कहते हैं कि पैसा सब कुछ नहीं होता। लेकिन यह बात भी अपनी जगह चट्टान की तरह अडिग है कि पैसे के बिना कुछ नहीं हो सकता। इसी पैसे के लिए इंसान कभी सामान खरीद कर बाजार में बेचता है, और कभी खुद सामान बनकर बाजार में बिकने के लिए खड़ा हो जाता है। पढ़िए MAN FOR SALE नाम की इस कहानी को और एहसास कीजिए इस बात का कि पैसे से क्या-क्या खरीदा जा सकता है और पैसे के लिए क्या-क्या बिकता है?
भाग 1
ऑस्ट्रेलिया के खूबसूरत शहर सिडनी के फेमस ओपेरा हाउस से कुछ ही दूरी पर मौजूद था वह शानदार बंगला, जिसका एक शानदार कमरा महंगे परफ्यूम से महकता हुआ गर्म साँसों से गूँज रहा था।
“उफ्फ! कितना सॉलिड है..जवाब नहीं इसका।”
विकास के जिस्म से किसी नागिन की तरह लिपटी लवली ने उसके अंग अंग को चूमते हुए मादक अंदाज में कहा। उसके फूल से हाथ विकास के सख्त जिस्म पर फिसलते हुए विकास के शरीर के एक एक हिस्से का जायजा ले रहे थे।
“ये खूबसूरत फूल लाई ही तुम तितलियों के लिए हूँ, जितना मर्जी चूसो इसका रस मगर थोड़ा सम्भल कर..!”
यह रिंकी थी, जो विकास को यहाँ लेकर आई थी, उसने नशीली नजरों से विकास की तरफ देखते हुए कहा।
लेकिन लवली थी कि कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं थी। वह तो विकास के शरीर से और भी ज्यादा लिपटती हुई मादक अंदाज में बोली, “मैं तो पूरी तरह इस फूल को निचोड़ डालना चाहती हूँ, सम्भल कर क्यों?”
“अरे जानेमन, I am also here, और ये फूल बस एक, तो थोड़ा मुझे भी इसका स्वाद चख लेने दो न।” यह एंजेला थी, जो ऐसे बोल रही थी जैसे उसका तन-बदन किसी आग में सुलग रहा हो और विकास उन हसीनाओं की हरकतों से मदमस्त होने की जगह बुरी तरह परेशान लग रहा था।
संगमरमरी बदन की दूध जैसी गोरी हसीनाएँ उसके सांचे में ढले पौरुष को बस जैसे अपने तन बदन में उतार लेने को आतुर लग रही थीं।
“डार्लिंग.. कुछ करो न..!”
लवली पागलों की तरह विकास के होंठों पर अपने रसीले होंठ रखते हुए बोली।
लवली की इस बात पर विकास तुरंत ही अपने चेहरे पर बनावटी मुस्कान ले आया और लवली के होंठों को चूमने लगा।
लवली और एंजेला भूखी शेरनियों की तरह विकास पर झपट रही थी, जबकि रिंकी एक तरफ खड़ी, उनकी बेचैनी का भरपूर आनंद ले रही थी।
तभी लवली नागवार स्वर में बोल उठी, “डार्लिंग! अब जो होने वाला है, मुझे नहीं लगता उसमें कपड़ों की कोई जरूरत है!”
वह अपने होठों को विकास के कान के पास ले जाकर लगभग फुसफुसाकर बोली – “क्या हम कपड़ों को उतार सकते हैं ?”
“कपड़े उतारने में वह मजा नहीं है जो कपड़ों को एक झटके में फाड़ कर जिस्म से अलग कर देने में है।”
कहने के साथ एंजेला ने विकास की शर्ट फाड़कर कमरे के फर्श पर उतार फेंकी और फिर अपने कपड़े उतारने में जुट गई, लवली भी पीछे नहीं रही थी कपड़े उतारने में।
अब दोनों के गदराये हुए बदन विकास की आँखों के सामने थे और वह बदन किसी की भी नीयत खराब करने का माद्दा रखते थे लेकिन विकास पर उनका कोई असर नहीं पड़ रहा था। विकास कहीं खोया हुआ था, यह बात एंजेला और रिंकी ने तुरंत ही नोट की –
रिंकी ने विकास की तरफ देखते हुए कहा, “तुम किन्हीं और ख्यालों में खोए हुए लग रहे हो विकास, छोड़ो उन ख्यालों को और परफॉर्मेंस पर ध्यान दो। After all, they are clients and they have paid for your performance”
“ओ ..ओके!”
रिंकी ने एक नजर मदमस्त सी होकर विकास से लिपटी एंजेला और लवली की तरफ डाली और फिर विकास को उसके हाल पर छोड़ कर मुस्कुराती हुई वहाँ से बाहर निकल गई।
इधर लवली ने विकास की चौड़ी छाती पर अपने दोनों हाथ रख कर उस गुलाब की पंखुड़ियों से सजे गद्देदार बेड पर धकेल दिया।
और अभी बेड पर मौजूद विकास संभला भी नहीं था कि एंजेला ने एक कीमती शराब की बोतल उस पर उड़ेलनी शुरू कर दी।
“इस नशीली शराब से हमारा मजा दोगुना हो उठेगा।”
कहते हुए एंजेला और लवली किसी भूखी बिल्लियों की तरह उछलकर बेड पर जा पहुँची और शराब से भीगे विकास के जिस्म पर अपने होंठ फिराने लगीं। दोनों अपनी जीभ और होठों की मदद से विकास के शरीर पर मौजूद शराब का मजा ले रही थीं और आहें भर रही थीं।
लवली आहें भरते हुए बोली, “ओ यू आर सो हॉट माय डियर! तुम्हारे हॉट जिस्म की छुअन से ही मेरी जोर मारती जवानी मैं आग लग गई है, डार्लिंग!””
