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Ham Dono

वह प्यार की प्यास थी या जिस्म की भूख, हवस का तूफान था या भावनाओं का चक्रवात, जिसने दो सहेलियों को वह सब करने के लिए मजबूर कर दिया जो उन्हें नहीं करना था!… पढ़िए ‘ हम दोनों ‘ और दो जवां दिलों के हसीन जज्बातों में खो जाइए।

 

भाग 1

 “अरे! मीडिया वालों को किसने अंदर आने दिया?”

शिवानी ने अपनी सहेली कृतिका को कॉलेज के गेट से अंदर आते देख उस पर तंज कसने के इरादे से कहा।

 कृतिका मुस्कुराती हुई अंदर चली आ रही थी। उसके हाथ में माइक था। वह बिल्कुल रिपोर्टर लग रही थी।  उसके पिता राजीव मेहरा एक जाने पहचाने न्यूज चैनल से जुड़े हुए थे इसलिए उनसे जिद्द करके उसने उसी न्यूज चैनल के लिए पार्ट टाइम रिपोर्टर का काम मांग लिया‌ और पिता अपनी लाडली की जिद्द के आगे हार गए। आज भी वह अपने रिपोर्टिंग के काम को निपटाकर ही आ रही थी।

 “इस मीडिया वाली को तुम क्या, कोई नहीं रोक सकता है कहीं भी आने-जाने से!” कृतिका ने मुस्कुराते हुए कहा।

 “कृतिका, तू अपने पापा की पहुँच का कुछ ज़्यादा ही फायदा उठा रही है। काम के बहाने तुझे कॉलेज से बाहर घुमने का भी मिल जाता है और रिपोर्टर्स के साथ घूम कर सेलेब्रिटिज के आसपास मंडराने का मौका भी।

” “देखना शिवानी, एक दिन मेरा नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा। रिपोर्टर्स की दुनिया में क्रांति लाने वाली कृतिका। और उस दिन तुम मुझ पर फख्र करोगी।” कृतिका ने अपना सीना चौड़ा करते हुए कहा।

 “अच्छा और ये होगा कब?” शिवानी ने ताना सा मारा। 

“होगा नहीं, हो रहा है। मेरे काम से इंप्रेस होकर बॉस ने मेरी सेलरी बढ़ा दी है और अपन जा रहे है ट्रिप पर।” कृतिका के चेहरे से ही खुशी झलक रही थी।

 “वाह! तेरा सही है यार, और एक हम है, बस इन किताबों में फंसे रहो, सिर धुनते रहो और वापस जाओ तो खाली मुँह चिढ़ाता हुआ कमरा इंतज़ार करता रहता है।” शिवानी ने अफसोस के साथ कहा। 

“तेरा भी दिन आएगा यार, लेकिन खाली कमरा इसलिए भी इंतज़ार करता है क्योंकि उस खाली कमरे का तू इस्तेमाल करना नहीं जानती। अरे कभी मूड बना, बुला किसी नए पुराने आशिक को, रात बन जाएगी और थोड़ा ज़्यादा स्पाइसी चाहिए तो हम भी है जॉइन करने के लिए!”

कृतिका के दो अर्थी संवाद शिवानी भली भांति समझ रही थी। “मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है, न ही मैं बनाना चाहती हूँ, साले सब कमीने होते हैं। उस दिनेश को ही देख, प्रपोज मुझे कर रहा था और चैटिंग किसी और लड़की से कर रहा था। साले सब एक जैसे होते हैं।” शिवानी ने नाक सिकोड़ी।

 “अरे तो मैं किस दिन के लिए हूँ? एक बार कहकर तो देख, मैं तुझे जॉइन करूँगी और सच मान, तुझे बॉयफ्रेंड की कमी महसूस नहीं होने दूँगी।” कृतिका ने शैतानी मुस्कुराहट के साथ कहा। 

 ”क्या सच में? क्या वाकई तू ज्वाइन करेगी!” शिवानी  ने उत्साहित होकर पूछा।

ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आँखों में चमक उभर आई हो। कृतिका भी अजीब अंदाज में मुस्कुरा उठी। 

वह मुस्कुराते हुए बोली, “एक बार मौका देकर तो देख। वाकई में तुझे बॉयफ्रेंड या लवर की जरूरत ही महसूस नहीं होगी, पक्का।”

 “अभी तो एक प्रोजेक्ट में व्यस्त हूँ, हाँ लेकिन आधे घंटे बाद तुम मेरे साथ मेरे कमरे पर चल रही हो, मैं भी देखना चाहती हूँ कि तुम कितनी मसालेदार हो। मतलब स्पाइसी।” शिवानी का अंदाज भी अब कृतिका सा हो चला था।

