसकी सेना में एक बार फिर जोश भर आया। दूसरी तरफ देवताओं की सेना अंदर ही अंदर जैसे डर चुकी थी, अंगोरा का इशारा पाते ही उसकी सेना ने देवलोक की सेना पर आक्रमण कर दिया। दोनों सेनाओ में भयानक युद्ध छिड़ गया। देवताओं की सेना पहले से ही डरी हुई थी, इसलिए उनके प्रहार भी कमजोर पड़ रहे थे। इधर देवराज इंद्र जितनी भी बार वज्र का प्रहार करके अंगोरा को मारने की कोशिश करते वह उतनी ही बार सही सलामत जीवित हो उठता।
“बहुत हो गया देवराज इंद्र! अब मेरे प्रहार सहन कर!” अंगोरा का चेहरा गुस्से से विकृत हो चुका था। उसने देवराज इंद्र पर आक्रमण कर दिया। देवराज इंद्र और अंगोरा में भयानक युद्ध होने लगा। दोनों में से कोई भी कम नहीं पड़ रहा था लेकिन अंगोरा की अजीब सी शक्ति के आगे देवराज इंद्र धीरे धीरे मानसिक रूप से कमजोर पड़ने लगे और इसी का फायदा अंगोरा ने उठाया।
उधर सेना में भयानक मार काट मची हुई थी। कुछ ही पलों में चारों तरफ हाहाकार मच गया। देवताओं की सेना मैदान छोड़ कर भागने लगी।
आखिरकार इंद्र भी अपना लोक छोड़ कर वहां से भाग छूटे। अब पूरी अमरावती अंगोरा के अधीन थी। बहुत ही शान से चलता हुआ अंगोरा इंद्र के सिंहासन पर जा बैठा।
वह पागलों की तरह हँसने लगा, “मेरा !..अब इंद्र का सिंहासन मेरा हुआ! हा हा हा!”
सिंहासन पर बैठते ही उसके इशारे पर देवलोक की अप्सराएं डरते डरते उसके सामने नृत्य करने लगी और उधर देवता गण मारे मारे तीनों लोकों में घूम रहे थे। उधर तीनों लोकों में भटकते हुए देवता श्री हरि के पास जा पहुँचे।
उस समय श्री हरि निद्रा में निमग्न थे और माता महालक्ष्मी उनके चरण दबा रही थी।
क्रमशः
भाग 13
वैकुंठ में भगवान श्री हरि शेषशैया पर निद्रा में निमग्न थे और माता महालक्ष्मी उनके चरण दबा रही थीं।
देवताओं ने एक साथ मिलकर भगवान की स्तुति करनी आरंभ कर दी। जैसे जैसे देवता गण श्री हरि की स्तुति करते जा रहे थे, वैसे वैसे श्री हरि के चेहरे के भाव बिगड़ते जा रहे थे हालांकि उनकी आंखें अभी भी बंद थी और वे अभी भी ध्यान की मुद्रा में ही बैठे हुए थे।
जैसे ही स्तुति अपने चरम पर पहुंची, भगवान विष्णु की आंखें एक झटके में खुल गई। उनकी आंखों में क्रोध साफ साफ दिखाई दे रहा था। भगवान हरि को क्रोधित देखकर देवता गण थर थर काँपने लगे।
ठीक तभी वहाँ देवताओं के गुरु बृहस्पति आगे आए। वे विनम्रता से बोले, “हे पालनहार! हम पर कृपा कीजिए, हम सभी देवता आपकी शरण में आए हैं। हम आपके ध्यान में विघ्न डालने के लिए क्षमाप्रार्थी है। आप ही हम सबको इस भयानक विपत्ति से निकाल सकते है।”
देवगुरु बृहस्पति की बात सुनकर भगवान विष्णु का गुस्सा धीरे धीरे कम होने लगा। उन्होंने गौर से बृहस्पति देव की बात सुनी और बोले, “आखिर ऐसी कौन सी विपत्ति आन पड़ी, जो आप सभी को एक साथ मेरे पास आना पड़ा।”
श्री हरि का सवाल सुनकर बृहस्पति देव ने सारा घटनाक्रम शुरू से अंत तक उन्हें कह सुनाया।
अंगोरा के दुस्साहस के बारे में सुनकर श्री हरि की आंखों में एक बार फिर क्रोध की ज्वाला दिखाई देने लगी। उन्हें पहले ही आभास था कि आगे जाकर अंगोरा उनके वरदान का दुर्पयोग जरूर करेगा।
वे गुस्से में अपने आसन से उठ खड़े हुए। कुछ पल के लिए उन्होंने शुन्य में नज़रें टिकाई और फिर कुछ ही देर में वहां से अंतर्ध्यान हो गए।
बृहस्पति देव के साथ साथ सभी देवता आश्चर्य में डूबे हुए एक दूसरे का मुंह देख रहे थे, लेकिन अब श्री हरि के आसन पर कोई नहीं था और उन्हें यह बताने वाला भी वहां कोई नहीं था कि वे अचानक कहां अंतर्ध्यान हो गए थे।
****
उधर दूसरी तरफ देवराज इंद्र के आसन पर बैठा हुआ अंगोरा पूरी तरह से विलास में डूबा हुआ था। उसके सामने अप्सराएं नाच रही थी। उसके हाथों में मदिरे की प्याला थमा हुआ था और आंखें हल्की हल्की लाल हो चुकी थी। उसी के साथ साथ उसके अनुयायी भी भोग विलास में डूबे हुए थे।