एंजेला ने भी सिसकारियाँ भरते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता यह आग अब इस शराब से बुझेगी !”
एंजेला विकास के नङ्गे बदन पर अपना बदन रगड़ती हुई सिसकारी भरने लगी।
विकास भी आखिर इंसान था, वह कब तक दो जवान जिस्मों की गर्मी को सहकर ठंडा रह पाता, आखिर उसके भी जिस्म में सनसनाहट दौड़ने लगी।
उसने झपटकर दोनों तितलियों को अपनी बाजुओं में कस लिया और फिर बारी बारी से उनके होठों का रस वैसे ही पीने लगा जैसे कोई भँवरा फूलों से शहद को पीता है।
भाग 2
उस शानदार कमरे की हालत बता रही थी कि उसमें एक भयंकर तूफान आया हुआ था। एंजेला और लवली की हवस का वह तूफान जिसे विकास ने अकेले झेला था।
पहले लवली फिर एंजेला फिर लवली फिर एंजेला फिर लवली और फिर दोनों एक साथ, जाने कितनी बार विकास हवस के उस तूफान से दो चार हुआ था। हवस का वह तूफान पाँच घंटे के बाद थमा था और इस समय उस कमरे में पूरी तरह से शांति थी, ठीक वैसी ही शांति, जैसी तूफान के गुजर जाने के बाद होती है।
एंजेला और लवली दोनों विकास की छाती पर सिर रखकर ठीक वैसे ही सो रही थीं जैसे कोई बहुत दिनों का भूखा अपनी भूख मिट जाने के बाद सोता है।
दोनों के शरीर पर अभी भी कोई कपड़ा नहीं था और कपड़े की सुध तो उन्हें तब होती जब उन्हें अपनी सुध होती।
विकास की आँखों से नींद कोसों दूर थी, उसे कुछ घंटे पहले का वह समय याद आ रहा था जब वह रिंकी के कहने पर भारत से ऑस्ट्रेलिया आया था।
***
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के सैकड़ो sea beaches में से वह एक शानदार beach था। ऑस्ट्रेलिया के सभी sea beaches की तरह इस बीच की भी यह खासियत थी कि यहॉं पर जो भी मौजूद था, उसके शरीर पर कपड़ों की मात्रा कम, बहुत कम थी। फिर चाहे वह कोई शानदार फीमेल हो या जानदार मेल!
विकास भी इस beach के एक कोने में मौजूद था। उसके भी शरीर पर बाकियों की तरह उसी टाइप के कपड़े के सिवा कुछ नहीं था।
वह अपने हाथों को समुद्र की रेत पर गड़ा कर पुश अप कर रहा था। उसके ठीक नीचे रिंकी पीठ के बल लेटी हुई थी, कपड़ों के नाम पर उसके शरीर पर भी दो चिड़िया मात्रा थीं जो बड़ी मुश्किल से उसके यौवन को छुपाए हुए थीं, जैसे ही विकास का शरीर पुश अप के लिए नीचे आता, वैसे ही रिंकी उसके होठों पर एक जोरदार चुंबन अंकित कर देती थी। ऐसा बहुत देर से चल रहा था, आखिर विकास ने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया, उसने अपने शरीर को धम्म से नीचे लेटी हुई रिंकी के शरीर पर गिर जाने दिया।
रिंकी चीखी – “यह क्या कर रहे हो? मारोगे क्या मुझे? पूरे शरीर का वजन मुझ पर डाल दिया, उठो ऊपर से।”
“यह वजन तुम्हारे शरीर पर पहली बार डाल रहा हूँ क्या? बिस्तर पर तो ..!”
“अरे उस समय की बात और है स्वीटहार्ट! उस समय शरीर में एक ऐसी अनोखी तरंग.. एक ऐसा जोश भरा होता है कि पार्टनर का वजन कितना भी हो वह फूलों सा लगता है.. जबरदस्त आनंद की दुनिया में ले जाता है लेकिन इस समय तुम मेरे ऊपर से हटो।”
“लो!” कहते हुए विकास ने अपने शरीर को रिंकी के ऊपर से एक तरफ लुढ़क जाने दिया।
वह रेत पर लेटकर सूर्य स्नान का आनंद ले रहा था। तभी उसने रिंकी से वह सवाल किया था, “हमें ऑस्ट्रेलिया आए हुए दो दिन हो गए हैं और तुमने अभी तक मुझे कोई काम नहीं दिलवाया। तुमने तो कहा था कि तुम मेरी लाइफ बना दोगी।”
जवाब में रिंकी मुस्कुराई और beach पर तितलियों की तरह मंडराती हुई फीमेल्स की तरफ इशारा करती हुई बोली, “यह जो तुम beaches पर मंडराती हुई तितलियाँ देख रहे हो, यह तुम जैसे भँवरों का रस पीने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं, सारी दुनिया में मशहूर है कि ऑस्ट्रेलिया की लड़कियाँ मर्दों को पाने के लिए हमेशा बेताब रहती हैं, किसी भी कीमत पर।”
“मतलब तुम यहाँ मेरी कीमत लगवाने के लिए लेकर आई हो?”