 लगभग आधे घंटे बाद दोनों शिवानी के कमरे की तरफ चल पड़े। जल्द ही दोनों उसके कमरे पर मौजूद थी।

 कृतिका कमरे को देखते हुए बड़ी ही निराशा से बोली, “वाकई तेरा कमरा तो बिल्कुल मनहूस और खाली पड़ा हुआ है। लेकिन आज यह हमारी मस्ती से भर उठेगा।”

 और इसी के साथ कृतिका ने कमरे का दरवाजा बडी ही अदा के साथ शिवानी की तरफ देखते हुए बंद कर दिया। जैसे ही वह दरवाजा बंद करके शिवानी की तरफ घूमी, शिवानी की धड़कनें तेज हो गई। वह बड़ी अजीब नजरों से कृतिका को देख रही थी। उसे इस तरह से खड़ी देखकर कृतिका की बॉडी में भी झुरझुरी सी दौड़ गई।

आँखों ही आँखों में देखते हुए जैसे दोनों पर ही नशा छाने लगा। कृतिका धीमे धीमे कदमों से शिवानी  की तरफ बढ़ी और उसके चेहरे से हल्के हाथों से उसकी जुल्फ़ें हटाकर पीछे करने लगी।

कृतिका मस्ती भरे अंदाज में बोल उठी, “लगता है, तेरा पहली बार है! क्या कभी बॉयफ्रेंड के साथ बेड शेयर नहीं किया?” 

इतना कहने के बाद कृतिका ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी। शिवानी ने कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उसकी आँखें अब बंद हो चुकी थी। कृतिका की उँगलियों के टच ने जैसे उसके शरीर में रोमांच पैदा कर दिया था।

भाग 2 

कृतिका ने कामुकता भरी मुस्कान के साथ शिवानी की तरफ देखा और फिर हल्के हाथों से उसके जिस्म को छूने लगी। फिसलती हुई उसकी उंगलियां शिवानी के जिस पर ठीक वैसे ही नाचने लगी जैसे हारमोनियम वादक की उंगलियां हारमोनियम पर नाचती हैं।

 उधर शिवानी की साँसे और तेज हो गई। आँखें अभी भी बंद थी। उसका पूरा चेहरा लाल हो चुका था। गहरी गहरी साँसों की वजह से उसके हाथों की मुट्ठियाँ कसने लगी थी। होठों से धीमी धीमी सिसकारियाँ निकलने लगी। 

उसकी यह हालत देखकर कृतिका अपने आप पर कंट्रोल ना कर सकी और उसने अपने होंठ शिवानी के होठों पर जमा दिए। जन्मों के प्यासे प्रेमियों की तरह दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में लेकर एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे और ऐसा करते करते कृतिका शिवानी को लेकर उसके बेड तक आ गई।

उसने हल्के हाथों से शिवानी को धक्का दिया तो वह बेड पर गिर गई। शिवानी व्याकुल नजरों से उसे देखने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे उसे चिंता हो रही हो कि कहीं कृतिका उसे इस तरह प्यासी छोड़कर ना चली जाए। दोनों के चेहरे पर कामुकता इस तरह से तारी हो रही थी कि मुस्कान से लेकर शर्म लिहाज तक के भाव नजर नहीं आ रहे थे। 

कृतिका जल्दी ही किसी प्यासी लोमड़ी की तरह शिवानी पर टूट पड़ी।  कृतिका मुस्कुराते हुए बोली, “वाकई! तू तो अनछुई कली निकली! लेकिन डोंट वरी आज तो मैं तुझे कली से फूल बना दूँगी।” 

शिवानी के माँसल और गोरे बदन पर अपनी उंगलियाँ फिराते हुए कृतिका ने कहा और फिर किसी माहिर खिलाड़ी की तरह उसके बदन से खेलने लगी।

 शिवानी मुस्कुराते हुए बोली, “इसी प्यास को बुझाने के लिए मैं तरस रही थी कृतिका क्योंकि मुझे मर्दों से नफरत है लेकिन आज तूने साबित कर दिया कि मर्दों के बिना भी यह सुख पाया जा सकता है।” कहने के साथ शिवानी ने झपटकर कृतिका को कमर से पकड़ा और अपने ऊपर गिरा लिया।

अभी कृतिका कुछ समझ पाती, उससे पहले ही शिवानी जल बिन मछली की भांति तड़प कर उसके पैरों की तरफ आ गई।  शिवानी का मंतव्य समझते ही कृतिका के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान फैल गई।