ठीक उसी समय इंद्र के दरबार के बाहर एक तेज प्रकाश पूँज प्रकट हुआ, जो धीरे-धीरे एक आकृति में परिवर्तित होने लगा। जल्द ही वहां पर भगवान श्री हरि दिखाई देने लगे। उन्होंने इंद्र के दरबार की तरफ नजर डाली।
और फिर मन ही मन सोचा, “अपने ही दिए वरदान की वजह से मैं इसका अंत तो नहीं कर सकता लेकिन इसे कैद जरूर किया जा सकता है, इसे कैद करने के लिए मुझे इस अंगोरा को एक विशेष स्थान पर ले जाना होगा लेकिन कैसे? अगर मैं प्रत्यक्ष रूप से इसे यहां से ले जाने की कोशिश करूंगा तो ये काफी बाधाएं उत्पन्न करेगा, मुझे कोई और तरीका सोचना होगा।”
सोचने के साथ भगवान विष्णु ने अंगोरा के उस विलास भवन की तरफ देखा और वापस अंतर्ध्यान हो गए। वहां पर दोबारा एक प्रकाश पूँज प्रकट हुआ, इस बार वहां श्री हरि नहीं बल्कि एक बहुत ही सुंदर अप्सरा प्रकट हुई थी। इस अप्सरा के सामने स्वर्ग की बाकी अप्सराएं भी फिकी लग रही थी। वह नारी धीरे धीरे अंगोरा की सभा की तरफ आगे बढ़ने लगी। जैसे ही वह सभा के द्वार पर पहुंची, अंगोरा की नजरें उसी पर आकर जम गई। अप्सरा की सुंदरता देख उसकी आंखें जुगनूओं की तरफ चमक उठी। वह उस अप्सरा को देखता ही रह गया।
वह अपने सेनापति विध्वंसक राज से बोल उठा, “सेनापति विध्वंसक, यह स्त्री तो इन स्वर्ग की अप्सराओं से भी कई गुना अधिक सुंदर दिखाई दे रही है, इस अप्सरा को तो मेरी सेवा में होना ही चाहिए, पता करो यह कौन है और इसे मेरे पास लेकर आओ।”
इससे पहले कि सेनापति आगे बढ़ता, दैत्यों ने देखा कि वह सुंदर अप्सरा मदमस्त चाल से चलती हुई खुद ही अंगोरा के सिंहासन की तरफ आगे बढ़ने लगी। जल्दी ही वह अंगोरा के सिंहासन के पास मौजूद थी, वह अपनी अदाओं से अंगोरा को सम्मोहित करने की कोशिश करने लगी थी और अंगोरा भी जैसे उस अप्सरा की अदाओं से पागल होते जा रहा था।
उस अप्सरा के कंटीले नैन नक्श अंगोरा को जैसे अपने काबू में कर चुके थे। अंगोरा अपने सिंहासन से उठ खड़ा हुआ। उसने उस सुंदर अप्सरा को अपनी बाहों में जकड़ना चाहा लेकिन वह अप्सरा तुरंत उससे छींटक कर दूर हो गई, उसकी इस अदा पर जैसे अंगोरा ओर भी ज्यादा मोहित हो गया। अप्सरा बड़ी अदा से मुस्कुरा उठी। उसकी मुस्कान देखकर अंगोरा सबकुछ भूलकर उसकी तरफ कदम बढ़ाने लगा।
उसने एक बार फिर से उस सुंदरी को पकड़ना चाहा लेकिन जैसे जैसे वह उस अप्सरा को पकड़ने के लिए आगे बढ़ रहा था, वैसे वैसे वह अप्सरा आगे की तरफ भागती जा रही थी, जल्दी ही वह अप्सरा तीनों लोकों का चक्कर लगवाती हुई अंगोरा को लेकर पृथ्वी लोक पर आ पहुंची।
अंगोरा उसकी सुंदरता पर इतना मोहित हो गया था कि उसे इस बात की परवाह ही नहीं थी कि वह अप्सरा उसे कहां ले जा रही है। अचानक एक रहस्यमयी स्थान के पास आकर वह अप्सरा एकाएक रुक गई।
उसे रुकते देख अंगोरा मुस्कुराते हुए बोल उठा, “सुंदरी, तुमने तो मुझे तीनों लोगों की परिक्रमा करवा दी, आखिर तुम हो कौन? अगर तुम कहोगी तो मैं तुम्हारे लिए तीनों लोकों को त्याग दूंगा, अपने प्राणों की आहुति तक दे दूंगा, बस एक बार मेरी बाहों में आ जाओ।”
कहने के साथ उसने अपनी बांहें फैला दी लेकिन वह अप्सरा एक बार फिर अपनी जगह से हटी और मुस्कुराती हुई उस रहस्यमय स्थान के पिछले हिस्से की तरफ बढ़ गई।
पिछले हिस्से में एक दरवाजा था जिसे खोलकर वह अप्सरा अंदर समाती चली गई। यह देख कर अंगोरा के चेहरे पर मुस्कान आ गई, वह भी उसके पीछे पीछे दरवाजे के अंदर घुसता चला गया, बिना इस बात की परवाह किए कि अब यहीं से उसके दुर्दिन शुरू होने वाले थे। कहा भी जाता है, “विनाश काले विपरीत बुद्धि!”