रिंकी खिलखिलाकर बोल उठी, “सही समझे जानू! लेकिन जानते हो कीमत किसकी लगती है? उसी घोड़े की, जिसके शरीर का बॉडी स्ट्रक्चर टॉप क्लास हो! जिसका स्टैमिना वर्ल्ड क्लास हो और किस्मत से तुममें यह क्वालिटी कूट कूटकर भरी हुई है, यह बात मुझसे बेहतर और कोई नहीं जान सकता और तुम्हें यहाँ लाने का मेरा मकसद है कि हीरे की असली कीमत जौहरी की दुकान पर ही लगती है।”
“यानी ऑस्ट्रेलिया जोहरी और मैं हीरा।”
“यस, और देखना तुम जैसे हीरे को यहाँ ऐसी कीमत मिलेगी कि तुम्हारे सब दुख दर्द दूर हो जाएंगे! दौलत का ढेर लग जाएगा तुम्हारे सामने। फिर तुम अपनी सारी परेशानियों से छुटकारा पा सकोगे।”
दौलत की बात सुनकर विकास की आँखों में एक अलग चमक आ गई। वह उतावलेपन से बोल उठा, “लेकिन ऐसा होगा कब?”
“जल्द ही! मैंने सारी सेटिंग कर रखी है, बस किसी भी समय फोन की घंटी बज सकती है और हमारा बुलावा आ सकता है!”
तभी रिंकी के फोन की घंटी बज उठी।
“लो आ गया बुलावा!”
रिंकी ने झपटकर फोन पिक किया और दूसरी तरफ मौजूद शख्स से बातें करने में मशगूल हो गई। जल्द ही उसने अपनी बात खत्म की और लपककर विकास की गर्दन में बाहें डालकर लटक गई।
“ओह विकास! यू आर लकी! पहला दिन ही जबरदस्त है, तुम्हें एक साथ दो कस्टमर मिले हैं और रेट है 2000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर कस्टमर।”
विकास चौंकते हुए बोल उठा, “दो कस्टमर? और वह भी एक साथ ..!”
रिंकी समझाने लगी, “कस्टमर मत देखो मेरी जान! रेट देखो! 2000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर कस्टमर, एक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर इंडिया के 56 रुपए के बराबर होता है।”
“बट…!”
“नो बट नो सट और चलो जल्दी हमें सिडनी के फेमस ओपेरा हाउस के पास मौजूद एक विला में पहुँचना है, जहाँ हमें कस्टमर के रूप में एंजेला और लवली मिलने वाली हैं।”
***
“और इस तरह यह दोनों मुझे मिल गईं। रिंकी ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करवाकर इनसे मेरी फीस ले ली और मुझे इन दोनों के पास छोड़कर चली गई।
अब यह दोनों नींद से जागे तो मैं यहाँ से निकलूँ! साली दोनों मुझ पर लदकर सोई हुई हैं, इन्हें आराम से अपने शरीर से अलग हटाता हूँ और चुपचाप यहाँ से निकलता हूँ।”
उन दोनों से बचकर निकलने की कोशिश करके विकास ने मानों मुसीबत मोल ले ली। विकास के हिलने डुलने से दोनों की नींद खुल गई और दोनों एक बार फिर विकास के शरीर पर और भी ज्यादा लिपट गईं।
एंजेला उसके चौड़े सीने को बेतहाशा चूमती हुई बोली- “कहीं जा रहे हो डियर!”
विकास हड़बड़ाकर बोला, “न.. न.. नहीं तो!”
“तो फिर ऐसे गुमसुम क्यों हो? मेरे शरीर से खेलते क्यों नहीं?”
इतना कहकर एंजेला ने विकास का हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख लिया।
इधर उनींदी सी लवली धीरे से कसमसाई और विकास की जांघों की तरफ सरक गई।
विकास हड़बड़ाकर बोल उठा, “यह तुम क्या कर रही हो! अब सुबह होने वाली है, अब यह कहाँ अच्छा लगेगा।”
“मैं भी जानती हूँ माय लव कि सुबह की ताजगी पाने के लिए कोलगेट करना जरूरी है ना।”
कामुकता का खेल एक बार फिर शुरू हो गया और विकास चाह कर भी उसका विरोध नहीं कर सका क्योंकि इस कामुक खेल को खेलने के लिए उसने पैसा जो लिया था।
विकास खुद से ही बोला, “मैं इन्हें मना नहीं कर सकता क्योंकि मैं यहाँ खुद की मर्जी से आया हूँ, इन्होंने मुझे खरीदा है उन पैसों में जो मेरी पहुँच में कभी न थे…!”
भाग 3
“हाँ, मैं हूँ जिगोलो! हाँ वही जिगोलो, जो चंद पैसों के लिए अपने जिस्म का सौदा करता है। लेकिन यह सब करना मैंने कभी नहीं चाहा था और ना ही मैं पहले कभी ऐसा था। मुझे आज भी वह मनहूस दिन याद है, जिसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी और मुझे कहीं का नहीं छोड़ा।”
ऐसा लग रहा था जैसे विकास खुद से ही बातें करता चला जा रहा था।
फ्लैशबैक-
उस कमरे में बैठा हुआ एक अट्ठारह उन्नीस साल का लड़का बड़ी तन्मयता के साथ अपने सामने किताब रखे हुए पढ़ाई करने में व्यस्त था।
विकास किताब का पन्ना पलटते हुए बोला, “मनुष्य को अपने शरीर की तंदुरुस्ती के लिए सभी प्रकार के पौषक तत्वों की आवश्यकता रहती है। अगर शरीर मे किसी भी तरह की कमी रही तो आगे जाकर बीमारियों की वजह बनती है जैसे..”