  अब दोनों के शरीर एक दूसरे के शरीर की गर्मी और तपिश को पूरी तरह से महसूस कर पा रहे थे। देखते ही देखते दोनों एक दूसरे में समाने के लिए छटपटाने लगी। कभी कृतिका शिवानी के ऊपर होती तो कभी शिवानी कृतिका के ऊपर। पूरा कमरा उनकी गर्म साँसों और मादक सिसकारियों से भरने लगा। आखिर थककर कृतिका बेड पर ही लुढ़क गयी, उसकी साँसें सुपरफास्ट ट्रेन की तरह दौड़ रही थीं। साँस तो शिवानी की भी बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ रही थी लेकिन उसकी आँखों में बेचैनी एकदम साफ साफ दिखाई दे रही थी।  वह बुरी तरह से मचल रही थी जबकि कृतिका को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी।

शिवानी ने कईं बार कृतिका को अपने ऊपर खींचने की कोशिश की लेकिन कृतिका को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे अब वह बिल्कुल भी यह सब करने के मूड में नहीं थी। उसकी आँखों में संतुष्टि के भाव साफ दिख रहे थे।

 “प्लीज कृतिका! कुछ कर यार, मेरा मन बहुत बेचैन हो रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे अंदर ही अंदर आग सी लग गई हो।

“अगर इसे नहीं बुझाया गया तो मैं मर जाऊँगी। प्लीज कुछ कर!” कहने के साथ शिवानी कृतिका को अपने ऊपर खींचने लगी लेकिन कृतिका के चेहरे पर अनिच्छा के भाव साफ साफ दिखाई दे रहे थे। वह पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी। ***

भाग 3 

आखिरकार कृतिका से रहा नहीं गया।

“मतलब तुझे अभी भी आर्गेज्म नहीं मिला, लेकिन यार मैं तो पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी हूँ। अभी मेरा मन नहीं कर रहा। कुछ देर रुक जा अभी मुझे जबरदस्त थकान महसूस हो रही है।” कृतिका ने गहरी गहरी साँसे लेते हुए कहा तो शिवानी मचल उठी

। “तुझे तो अपनी पड़ी हुई है! मेरा क्या होगा? मेरे भीतर आग लगाने वाली तू ही है और अब इसे बुझाने का इंतजाम भी तुझे ही करना होगा।” शिवानी कृतिका के ऊपर आती हुई बोली।

 वह उसके हाथों को पकड़कर अपने जिस्म पर जबरदस्ती फिराने लगी लेकिन कृतिका के हाथ ढीले पड़ चुके थे।

तभी कृतिका के दिमाग में कुछ आया तो उसकी आँखें चमक उठी। “अच्छा रुक! मेरे करने से कुछ नहीं होने वाला लेकिन मैं तेरे लिए एक बढ़िया इंतजाम कर सकती हूँ। जिससे तू पूरी तरह से संतुष्ट हो पाएगी।” कृतिका ने कहा तो शिवानी उसे हैरानी से देखने लगी।

  “क्या चल रहा है तेरे दिमाग में?” शिवानी ने जल्दी से पूछा। उसकी बेचैनी पल पल बढ़ती जा रही थी।  

“बस तू देखती जा!” कहने के साथ कृतिका ऐसे उठी जैसे उसकी सारी थकान गायब हो चुकी हो। चेहरे पर अजीब से भाव के साथ चमक दिखाई देने लगी। अभी कुछ देर पहले थकी हुई नजर आने वाली कृतिका जोश भर उठी थी। उसने अपना मोबाइल निकाला और कोई नंबर डायल कर दिया। जल्दी ही उसकी बात भी हो गई। इस दरमियान शिवानी उसे हैरानी से देखती रही। कॉल कट करने के बाद कृतिका के चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी। वह तिरछी निगाहों से शिवानी को देख रही थी। कुछ ही देर बाद उस कमरे के दरवाजे की डोर बेल बजी तो कृतिका तेजी से उठ खड़ी हुई। उसने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजे की तरफ लपकी।

जब उसने दरवाजा खोला तो सामने खड़े इंसान को बस देखती ही रह गई।  “सोचा नहीं था कि इतना कड़क माल मिल पाएगा। शायद इसी को कहते हैं प्यासे के हाथ शराब की बोतल लगना।”  कृतिका खुद में ही बुदबुदाई।

 “मैम, आपने कुछ कहा?” सामने दरवाजे पर एक डिलीवरी बॉय अपने हाथ में लिफाफे का एक पैकेट लिए खड़ा था। 