क्रमशः
भाग 14
श्री हरि के वरदान के बल पर अपने आपको अपराजित कर देने वाला अंगोरा इस समय एक अति सुंदर अप्सरा के पीछे ठीक वैसे ही जा रहा था जैसे गाय अपने मालिक के पीछे जाती है, उस सुंदरी के हाव भावों ने अंगोरा के सोचने समझने की शक्ति छीन ली थी, अगर ऐसा ना होता तो उसके पीछे सम्मोहित सा बढ़ता अंगोरा जरूर समझ जाता कि उसे किसी जाल में फंसाया जा रहा है। लेकिन विनाश काले विपरीत बुद्धि।
जैसे ही अंगोरा उस सुंदर अप्सरा के साथ दरवाजे के अंदर दाखिल हुआ। अप्सरा कमरे के एक कोने में जाकर ठहर गई, वह घूम कर मुस्कुराते हुए अंगोरा को देख रही थी। वासना में अंधा हुआ दैत्यराज अंगोरा तेजी से अप्सरा की तरफ आगे बढ़ने लगा। उसने उसे अपनी बाहों में भर लेना चाहा।
“तीनों लोको का भ्रमण करवाकर आखिर तुम मुझे पृथ्वी लोक पर क्यों लाई, मुझे लगता है तुम्हें पृथ्वी लोक बहुत ज्यादा प्रिय है। कोई बात नहीं, बस एक बार मेरे आलिंगन में आ जाओ, मैं तुम्हें जिस लोक का कहोगी, उस लोक की स्वामिनी बना दूंगा।”
अंगोरा मुस्कुराते हुए बोला तो जवाब में अप्सरा सिर्फ मोहक अंदाज में मुस्कुराई और उसके मुस्कुराने ने मानो अंगोरा के सीने को चाक कर डाला।
वह मस्ती भरे अंदाज में मचलकर बोला, “तुम्हारी यह मनमोहक हँसी सीने में एकदम तीर की तरह प्रवेश कर जाती है.. ओफ्फ अब नहीं रहा जाता तुम्हारे बिना।”
अप्सरा को अपनी बाहों में भरने के लिए मचल उठा अंगोरा तेजी से उस अप्सरा की तरफ आगे बढ़ा, उसकी बाहें खुली हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह सीधे उस अप्सरा को अपनी बाहों में भर लेगा, उसकी नजर अभी तक उस अप्सरा के चेहरे पर नहीं गई थी या फिर वह जानबूझ कर उसकी आंखों को देखने से बच रहा था, उस अप्सरा की आंखों में अब भयंकर ज्वाला दिखाई दे रही थी।
जैसे ही वह अप्सरा के नजदीक पहुंचा, एक शक्तिशाली लात उसके सीने पर पड़ी तो वह उछल कर कमरे की पिछली दीवार से जा टकराया। पलक झपकते ही उसका प्रेम का सारा नशा छूमंतर हो गया।
उसने आंखें फाड़ कर अपने सामने देखा तो हैरान रह गया। उसके सामने अब सुंदर अप्सरा नहीं बल्कि कोई ओर ही खड़े थे और वे कोई और नहीं श्री हरि ही थे।
भगवान श्री हरि बोल उठे, “ अब तेरा अंत समय आ गया है दैत्यराज, अपने अंत के लिए तैयार हो जा।”
बेहद गंभीर और भयावह आवाज उस कमरे में फैल गई। अंगोरा उठ कर खड़ा हो गया। उसके सामने साक्षात भगवान हरि सुदर्शन चक्र लेकर खड़े थे। एक पल के लिए अंगोरा की हैरानी का ठिकाना ना रहा। लेकिन अगले ही पल वह ठहाके लगाकर हँसने लगा।
वह हँसते हुए बोल उठा, “हा हा हा! लगता है कि तुम्हारी अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं इसीलिए मेरे अंत का सपना देख रहे हो। मुझे भरोसा नहीं हो रहा है कि तुम इतनी जल्दी भूल गए कि तुमने ही मुझे अमरता का वरदान दिया है। मुझे मेरे वंशज के सिवा कोई नहीं मार सकता। मैं अमर हूँ। मेरे अंत का सपना देखने वाले सपना ही देखते रह जाएंगे! हा हा हा हा।”
जैसे ही अंगोरा ने ऐसा कहा, भगवान श्री हरि का चेहरा गुस्से के मारे तमतमा उठा। उनके हाथ में थमा हुआ सुदर्शन चक्र पूरी रफ्तार से घूमने लगा। ऐसा लगा जैसे कुछ ही पलों में अंगोरा का मस्तक काट डालेगा। धीरे धीरे आसपास की जगह जैसे काँपनी शुरू हो गई। यह कँपन बढ़ते हुए धीरे धीरे तेज होने लगा, धरती डांवाडोल होने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे आसमान नीचे और धरती ऊपर हो जाएगी। आसपास की चीजें इधर उधर गिरने पड़ने लगी।
यहां तक की अंगोरा भी खड़ा नहीं रह सका, जबकि भगवान श्री हरि अभी भी अपनी जगह पर डटकर खड़े थे।
तभी अचानक उनके हाथों से सुदर्शन चक्र अंगोरा की तरफ लपका और अंगोरा से कुछ कदम दूरी पर ही रुक गया। अगले ही पल सुदर्शन चक्र से एक तेज ज्वाला निकली और अंगोरा की तरफ भयानक ढंग से लपकी।
आग की लपटे जैसे ही स्पर्श हुईं, अंगोरा चीख उठा। उसकी वेदना भरी चीख से वातावरण हिल गया।
आssssहह
पलक झपकते ही अंगोरा राख के ढेर में तब्दील हो गया। जलती हुई आँखों से श्री हरि अभी भी अंगोरा को घूर रहे थे।
आखिर में भगवान श्री हरि धीरे धीरे शांत होने लगे। सुदर्शन चक्र वापस श्रीहरि के हाथों में शोभायमान हो गया।
भगवान श्री हरि बोले, “मुझे भी पता है कि तू अपने वंशज के सिवा किसी के हाथों मृत्यु को प्राप्त नहीं होगा लेकिन मैं तुझे मारने नहीं बल्कि यहां कैद करने के लिए लाया हूँ। अब जब तक तेरा कोई वंशज यहां आकर तुझे खत्म नहीं कर देता। तब तक तू यही कैद रहेगा।”