विकास धीमी आवाज में पूरी तन्मयता के साथ पढ़ रहा था। तभी अचानक उसके कानों में कोई आवाज पड़ी।
“आह…. उफ्फ… शहह”
विकास हैरानी से इधर उधर देखने लगा।
विकास धीमी आवाज में बुदबुदाया, “यह कैसी आवाज है?”
लेकिन फिर अचानक आवाज आनी बंद हो गई। वह दोबारा अपनी किताब पढ़ने लगा।
विकास किताब पढ़ते हुए बुदबुदाने लगा, “शरीर की सभी नसों के दर्द और कंपन्न की मुख्य वजह होती है विटामिन बी 12 की कमी और इस कमी को पूरा करने के लिए हमें…”
अभी विकास ने इतना ही पढ़ा था कि तभी एक बार फिर उसके कानों में आवाज आई।
“उफ़्फ़फ़फ़… शहह.. छोड़ो!”
और इसी के साथ किसी महिला के रोने की धीमी आवाज उसके कानों में पड़ी। विकास के कान खड़े हो गए। ऐसा लगा, जैसे वह बड़े ध्यान से उस आवाज सुनने की कोशिश कर रहा हो।
एक बार फिर उसके कानों में आवाज पड़ी और ऐसा होते ही उसने एक झटके में अपनी किताब बंद की और तुरंत दरवाजे की तरफ लपका। उसने अपने रूम का दरवाजा खोला और भागते हुए कदमों से अपने कमरे के बगल में मौजूद कमरे तक जा पहुंचा।
आवाज उसी कमरे से आ रही थी। एक सेकंड के लिए विकास उस कमरे के दरवाजे पर ठिठककर खड़ा हो गया। लेकिन दूसरे ही पल जैसे ही एक बार फिर उसके कानों में आवाज पड़ी। उसने एक झटके में दरवाजा खोल दिया। और दरवाजा खुलते ही उसके सामने जो मंजर था। उसे देखकर उसकी आँखें चौड़ी होने लगी। ऐसा लगा जैसे कुछ बोलने के लिए उसने अपना मुँह खोला हो। लेकिन उसके मुँह से एक भी आवाज नहीं निकल पा रही थी।
“छोड़ो! मुझे छोड़ दो! प्लीज मुझे छोड़ दो! यह तुम क्या कर रहे हो? प्लीज ऐसा मत करो!”
एक औरत की आवाज सुनाई दी। सामने विकास की माँ बिस्तर पर एकदम नंगी पड़ी हुई थी और उसके ऊपर मौजूद था एक बिल्कुल काले रंग का सांड सरीखा आदमी। वह काफी लंबा और तगड़ा लग रहा था। उसके जिस्म पर एक भी कपड़ा मौजूद नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई काले रंग का नंगधड़ंग शैतान अपनी हैवानियत पर उतना आया हो।
उस शैतान की उंगलियों में जलती हुई सिगरेट फँसी हुई थी और रह रहकर वह सिगरेट बिस्तर पर पड़ी हुई औरत के बदन पर जगह जगह टच कर रहा था। जलती हुई सिगरेट टच होने से उस औरत के मुँह से घुटी सी चीज निकल रही थी।
विकास तेज आवाज में चिल्लाया, “बंद करो यह सब! यह सब क्या कर रहे हो तुम लोग? मैं कहता हूँ बंद करो!”
अचानक उस काले रंग के सांड और औरत की नजरें दरवाजे पर खड़े विकास पर गई तो औरत ने अपनी आंखें पूरी ताकत से बंद कर ली और चादर खींचकर अपना बदन ढ़ँकने की नाकाम कोशिश करने लगी।
जबकि काला सांड विकास को घूरने लगा। उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट आ गई।
“अबे हरामजादे! लगता है तुझे भी मरवाने का शौक चढ़ा है। आजा मुझे तो कोई दिक्कत नहीं है, तेरी माँ के साथ साथ तेरी हसरत भी पूरी कर दूँगा।”
जैसे ही उस आदमी ने ऐसा कहा। ऐसा लगा जैसे विकास के चेहरे पर लाल रंग पोत दिया गया हो। उसका जिस्म गुस्से के मारे काँपने लगा। उसने पास में ही पड़ी हुई एक शराब की बोतल उठाई और इससे पहले कि शराब की बोतल उस काले सांड के सिर पर फोड़ पाता। काले सांड ने झपटकर विकास का हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से एक भरपूर तमाचा उसके गाल पर दे मारा।
विकास चक्कर खाता हुआ फर्श पर गिर गया लेकिन पूरी तरह से गिर भी नहीं पाया क्योंकि काले आदमी के हाथों में उसका एक हाथ फँसा हुआ था।
“भूतनी के! लगता है कुछ ज्यादा ही खून उबाल मारने लगा है, साले! कुतिया के पिल्ले! मार मारकर तेरी चमड़ी उधेड़ दूँगा! निकल जा इस कमरे से। अभी तो तेरी माँ को ही ठोंक रहा हूँ। जल्दी ही तेरी बहन को भी जन्नत की सैर करवाऊँगा।”
जैसे ही विकास ने उसकी बात सुनी। वह हैरान रह गया। उसने हैरानी भरी नजरों से उसकी तरफ देखा और उठकर खड़ा हो गया।
फिर गुस्से में गुर्राया – “क्या कहा? क्या कहा तूने?”