“हाँ, मैं यह कह रही थी कि तुम बहुत हैंडसम हो।” कृतिका ने मुस्कुराकर कहा तो लड़का भी मुस्कुराने लगा।  “थैंक यू मैम! ये लीजिए आपका नाश्ता और मुझे पेमेंट कर दीजिए। मुझे दूसरी डिलीवरी के लिए तुरंत निकलना होगा।”

उस लड़के ने पैकेट कृतिका की तरफ आगे बढ़ाया।  “मैं यह पैकेट नहीं पकड़ सकती। प्लीज तुम आकर अंदर रख दो। मुझे थोड़ी प्रॉब्लम है!” कृतिका ने कहा और दरवाजा पूरा खोलकर उसने लड़के को अंदर आने का रास्ता दे दिया। लड़के ने पहले हैरानी से कृतिका को ऊपर से नीचे तक देखा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह छोटा सा पैकेट पकड़ने में कृतिका को कौन सी दिक्कत हो रही थी। लेकिन फिर भी उसने मुस्कुराते हुए दरवाजे के अंदर कदम रखा।

जैसे ही वह कमरे के अंदर इंटर हुआ, कृतिका ने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। सामने बेड पर शिवानी बिना किसी कपड़ों के ऐसे ही पड़ी हुई थी। उसके ऊपर नजर पड़ते ही लड़के ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया। टेबल पर पैकेट रखकर वह तुरंत तेजी से दरवाजे की तरफ लपका लेकिन जब दरवाजे पर उसकी नजर गई तो वह हैरान रह गया।

  “अरे मैम! यह आप क्या कर रही हैं? आपने दरवाजा क्यों बंद कर दिया? खोलिए! मुझे देर हो रही है! मुझे जाने दीजिए!” डिलीवरी बॉय ने जल्दी से कहा। उसकी आवाज में एक थरथराहट थी।

  इससे पहले कि वह दरवाजे की तरफ बढ़ पाता। पीछे से मारे बेचैनी के पागल हुई शिवानी ने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। 

डिलीवरी बॉय जोर से चिल्लाया, “यह क्या कर रही हैं आप? यह बिल्कुल गलत है! छोड़ो छोड़ो!” कहने के साथ उसने शिवानी का हाथ झटकना चाहा लेकिन शिवानी ने उसे अपने ऊपर खींच लिया।

 डिलीवरी बॉय शिवानी के ऊपर जा गिरा तो शिवानी ने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और बुरी तरह से चूमने लगी।डिलीवरी बॉय ने शिवानी को जोर का धक्का दिया और किसी तरह से खुद को उसके चंगुल से छुड़ाकर भागने लगा। लेकिन शिवानी ने कसकर उसके कपड़े पकड़ लिए।

दूसरी तरफ कृतिका खड़ी यह तमाशा देख रही थी। ****

 भाग 4 

अचानक कृतिका के दिमाग में कुछ आया तो वह बोल उठी, “अरे शिवानी! तुम यह क्या कर रही हो? छोड़ो! छोड़ो! इस तरह से जबरदस्ती नहीं करते। जबरदस्ती में कोई मजा नहीं आता यह सब काम मन से किए जाते हैं। छोड़ो इसे!”

 कहने के साथ कृतिका ने डिलीवरी बॉय को शिवानी के चंगुल से छुड़ाया। डिलीवरी बॉय पसीने से लथपथ हो गया था। कृतिका उसे देखकर मन ही मन मुस्कुरा उठी और सोचने लगी, “बेटा! अब तो तुम यहाँ से बचकर जाने से रहे। हम तो तुम्हारे मजे लेकर ही रहेंगे।”

 सोचते हुए वह डिलीवरी बॉय से बोल‌ उठी, “अरे! तुम तो पूरे पसीने से भीग गए हो! चलो मैं तुम्हें टॉवेल दे देती हूँ अपना पसीना साफ कर लो। अगर इस कंडिशन में तुम बाहर निकलोगे तो अच्छा नहीं लगेगा। मेरी दोस्त ने तुम्हारे साथ जबरदस्ती की उसके लिए मैं सॉरी बोलती हूँ।’ 

कहने के साथ कृतिका ने कमरे में एक तरफ पड़ा हुआ टॉवल उठाया और डिलीवरी बॉय को दे दिया। डिलीवरी बॉय ने कृतिका का साथ पाकर राहत की साँस ली और इधर दूसरी तरफ कृतिका कमरे के कोने में रखे फ्रिज की तरफ बढ़ गई। उसने फ्रिज खोलकर देखा तो उसमें कोल्ड ड्रिंक रखी हुई थी। साथ ही उसने तुरंत डिलीवरी बॉय की तरफ देखते हुए अपनी जेब से कोई पुड़िया निकाल ली। डिलीवरी बॉय अभी भी अपना पसीना पौंछ रहा था।