कहने के साथ भगवान श्री हरि उस दरवाजे से बाहर की तरफ निकलने लगे और जैसे जैसे वो बाहर निकल रहे थे। वैसे वैसे कमरे के अंदर की राख वापस आकार लेती जा रही थी।
जल्द ही अंगोरा वापस अपने पहले वाले रूप में कमरे के अंदर खड़ा था। वह श्री हरि को कमरे से बाहर निकलते हुए देख रहा था।
वह हँसते हुए बोला, “ हा हा हा हा, विष्णु, तुम तो बिल्कुल मूर्ख निकले। तुमने ही मुझे अमरता का वरदान दिया है। मुझे भस्म करने से कुछ नहीं होने वाला, देखो मैं फिर जीवित हो गया, हा हा हा हा।”
श्री हरि ने अंगोरा की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया ओर तुरंत उस कमरे से बाहर निकल गए। उन्होंने कोई मंत्र पढ़ा। मंत्र पढ़ते ही उस कमरे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया और ऐसा होते ही अंगोरा एक बार फिर जोर जोर से हँसने लगा।
वह मुस्कुराते हुए बोला, “ तुम्हें क्या लगता है, तुम मुझे इतनी आसानी से कैद कर दोगे? मैं अंगोरा हूँ, मुझे कोई कैद नहीं कर सकता, हा हा हा।”
कहने के साथ अंगोरा तेजी से दरवाजे के पास पहुंचा लेकिन जैसे ही उसने दरवाजा छुआ, एक तेज बिजली का झटका उसे लगा। वह उछल कर पीछे की दीवार से जा टकराया।
भगवान श्री हरि बोल उठे, “ अब इस कैद से तुझे तेरा वंशज ही निकाल सकता है और वही तेरा अंत भी करेगा क्योंकि याद कर मैंने तुझे क्या वरदान दिया था, और दिया नहीं था बल्कि तूने खुद मांगा था। तेरे वंशज की सहायता के बिना कोई तेरा अंत नहीं कर सकता।”
कहने के साथ श्री हरि वहां से अंतर्ध्यान हो गए। अंगोरा हैरान परेशान बस एकटक दरवाजे को घूर रहा था।
वर्तमान –
विक्की और मोनिका बड़ी ही तल्लीनता से कहानी सुन रहे थे।
प्रेत अब चुप हो चुका था। उसने बारी बारी से विक्की और मोनिका की तरफ देखा, ऐसा लगा जैसे वह आगे कुछ कहने के लिए खुद को तैयार कर रहा हो।
कुछ देर बाद वह फिर से बोल उठा, “ मैं तुम्हारा कब से यहां इंतजार कर रहा था, आज तुम दोनों को अपने समक्ष देख मेरे आनंद का पारावार नहीं है।”
“अभी तुमने हमें जो कहानी सुनाई थी, उसका मोनिका और मुझसे क्या जुड़ाव है? मोनिका को इस तरह के डरावने सपने क्यों आ रहे हैं, और उस कब्रिस्तान में उन मुर्दों का क्या रहस्य था। ये सारे सवाल जाने कबसे मुझे परेशान कर रहे हैं, कृपया अब मेरी जिज्ञासा शांत करने की कृपा करें।”
विक्की की बात सुन प्रेत मुस्कुराने लगा।
“ विक्की, वह कब्रिस्तान उस अंगोरा की ही माया थी, वह उन मुर्दों की सहायता से मोनिका को खत्म करना चाहता था क्योंकि मोनिका उसकी ही वंशज है और उस अंगोरा का अंत उसके वंशज की सहायता से ही हो सकता है। और वह कभी नहीं चाहेगा कि उसका अंत हो।”
विक्की हैरान था, वह बोला, “ लेकिन वह तो कैद है, ऐसी स्थिति में भला वह यह सब कैसे कर सकता है?”
प्रेत मुस्कुराते हुए बोला, “उस अंगोराके पास कई शैतानी शक्तियाँ मौजूद हैं, उसी के दम पर उसने अपनी कैद वाली जगह को एक नई दुनिया में परिवर्तित कर दिया है, जहां सिर्फ और सिर्फ उसी का राज चलता है, वह जल्द ही पुण्य आत्माओं को कैद कर अपने लोक में ले जाएगा और वहां उन्हें प्रताड़ित करेगा। उन्हीं शैतानी शक्तियों का सहारा लेकर उसने मोनिका पर हमला करवाया।”
प्रेत की बात सुन विक्की और मोनिका हैरानी से एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
प्रेत बोला, “जिस तरह से बिना विभीषण की सहायता से रावण को मारना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था, ठीक उसी तरह इस अंगोरा को मोनिका के बिना खत्म कर पाना मुमकिन नहीं है, तो तुम दोनों बिना किसी सोच विचार के इस शैतान का खात्मा करने पर लग जाओ।”
हैरान परेशान विक्की और मोनिका एक दूसरे को देख रहे थे।
विक्की बोला, “लेकिन हम उस तक पहुचेंगे कैसे और ये मोनिका कैसे निमित्त बनेगी।”
यह सुनते ही प्रेत के चेहरे पर रहस्यमय मुस्कान फैल गयी, वह तुरंत डाल से नीचे उतर आया
भाग 15
प्रेत अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और दो कदम मोनिका और विक्की की तरफ आगे आया।
उसने रहस्य मय निगाहों से विक्की को देखते हुए कहा, “हम मोनिका के माध्यम से ही अंगोरा तक पहुंचेंगे और मोनिका के माध्यम से ही उसे खत्म करेंगे।”
विक्की कंफ्यूज होते हुए प्रेत की तरफ देख रहा था। उसने प्रेत की बात बहुत ध्यान से सुनी थी लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बात का मतलब क्या था।
उसने फिर से पूछा, “मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आप आखिर कहना क्या चाहते हैं?”