विकास की बात सुनकर वह काला शैतान हँसने लगा।
“मैंने उसे अपने एक दोस्त को बेच दिया है। जल्द ही वह उसके साथ अपनी सुहागरात मनाएगा। तेरी बहन भी खुश हो जाएगी। अब जा भाग यहाँ से! क्या अपनी माँ की ठूंकाई होते हुए देखता रहेगा।”
मारे गुस्से के विकास थर-थर का काँपने लगा। उसने अपनी माँ की तरफ देखा। जो अभी भी अपनी आँखें बंद किए हुए रो रही थी।
विकास गुस्से में बोला, “शर्म आनी चाहिए तुम्हें, जो पापा के मरने के बाद इस जैसे शैतान के साथ शादी कर ली। वह भी बस इसलिए की यह आपका बचपन का प्यार था। थूँ है तुम्हारे ऊपर, देखो कितना कमीना इंसान है। पूरी बेशर्मी के साथ अपनी ही बेटी के बारे में कैसे कैसे शब्द बोल रहा है। सॉरी सॉरी! वह तो इसकी बेटी है ही नहीं। वह तो इसकी सौतेली बेटी है। भला सौतेली बेटी के बारे में कोई कैसे कुछ अच्छा सोच सकता है और यह तो पहले से एक नंबर का हरामी है। लेकिन अब ये जो तुमने रायता फैलाया है उसे तुम ही समेटोगी, मैं नहीं!”
कहने के साथ विकास ने एक जोरदार झटका दिया। जिससे उसका हाथ उस काले शैतान के हाथ से छूट गया। वह तुरंत तेजी से कमरे से बाहर की तरफ भागा।
काला आदमी उसे इस तरह भागते देखकर हैरान रह गया। वह बिना कोई कपड़ा पहने उछलकर पलंग से नीचे आ गया। उसने विकास को पकड़ना चाहा। लेकिन जब तक वह चौखट तक पहुँचता। तब तक एक तेज भड़ाक की आवाज हुई और ऐसा लगा जैसे वह कमरा बाहर से बंद कर दिया गया हो।
काला आदमी चिल्लाया- “अरे कुतिया के पिल्ले! दरवाजा खोल दे वरना इसे तोड़ने में मुझे जरा भी देर नहीं लगेगी।”
लेकिन उसके चिल्लाने का कोई असर नहीं हुआ। विकास को दरवाजा नहीं खोलना था तो उसने नहीं खोला।
भाग 4
कुछ दिन पहले-
विकास की माँ मालती तेजी से सड़क पार करती हुई सामने की एक गली में घुसती चली गई। उसके चेहरे पर परेशानी के भाव दिखाई दे रहे थे। गली के अंदर जाकर उसने एक घर के सामने दरवाजे पर हल्के हाथों से दस्तक दी। पहली बार दस्तक देने पर उधर से कोई जवाब नहीं आया। लेकिन जब मालती ने दो तीन बार हल्के हाथों से लगातार दरवाजा खटखटाया तो अंदर से जैसे किसी के दरवाजे की तरफ आने की आहट सुनाई दी।
“कौन है बाहर?” अंदर से एक भारी भरकम आवाज । जिसे सुनकर भी मालती ने कोई जवाब नहीं दिया। वह इधर उधर देखने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे वह खुद को लोगों की नजरों से छुपाना चाहती हो। उसने एक बार फिर से हल्के हाथों से दरवाजा खटखटाया
श्याम सिंह गुस्से में गुर्राते हुए बोल उठा, “कौन हरामजादे की औलाद परेशान कर रहा है। पूछने पर बताता क्यों नहीं?”
श्याम सिंह गुस्से में गुर्राया और एक झटके में दरवाजा खोल दिया। लेकिन जैसे ही उसकी नजर सामने खड़ी मालती पर गई। वह एकदम से चौंक उठा।
श्याम सिंह हैरानी से बोला, “तू? तू यहाँ क्या कर रही है?”
श्याम सिंह की बात का जवाब दिए बिना मालती एक झटके में कमरे के अंदर घुसती चली गई। श्याम सिंह हैरानी भरी नजरों से उसे देखता रह गया। कमरे में और कोई नहीं था और यह बात मालती को पहले से ही पता थी।
तभी श्याम सिंह दरवाजा बंद करके तुरंत कमरे में पलट गया। वह अभी वापस पलटा ही था कि मालती उसके सीने से चिपक गई। उसने कसकर श्याम सिंह को भींच लिया।
श्याम सिंह हक्का बक्का होकर बस देखता ही रह गया।
मालती रोते हुए बोली, “मैं बहुत अकेली पड़ गई है श्याम सिंह, मैं एकदम अकेली पड़ गई हूँ। अब तुम्हारे सिवा मेरा कोई और नहीं बचा।”
मालती ने कहा और सिसककर रोने लगी।
“जब मैं तुझसे शादी करना चाह रहा था। तब तो तू अपने बाप की आज्ञाकारी बनी हुई थी। और अब जब तेरा पति गुजर गया तो तुझे मेरी याद आ रही है।”
श्याम सिंह ने उसे एक झटके से अपने से अलग कर दिया और जलती हुई आँखों से उसे देखने लगा।
श्याम सिंह गुस्से में बोला, “बड़ी शिद्दत से मैंने तुझे प्यार किया था। लेकिन तू मेरे प्यार को ठुकराकर किसी और की लौंडिया बन गई। अब यहाँ क्या करने आई है?”
मालती रोते हुए बोली, “प्लीज श्याम सिंह! प्लीज समझो मेरी बात को, मैं मजबूर थी उस समय। एक औरत की मजबूरी तुम क्या जानो!”