 कृतिका ने चुपके से कोल्ड ड्रिंक में वह पुड़िया डाल दी और फिर मुस्कुराती हुई डिलीवरी बॉय की तरफ आ गई।

 “देखो! अभी अभी जो कुछ भी हुआ उसे भूल जाओ और यह कोल्डड्रिंक पियो। फिर आराम से अपने काम पर चले जाओ।”

 लड़का पहले ही घबरा चुका था। अंदर ही अंदर बेचैन भी हो रहा था इसलिए उसने तुरंत कोल्ड्रिंक्स कृतिका के हाथ से ले ली और घूँट पर घूँट पीने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत देर का प्यासा हो लेकिन दो तीन घूँट उतारने के बाद अचानक उसकी आ़ँखों में अजीब सी मदहोशी छाने लगी।

उसने अजीब सी नजरों से अपने सामने खड़ी कृतिका को देखा और फिर बेड पर पड़ी हुई शिवानी को।  अब वह एकदम बदला हुआ लग रहा था। उसकी आँखों में अजीब सी वासना दिखाई दे रही थी। कृतिका ने मुस्कुराते हुए उसके गले में बाहें डाल दी। लड़के ने कोई विरोध नहीं किया उल्टा ऐसा लग रहा था जैसे वह खुद यही चाहता हो। उसने एक झटके में कृतिका को उठाकर बेड पर लिटा दिया और फिर बारी बारी से दोनों के जिस्मों से खेलने लगा।

शिवानी पहले ही बिना कपड़ों के बैठी हुई थी। कुछ ही देर में कृतिका ने भी अपने कपड़े उतार फेंके और साथ ही साथ उस लड़के के भी।   अभी यह खेल पूरी तरह से परवान भी नहीं चढ़ा था कि अचानक उस लड़के की आँखों से वासना की ख़ुमारी धीरे धीरे उतरने लगी और जैसे जैसे यह हो रहा था वैसे वैसे वह अजीब सी निगाहों से कभी खुद को तो कभी उन दोनों को देख रहा था।

 अचानक वह पीछे हटने लगा उसको ऐसे देखकर शिवानी चिल्लाई, “कृतिका, इसका नशा उतर रहा है। इसे फिर से कोल्ड ड्रिंक पिला वरना हमारा मूड खराब हो जाएगा।”  कृतिका ने भी देर नहीं लगाई और तुरंत उठकर बची हुई कोल्ड ड्रिंक उठा लाई।

उसने अपने हाथों से कोल्डड्रिंक उस लड़के को पिलानी चाही लेकिन लड़का अब उठकर खड़ा हो चुका था।  उसने कृतिका के हाथ से कोल्ड ड्रिंक ले ली। ऐसा लग रहा था जैसे वह खुद ही पीना चाहता हो। उसकी यह हरकत देखकर कृतिका और शिवानी भी मुस्कुरा उठी लेकिन तभी वह हुआ इसकी कल्पना उन दोनों ने ही नहीं की थी।

लड़के ने कोल्ड ड्रिंक की बोतल उठाकर फर्श पर दे मारी। “तुम दोनों कितनी गंदी हो! तुमने मुझे कोल्डड्रिंक में दवाई मिलाकर मुझसे गलत काम करवाया। यह तुमने अच्छा नहीं किया। तुम्हारे मम्मी पापा इतने सारे पैसे खर्च करके तुम दोनों को हॉस्टल इसलिए भेजते हैं कि अच्छे से पढ़ाई लिखाई कर सको। लेकिन तुम दोनों क्या कर रही हो? यहाँ पर अपने मम्मी पापा की मेहनत की कमाई से गुलछर्रे उड़ा रही हो। थूँ है तुम दोनों पर! मुझे देखो, मेरे माँ-बाप नहीं है। पढ़ाई की कीमत मुझसे पूछो, मैं पढ़ना चाहता हूँ  मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए मैं डिलीवरी बॉय की जॉब करता हूँ और किसी तरह से अपनी पढ़ाई कंटिन्यू कर रहा हूँ। शर्म आनी चाहिए तुम दोनों को!”

कहने के साथ लड़के ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने और वहाँ से निकल गया जबकि दोनों लड़कियाँ शर्म से अपना सिर झुकाए खड़ी रह गई।…..  

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