प्रेत ने कहा, “अंगोरा मोनिका के सपने में आकर उसे मारने की कोशिश करता है, उसके पास ऐसी शैतानी शक्ति है जिससे वह किसी के भी सपने में जाकर उसकी आत्मा को कैद कर सके। अगर वह अपनी दुनिया में ले जाकर किसी को कैद कर देता है तो वास्तविक दुनिया में भी वह इंसान जान से हाथ धो बैठता है, अब अगर तुम्हें मोनिका को बचाना है और अंगोरा को खत्म करना है तो मोनिका के सपने में जाना ही होगा।”
जैसे ही प्रेत ने यह बात कही, मोनिका और विक्की, दोनों चौक कर प्रेत का चेहरा देखने लगे।
विक्की ने पूछा, “यह कैसे पॉसिबल है? किसी के सपने में जाना बिल्कुल इंपॉसिबल है।”
प्रेत मुस्कुराया, वह आगे बढ़ा, उसने मोनिका के सिर पर अपना हाथ रख दिया। उसके ऐसा करते ही मोनिका बेहोश होकर गिरने लगी लेकिन प्रेत ने उसे अपनी बाहों में थाम लिया और आराम से धरती पर लिटा दिया।
विक्की हैरानी से यह सब देख रहा था। प्रेत ने विक्की की तरफ देखते हुए कहा, “अब यह लड़की गहरी नींद में जा चुकी है और नींद में होने की वजह से अंगोरा इसके सपने में आकर इसे मारने की कोशिश करेगा, यही वह मौका है जब तुम मोनिका के सपने में जाकर अंगोरा को खत्म कर सकते हो।”
विक्की अभी भी कंफ्यूज दिखाई दे रहा था। प्रेत विक्की की तरफ आगे आया।
प्रेत बोला, “अपनी आंखें बंद करो! जब तुम अपनी आंखें खोलोगे तो तुम एक अलग ही दुनिया में पहुंच जाओगे और वह दुनिया होगी मोनिका के सपनो की दुनिया, जहां होगा सिर्फ और सिर्फ अंगोरा का राज। ध्यान रखना, दैत्य को खत्म करने के लिए तुम्हें काफी सूझबूझ दिखानी पड़ेगी।”
प्रेत ने इतना कहा तो विक्की ने अपनी आंखें बंद कर ली और जैसे ही उसने अपनी आंखें दोबारा खोली तो कमाल हो गया।
*****
वह एक अजीब सी दुनिया थी। चारों तरफ अजीब अजीब तरह की प्रेत आत्माएं घूम रही थी। उन्हीं के बीच में फंसी हुई मोनिका चारों तरफ डरी हुई नजरों से घूम घूम कर देख रही थी। वह वहां से भाग जाना चाहती थी लेकिन उसे कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था।
मोनिका चिल्ला उठी, “मैं यह कहां फंस गई, यह कितनी अजीब सी जगह है, यहां से निकलने का कोई रास्ता भी दिखाई नहीं दे रहा है, अगर जल्दी ही मैं यहां से बाहर नहीं निकली तो मेरी मौत निश्चित है।”
मोनिका सोच ही रही थी कि तभी हवा में एक नर कंकाल उड़ता हुआ उसकी तरफ लपका।
अचानक जैसे ही मोनिका की नजर उस पर पड़ी, वह कलाबाजियां खाती हुई दूसरी तरफ हो गई।
नर कंकाल उड़ता हुआ उसके पीछे खड़े मोटे से पेड़ से जा टकराया और वही खील खील होकर बिखर गया।
मोनिका डरी हुई आवाज में बोली, “यह सब क्या हो रहा है मेरे साथ? ऐसी चीजों की तो मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मैं यहां से बाहर कैसे निकलूं।”
तभी एक बहुत भयानक आवाज उसके कान में पड़ी –
“तू कभी भी यहां से बाहर नहीं निकल पाएगी मूर्ख! यहां मेरा साम्राज्य है और मेरे साम्राज्य में मेरी इच्छा के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता तो तू कैसे यहां से निकलेगी।” यह आवाज अंगोरा की थी।
आवाज इतनी भयानक और तेज थी कि मोनिका ने एक झटके में उस तरफ घूम कर देखा तो मारे डर के उसके तिरपन कांप गए।
मोनिका बोल पड़ी, “क.. क.. कौन हो? तुम कौन हो और मुझे क्यों परेशान कर रहे हो? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?”