कहते कहते उसने अपना पल्लू खींच लिया। जिससे मालती के भारी भारी स्तन साफ दिखाई देने लगे।
चालिसवाँ बसंत पार कर चुकी मालती पच्चीस साल की नवयुवती से कहीं ज्यादा सेक्सी दिखाई देती थी। उसका सांचे में ढ़ला हुआ जिस्म किसी की भी नियत खराब कर देने के लिए काफी था। देखने वाले उसे देखकर यह नहीं कह सकते थे कि वह दो बच्चों की माँ थी। श्याम सिंह की नजर जैसे ही मालती के उभरे हुए गदराए बदन पड़ी। ऐसा लगा जैसे वह सब कुछ भूल गया हो। उसकी आंखों में वासना का शैतान जैसे उठने लगा था। काला कलूटा श्याम सिंह छः फीट लंबा और भारी भरकम शरीर का मालिक था। सामने से देखने पर वह किसी शैतान से कम नहीं लगता था। वह धीमे धीमे कदमों से मालती की तरफ बढ़ने लगा। मालती यही तो चाहती थी। वह एक झटके में दो कदम पीछे हो गई और उसने तुरंत अपना पल्लू वापस खींचकर अपने खुले हुए बदन को ढंक लिया।
“श्याम! श्याम तुम कुछ बोलते क्यों नहीं? तुम तो मेरे बचपन के दोस्त हो। बोलो ना श्याम! तुम तो मुझे अकेला नहीं छोड़ोगे ना?”
श्याम सिंह लगातार आगे बढ़ता जा रहा था और मालती धीरे धीरे पीछे हटने लगी। अचानक श्याम सिंह किसी भूखे भेड़िए की तरह मालती के ऊपर झपटा और उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया।
श्याम सिंह जहरीली हँसी के साथ बोल उठा, “मैं तेरा साथ नहीं दूँगा बल्कि तुझे अपनी लौंडिया बनाऊँगा!”
और इसी के साथ वह जैसे पागल हो गया। उसने एक झटके में मालती के जिस्म से साड़ी खींच ली और उसी तेजी के साथ उसका ब्लाउज फाड़ कर उसके जिस्म से आजाद कर दिया। अब मालती के शरीर पर सिर्फ ब्रा थी और नीचे पेटिकोट।
उसके उभरे हुए उरोजों को देखकर श्याम सिंह जैसे पागल हो गया। उसने एक झटके में मालती को अपनी गोद में उठाया और ले जाकर बिस्तर पर लटक दिया। मालती बस दिखाने के लिए उसका विरोध कर रही थी।
श्याम सिंह उसे पागलों की तरह चूमने लगा। उसका एक हाथ उसके उभरे हुए उरोजों पर था और दूसरा हाथ बाकी बदन पर घूम रहा था। जल्द ही मालती के मुँह से भी सिसकारियाँ निकलने लगी।
वह जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी और ठीक यही वह पल था। जब श्याम सिंह उसके ऊपर सवार होता चला गया। उसने मालती के बदन पर मौजूद बाकी कपड़े भी खींच निकाले। अब दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र एक दूसरे से लिपट झपट रहे थे। जल्दी ही पूरा कमरा उनकी मादक सिसकारियों से भर उठा। गर्म साँसों से कमरे का तापमान बदलने लगा। वासना का भयानक तूफान जब शांत हुआ तो पसीने से बुरी तरह से नहाए हुए दोनों बिस्तर पर पड़े हाँफ रहे थे। कुछ देर बाद जब दोनों सामान्य हुए तो मालती श्याम सिंह के चौड़े सीने पर अपना हाथ फेर रही थी।
मालती बुदबुदाते हुए बोली, “श्याम! तुम तो मुझे नहीं छोड़ोगे ना?”
श्याम सिंह ने मालती की तरफ देखा। उसके चेहरे पर जैसे शैतानी मुस्कान दिखाई दे रही थी।
श्याम सिंह ठहाके लगाते हुए बोला, “तेरे जैसी हसीना को छोड़ने वाला महापागल होगा।”
मालती की आँखों में चमक बढ़ गई।
“इसका मतलब तुम मेरा हाथ थामने के लिए तैयार हो।”
श्याम सिंह जहरीली मुस्कुराहट के साथ बोल उठा, “तू गलतफहमी की शिकार है। मैं तेरा हाथ नहीं, तेरी पूरी जवानी चूसने के लिए तैयार हूँ।”
इतना कहकर वह जोर-जोर से हँसने लगा।
मालती हैरानी भरी आवाज में बोली, “मतलब! मतलब, मैं समझी नहीं?”
श्याम सिंह मुस्कुराते हुए बोला, “अब क्या यह भी तुझे समझाना पड़ेगा कि तू जो कहेगी मैं करने को तैयार हूँ लेकिन तुझे मेरी लौंडिया बनकर रहना पड़ेगा।”
मालती भी तो यही चाहती थी क्योंकि उसका पति असमय गुजर गया था। उसके पास कोई और सहारा नहीं था। अपना और अपने बच्चों का ख्याल रखने के लिए उसे किसी की जरूरत थी और यह जरूरत पूरी की उसके बचपन के दोस्त श्याम सिंह ने। जो उसे बहुत चाहता था लेकिन मालती के पिता की वजह से वे दोनों शादी नहीं कर पाए। अभी यह लोग अपने बिस्तर पर पड़े हुए बातें कर ही रहे थे कि तभी बाहर से किसी ने जोर से दरवाजा खटखटाया।
ऐसा होते ही मालती चौंककर उठ बैठी। लेकिन श्याम सिंह के ऊपर जैसे कुछ खास असर नहीं हुआ। वह तेज आवाज में बोल उठा, “कौन है बे?”