मोनिका के सामने एक बहुत ही भयानक शक्ल सूरत का दैत्य खड़ा भयानक हँसी हँस रहा था।
दैत्य बोला, “अपनी मौत से पूछती है कि कौन है? अरे मैं तेरी मौत हूँ जो तुझे हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने आया हूं।”
मोनिका मारे डर के कांप गयी, “नहीं.. नहीं.. तुम ऐसा नहीं कर सकते! तुम मुझे नहीं मार सकते! मैं अभी नहीं मरना चाहती हूँ! प्लीज मुझे छोड़ दो! मुझे मत मारो!”
कहने के साथ मोनिका धीरे धीरे अपने कदम पीछे की तरफ बढ़ाने लगी।
दैत्य ठहाका लगाते हुए बोला, “हा हा हा! अब तो तेरी मृत्यु निश्चित हो चुकी है मूर्ख! अब तुझे मेरे हाथों कोई नहीं बचा पाएगा।”
कहने के साथ दैत्य ने अपने हाथ आगे किये तो उसके हाथ में बहुत सारे नुकीले कांटे एक साथ दिखाई दिए, उसने एक झटके में उन काँटों को मोनिका की तरफ उछाल दिया। उसके ऐसा करते ही काँटे बुलेट ट्रेन की गति से मोनिका की तरफ आगे बढ़ने लगे। मारे डर के मोनिका थर थर काँपने लगी।
मोनिका मन ही मन बुदबुदा उठी, “लगता है आज मेरी मृत्यु निश्चित है!”
एक पल के लिए उसने हार मान ली लेकिन दूसरे ही पल उसके मन में जाने क्या आया वह तुरंत पीछे की तरफ घूम गई, उसके पीछे एक काफी लंबा चौड़ा पेड़ खड़ा था। मोनिका ने एक जंप लगाई और पेड़ के पीछे हो गई। दैत्य के फ़ेके हुए कांटे पूरी स्पीड से आकर उस मोटे पेड़ में धँस गए।
दैत्य जोर जोर से हँसने लगा।
“तुम्हें पता है मोनिका, मुझे अपने शिकार को तड़पा तड़पा कर मारने में बहुत मजा आता है और मैं तुझे वहीं मौत दूंगा, तुझे तड़पा तड़पा कर मारूंगा।”
मोनिका ने पेड़ के पीछे से झाँक कर देखा तो वह खतरनाक दैत्य बहुत ही खतरनाक हँसी हँस रहा था। देखते ही देखते उसके हाथों में चक्र जैसा कुछ प्रकट हुआ और फिर पलक झपकते ही तेजी से पेड़ की तरफ आगे बढ़ने लगा। एक एक करके कई सारे चक्र पेड़ की तरफ लपके। हैरान परेशान मोनिका देखती ही रह गई कि तभी सारे चक्र एक साथ पेड़ पर झपट पड़े और उस पेड़ को कई टुकड़ों में काट डाला। ऐसा होते ही पेड़ के मोटे मोटे तने मोनिका के ऊपर बस गिरने ही वाले थे।
मोनिका एक अच्छी खिलाड़ी थी, हॉकी से लेकर फुटबॉल और यहां तक की कबड्डी और कुश्ती में भी उसने अपने टैलेंट का परचम लहरा रखा था।
इसी का फायदा था कि जैसे ही पेड़ के टुकड़े मोनिका पर गिरने वाले थे, उसने बड़ी ही सफाई से खुद को बचा लिया, अब वह उस दैत्य की विपरीत दिशा में भाग रही थी।
दैत्य हँसता हुआ बोला, “शाबाश! बहुत अच्छे! तुमने बहुत अच्छा करतब दिखाया , लेकिन इस बार तू मेरे हाथ से नहीं बचेगी।”
कहने के साथ जैसे ही उस भयानक दैत्य ने अपने हाथ ऊपर किये, ठीक तभी एक धमाके की आवाज हुई जिससे दैत्य के हाथ जहां के तहां रुक गए, उसकी नज़रें तुरंत आवाज की दिशा में घूम गई। भागती हुई मोनिका भी अचानक रुक गई। उसने घूम कर देखा तो उसकी भी हैरानी का ठिकाना ना रहा।
क्रमशः
: भाग 16
विक्की इस समय मोनिका की सपनों की दुनिया में था और तेज़ी से आगे बढ़ रहा था ।
विक्की खुद से बोल उठा, “मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मेरे कदमों के चलने के साथ ही, पीछे कुछ काले काले जहरीले सांप, रेंगते हुए मेरी तरफ बढ़ रहे हों।”
उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसे अपनी बात सच होती दिखाई दी। वह बोल उठा, ” सचमुच मेरे पीछे तो काले सांप तेजी से रेंगते हुए आ रहे हैं।.. ..अरे यह क्या! कुछ सांपों में तो मेरी तरफ छलांग लगा दी है!..ओह…मोनिका की जिंदगी का सवाल है मुझे जल्द से जल्द उस तक पहुंचना होगा इसलिए मैं यहां रुक कर इन सांपों से उलझने में अपना समय खराब नहीं कर सकता.. मेरे लिए अच्छा यही है कि मैं यहां से पूरी जान लगाकर भाग खड़ा होंऊ।”
उसने अपनी रफ्तार बढ़ा ली और तेज कदमों से भागने लगा। अब वह एक ऐसी राहदरी में भाग रहा था जिसके दाईं और बाईं तरफ अलग अलग यातनागृह बने हुए थे। जिसमें किसी आत्मा को अंगारों पर लेटाया गया था तो किसी को सांपो के बीच में डाल दिया गया था। किसी आत्मा को उसके चारों तरफ लिपटे सांप डस रहे थे तो किसी आत्मा की आंखो को दैत्यों द्वारा नुकीली कीलो से फोड़ा जा रहा था। विक्की को देखने के बाद कुछ दैत्य उसकी तरफ भी बढे लेकिन विक्की ने तुरंत ही अपनी अपने हाथों को आगे किया और ऐसा करते ही उसके हाथ से ज्वाला निकली।
विक्की गरज कर बोला, “मैं तुम्हारे बाप का भी बाप हूं कमीनो तुम मुझ तक नहीं पहुंच पाओगे।”
“बडूम बडूम”
विक्की की तरफ बढ़ने वाले दैत्यों के चिथड़े उड़ गए और विक्की एक बार फिर तेजी से आगे की तरफ भाग खड़ा हुआ।
वह खुद से बोला, “अंगोरा न जाने मोनिका को कहां लेकर गया होगा, मैं मोनिका के सपनों की दुनिया में हूँ अगर यहां पर वह राक्षस मोनिका को समाप्त करने में सफल हो गया तो मैं भी नहीं बचूंगा..इस अनोखी और विचित्र दुनिया में मुझे अंगोरा और मोनिका को तुरंत ही ढूंढना होगा?”
सपनों की उस विचित्र दुनिया में मोनिका को खोजने के लिए विक्की तेजी से आगे बढ़ रहा था। उसके चारों ओर बस इन्ही आत्माओं की चीख पुकार गूंज रही थी।
अचानक विक्की को रुक जाना पड़ा कारण था सामने कि वह दीवार जो उसका रास्ता रोके हुए खड़ी थी और उस दीवार पर कुछ ऐसा विचित्र हो रहा था जिसने विक्की का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था।
वह खुद से बुदबुदाया, ” रास्ते में खड़ी उस दीवार में कुछ हलचल हो रही है ऐसी हलचल जैसे दीवार से कोई बाहर निकल रहा है … सचमुच दीवार से कोई बाहर निकल रहा है लेकिन कौन?”
दीवार से एक भयानक दैत्य निकलकर बाहर आ गया था उसके हाथ में एक बेहद खतरनाक नुकीला हथियार था। वह अपना नुकीला हथियार लेकर विक्की के ऊपर टूट पड़ा।
उसके भयानक वार से बचने के लिए विक्की उछलकर एक तरफ जा गिरा और तब विक्की की नजर सामने मौजूद उस भयानक दैत्य पर पड़ी जो और कोई नहीं खुद दैत्यराज अंगोरा था।
अंगोरा ठहाका लगा उठा, “हा हा हाSSSS… मोनिका के सपनों की इस दुनिया में सिर्फ मेरा राज है, यहां से अगर तू बचना भी चाहेगा तो भी बचकर नहीं जा पाएगा, तुम दोनों को यहीं खत्म करके अंगोरा शैतानी शक्तियों के साथ सारी दुनिया पर राज करेगा हाहाहा “
भयानक ठहाका लगाते हुए अंगोरा ने अपना हाथ हवा में लहराया, उसके ऐसा करते ही वो पूरी जगह अचानक से अनगिनत शीशों से घिर गई। शीशों की वजह से चारों तरफ अंगोरा का ही अक्स दिखाई देने लगा, यह देख विक्की हैरान रह गया। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें?
विक्की परेशान होकर बोल उठा, “अब इस अंगोरा का सामना कैसे करूं? मुझे समझ में नहीं आ रहा कि असली अंगोरा कहाँ खड़ा है? अब मेरे पास टाइम नहीं है, मुझे रिस्क लेना ही पड़ेगा!”
“बूम बूम“
कहने के साथ विक्की ने किरण का वार सारे अक्स के ऊपर एक साथ किया लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहे।
विक्की ने तुरंत अपनी आँख बंद की और अपने वेपन पॉवर को दिव्यान्तक मंत्र बोलकर जगाया। अंगोरा अभी भी उसके सामने खड़ा ठहाके लगाकर हँस रहा था।
“हा हा हा“
वहीं दूसरी ओर अंगोरा के राक्षसों ने मोनिका की आत्मा को बंदी बना लिया था। विक्की ने फिर से अंगोरा पर हमला शुरू कर दिया।
इस बार किरण अंगोरा के पीछे लगे शीशे से जा टकराई, शीशा चकनाचूर हो गया।
ठीक उसी समय विक्की की नजर बंधक बनी हुई मोनिका पर पड़ी।
अगले ही पल, उसने मोनिका के पीछे खड़े दोनों राक्षसों की गर्दन पर किरण चला दी। वो दोनों वहीं ढेर हो गए।
विक्की ने मोनिका को वहां से भाग जाने का इशारा किया। इशारा पाने के बाद भी मोनिका ने वहां से भागने की कोशिश नही की ,वह वहीं खड़ी रही, उसके चेहरे पर इस समय कुछ ऐसे भाव थे जैसे कि उसने मन ही मन कोई भीषण निर्णय कर लिया था।
अपने साथियों का अंत होते देख अंगोरा की आंखें गुस्से में तमतमाने लगी। उसका शरीर धीरे धीरे विराट होने लगा और उसका चेहरा देखते ही देखते वीभत्स रूप धारण करने लगा। उसका वीभत्स चेहरा शीशों की वजह से चारों तरफ दिखाई दे रहा था। यह सब देख विक्की परेशान हो गया।
विक्की परेशान होते हुए बोल पड़ा, ” मैं जब भी इस अंगोरा पर शक्ति किरण चला रहा हूँ, तो ये गायब हो रहा है। मुझे किसी भी तरह इसका अंत करना होगा।”
तभी मोनिका को कुछ याद आया। वो अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करके टेलीपोर्टेशन के माध्यम से अपने मन में विक्की से बात करने लगी।
मोनिका बोली, ” दाएँ से ‘5’ नम्बर के शीशे पर वार करो। जल्दी करो, हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।”