भाग 5
मालती हड़बड़ा कर बिस्तर से उठ बैठी थी। फिर जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन रही थी और इससे पहले कि श्याम सिंह उठ पाता। दरवाजा एक बार फिर खटखटाया गया।
“साला! किस हरामी की मौत आई है, जो इस तरह परेशान करने आ गया।” बड़बड़ाता हुआ श्याम सिंह बिना कपड़े पहने ही उठकर दरवाजे तक आया। उसने एक झटके से दरवाजा खोल दिया। सामने देखा तो देखता ही रह गया।
मालती की सोलह – सत्रह साल की बेटी खुशबू खड़ी थी। वह अपनी माँ से कहीं इतना ज्यादा खूबसूरत थी। श्याम सिंह उसे ऐसे घूरने लगा जैसे उसने कभी कोई लड़की ना देखी हो।
उधर खुशबू श्याम सिंह की हालत देखकर दूसरी तरफ देखने लगी। इस समय इस समय श्याम सिंह केवल अंडरवियर में था।
श्याम सिंह मुस्कुराते हुए बोला, “क्या हुआ? तू वहाँ क्यों खड़ी है? आजा अंदर आजा!”
“क्या मेरी माँ यहाँ आई है? मैंने उन्हें इधर ही आते देखा था और कुछ लोगों से पूछा तो उन्होंने भी यही कहा कि वे इसी गली में आई थी।”
श्याम सिंह मुस्कुराते हुए बोला, “हाँ, आई तो है लेकिन अब तू भी आजा!”
खुशबू जल्दी से बोल उठी, “नहीं….नहीं.. मेरी माँ को बुलाओ। मुझे बहुत जरूरी काम है।”
इससे पहले कि श्याम सिंह या खुशबू और कुछ बोलते। तभी पीछे से मालती दरवाजे पर आ गई।
खुशबू तेज आवाज में चिल्लाई, “माँ! आप यहाँ इसके घर में क्या कर रही हो?”
और इसी के साथ उसने अपनी माँ का हाथ पकड़कर खींच लिया और तेजी से गली के बाहर निकलती चली गई। उधर श्याम सिंह ने मुस्कुराते हुए अपना फोन उठाया और किसी को कॉल कर दिया। जल्द ही उधर से कॉल एक्सेप्ट कर ली गई।
उसने फोन पर कहा, “तुम्हें कड़क माल की तलब लगी हुई थी ना? वह आज मेरे सामने से गुजरी है। अगर पाना चाहते हो तो कीमत भी कड़क चुकानी पड़ेगी।”
और इसी के साथ श्याम सिंह ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। वह गली के मोड़ तक मालती और उसकी बेटी खुशबू को जाते हुए निहारता रहा। उन दोनों की लचकती हुई कमर उसे मदहोश कर रही थी।
वह मन ही मन जाने कौन से सपने देख रहा था। कुछ दिनों बाद ही श्याम सिंह ने मालती से एक मंदिर में ऑफिशियली शादी कर ली। अब श्याम सिंह ही मालती के घर का मुखिया था।
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विकास तेज आवाज में चिल्लाते हुए बोला, “खुशबू… खुशबू.. तुम कहाँ हो? कहाँ हो तुम? जल्दी से बाहर आओ!”
विकास चिल्लाया तो हकबकाती हुई खुशबू अपने कमरे से बाहर निकल आई।
खुशबू हैरानी भरी आवाज में बोली, “क्या हुआ? क्या हुआ विकास भैया? आप इस तरह से चिल्ला क्यों रहे हो?”
हैरानी भरी नजरों से खुशबू ने विकास की तरफ देखा और विकास जैसे पागलों की तरह झपटकर उसके पास पहुँचा।
“जितनी जल्दी हो सके अपना जरूरी सामान उठा ले। हमें यहां से तुरंत निकलना होगा।”
खुशबू ने हड़बड़ाकर पूछा, “लेकिन क्यों? लेकिन क्यों भैया? ऐसा क्या हो गया?”
विकास तेज आवाज में बोला, “हमारे पास बात करने का समय नहीं है। जितना कह रहा हूँ, जल्दी करो।”
उधर पीछे से मालती के कमरे के अंदर से लगातार दरवाजे पर जोर जोर से ठोकर पड़ रही थी।
खुशबू की नजर उधर गई।
खुशबू हैरानी भरी आवाज में चीखी, “अरे यह क्या? माँ के कमरे का दरवाजा आपने बाहर से बंद क्यों कर रखा है?”