इतनी देर में अंगोरा, मोनिका की मेमोरी में घुसकर, उसे टॉर्चर करने लगा। जिससे मोनिका को काफ़ी कमज़ोरी महसूस होने लगी। ये सब देख विक्की की आंखों से क्रोध की लपटें निकलने लगी।
वह गुस्से में गुर्राया, “ बस बहुत हुआ अंगोरा! अब तेरा अंत निश्चित है।”
कहने के साथ विक्की अपने दोनों हाथ आगे करके खड़ा हो गया। जल्दी ही उसके हाथ मे एक अजीब सा धनुष बाण जैसा हथियार आ गया, उसने तीखे बाण अंगोरा पर छोड़ने शुरू कर दिए।
फ़ाइनली उसने पांचवें शीशे के ऊपर बाण चला दिया। जैसे ही शीशे के टुकड़े टूटकर, अंगोरा के ऊपर गिरने वाले थे, तो उसने अपनी शक्ति से उसे वहीं रोक लिया और उन शीशों के टुकड़ों को विक्की की ओर फेंक दिया।
विक्की तीर चलाकर उन शीशों को अपनी ओर आने से रोकने लगा लेकिन तभी शीशे का एक टुकड़ा आकर उसके हाथ में चुभ गया। उसका धनुष हाथ से छूट कर गिर गया।
विक्की के मुंह से कराह सी निकली, “आह्ह्ह्हsss…, मेरा हाथ! अब चाहे जो भी हो… मुझे हर हाल में मोनिका को बचाना होगा! उसे ये अंगोरा बहुत टॉर्चर कर रहा है।”
फिर उसने दोबारा अपना धनुष उठा लिया और अंगोरा की ओर बढ़ गया। अंगोरा भी उसकी तरफ तेज़ी से बढ़ रहा था।
विक्की ने धड़ाधड़ तीर चलाना शुरू कर दिया। अंगोरा उन सारे तीरों को अपने हाथों से पकड़ रहा था। और उन्हें तोड़ तोड़कर फेंक रहा था। जिस वजह से उसे कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उन तीरों से वहां के सारे शीशें चकनाचूर हो गए। इससे पहले की अंगोरा समझ पाए, वो टुकड़े अंगोरा के शरीर में जगह जगह धँस गए।
अंगोरा चीखा, “आआआह्हह…!”
फिर भी वो जैसे तैसे खड़ा हुआ और विक्की की ओर किरण से वार करने लगा। एक किरण विक्की के हाथ पर आकर लगी। फिर उसने विक्की पर कई सारे शीशे के टुकड़े फेंके।
विक्की बेहोश होकर नीचे जमीन पर गिर पड़ा। अंगोरा ने अपनी जादुई ताकत का इस्तेमाल करके, उसे धूल से ढक दिया। वहीं मोनिका हैरान परेशान होकर इधर उधर देख रही थी। उसके हाथ बुरी तरह जख्मी हो गए थे।
मोनिका खुद से बोल पड़ी, “अब मैं इस अंगोरा से कैसे बचूंगी? मेरे पास तो कोई दिव्य शक्ति भी नहीं है।”
अंगोरा तुरंत अपनी शैतानी ताकत का इस्तेमाल करके, अपने एक हाथ में आग का गोला लाया। यह देख मोनिका चौंक गई, वो तुरंत टेलीपोर्टेशन के माध्यम से विक्की के पास गई।
मोनिका चिल्लाई, ” विक्की! उठो! तुम्हें उठना ही होगा। अंगोरा तुम्हारी ओर आ रहा है। तुम्हें कुछ भी करके उसे खत्म करना ही होगा।”
अंगोरा जैसे ही विक्की के पास पहुंचा विक्की ने तुरंत अपनी आंखें खोल ली, इससे पहले कि अंगोरा कुछ समझ पाए। विक्की के हाथों से किरण उगल पड़ी, किरण किसी चीज से जाकर टकराई और अंगोरा के दिल में जा घुसी।
ऐसे बुरे हालात में भी विक्की ने अपने ऊपर नियंत्रण कर रखा था। फिर वो जैसे तैसे खड़ा हुआ और अंगोरा पर लगातार किरण वार करने लगा। अंगोरा को कई किरणे जा लगी, वो वहीं धाराशाही हो गया।
अंगोरा के ढेर होते ही मोनिका उसकी जादुई पकड़ से आजाद हो गई और तेजी से विक्की की ओर दौड़ पड़ी।
विक्की ने कोई मंत्र बुदबुदाया और उस यातनागृह के चारों तरफ किरण चलाने लगा। देखते ही देखते वो जगह पूरी तरह ध्वस्त होने लगी।
विक्की बोला, “मोनिका, टाइम बहुत कम है! हमें तुरंत ही यहां से निकलना होगा ।”
बिना एक सेकंड भी गंवाये मोनिका और विक्की बाहर की तरफ भागते चले गए और अब वे जल्द ही सपनों की उस दुनिया से भी बाहर निकल जाने वाले थे जिसमें उन्होंने अंगोरा को खत्म कर दिया था।
समाप्त।