खुशबू की बात सुनते ही विकास जैसे पागल हो गया। उसने बड़ी तेजी से खुशबू को उसके कमरे की तरफ धकेल दिया।
विकास चिल्लाया, “जितना कहता हूँ, उतना कर। जल्दी कर, हमारे पास समय बिल्कुल भी नहीं है।”
विकास का आक्रमक चेहरा देखकर खुशबू घबरा गई। वह जल्दी जल्दी अपने कपड़े समेटने लगी। विकास ने घूम कर मालती के कमरे के दरवाजे की तरफ देखा।
दरवाजा जोर से हिल रहा था। हर धक्के के साथ उसके पुर्जे ढीले पड़ रहे थे। अचानक एक जोर का धक्का लगा। जिससे दरवाजा बुरी तरह से हिल गया।
विकास ने मन ही मन सोचा, “अगर मैंने और देर की तो यह शैतान दरवाजा तोड़कर बाहर आ जाएगा। मुझे देर नहीं करनी चाहिए।”
वह भागता हुआ खुशबू के कमरे के अंदर घुस गया और उसने तुरंत खुशबू का हाथ पकड़ा और बिल्कुल दीवानों की तरह उसे खींचता हुआ बाहर लेकर आया।
तभी एक और झटका दरवाजे पर लगा। दरवाजा बिल्कुल इस तरीके से हिला जैसे अभी टूटकर बिखर जाएगा।
विकास ने पीछे देखने में अपना समय बर्बाद नहीं किया और वह तेजी से खुशबू का हाथ थामे हुए घर के बाहर निकलता चला गया। घर के बाहर निकलने के बाद भी उसने एक बार फिर बाहर से दरवाजा बंद किया और गली को पार करते हुए मुख्य सड़क पर आ गया।
मुख्य सड़क पर आते ही उसने एक ऑटो को हाथ दिया। ऑटो के रुकते ही खुशबू को अंदर धकेलता हुआ विकास तुरंत पिछली सीट पर बैठ गया।
ऑटो वाले ने पूछा, “कहाँ जाना है भैया?”
हड़बड़ाए हुए विकास को अचानक से कुछ समझ ही नहीं आया।
ऑटो वाले ने फिर से पूछा, “क्या हुआ भैया? कुछ बताएंगे कहाँ जाना है या ऐसे ही ऑटो में बैठने का शौक लगा था।”
विकास हड़बड़ाकर बोला- “संदीप…संदीप होटल चलो!”
ऑटो वाले ने तुरंत ऑटो आगे बढ़ा दी। उधर दूसरी तरफ श्याम सिंह कमरे के अंदर से लगातार दरवाजे पर ठोकर मार रहा था। दरवाजा थोड़ा मजबूत था। लेकिन उसके भारी भरकम शरीर की ताकत भी बहुत ज्यादा थी। लगातार मार मारकर उसने दरवाजे के कब्जे ढ़ीले कर डाले थे। आखिर में उसने पूरी ताकत लगाकर एक जोर का धक्का दरवाजे पर मारा तो दरवाजा टूटकर सामने जमीन पर ढेर हो गया।
वह तुरंत आंधी तूफान की तरह उस घर में विकास को ढूंढने लगा। लेकिन विकास उसे तब मिलता जब वहाँ मौजूद होता।
आखिर में वह मुख्य द्वार की तरफ बढ़ा। मुख्य द्वार भी बाहर से बंद था।
श्याम सिंह गुस्से में बड़बड़ाया, “साला! हरामजादा! यह तो बड़ा वाला हरामी निकला! लड़की को लेकर निकल गया। मुझे कुछ करना पड़ेगा वरना मेरे हाथ से मोटा तगड़ा माल निकल जाएगा। इस कमीने के सामने अपना मुँह खोलकर मैंने गलती कर दी। लेकिन कोई बात नहीं जल्द ही वह छोकरी वापस मेरे कब्जे में होगी।”
कहने के साथ उसने अपनी जेब से फोन निकाल लिया और कोई नंबर डायल कर दिया। उधर उसी के पीछे घबराई हुई मालती बाहर निकलकर आई।
उसने श्याम सिंह की बातें सुन ली थी। श्याम सिंह को फोन पर किसी से बातें करते देख उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक से यह सब हो क्या गया। ऐसा लग रहा था जैसे उसकी पूरी फैमिली बिखरने वाली थी या फिर बिखर ही चुकी थी।
भाग 6
ऑटो संदीप होटल के ठीक सामने आकर रुका। जैसे ही ऑटो रुका, विकास तुरंत ऑटो से बाहर निकल गया। उसके पीछे उसकी बहन खुशबू भी निकल आई।
विकास ने ऑटो वाले को पैसे दिए और अपनी बहन का हाथ पकड़कर संदीप होटल के सामने जाकर खड़ा हो गया।
खुशबू घबराते हुए बोली- “भैया आपको हुआ क्या है? आप इस तरह बिहेव क्यों कर रहे हैं?”
विकास ने पहली बार अपनी बहन की तरफ गौर से देखा। उसके चेहरे पर उसके लिए ढेर सारा प्यार उमड़ रहा था।
“क्योंकि वह जगह हमारे लिए सेफ नहीं थी। हमारी माँ अब हमारी नहीं रही। उसने एक ऐसे आदमी से शादी कर ली है, जो हमें अपनी संतान कभी नहीं मानेगा। वह माँ को अपनी पत्नी तक नहीं मानता। अगर मैं वहाँ से तुम्हें लेकर ना आया होता तो हम बहुत बड़ी मुसीबत में फँसने वाले थे। लेकिन तुम यह मत पूछना कि कैसी मुसीबत में!”
“लेकिन अब हम जाएँगे कहाँ?”
विकास ने उसे समझाया- “तुम फ़िक्र मत करो। मैं कोई ना कोई जुगाड़ जरूर कर लूँगा। चलो हम पापा के दोस्त कैलाश अंकल के पास चलते हैं। वे जरूर हमारी मदद करेंगे।”
विकास खुशबू का हाथ पकड़े हुए संदीप होटल के अंदर उस जगह जा पहुँचा। जहाँ मिस्टर कैलाश का केबिन बना हुआ था। जैसे ही विकास मिस्टर कैलाश के केबिन के गेट पर पहुँचा। मिस्टर कैलाश की नजर उस पर पड़ गई। वे उसे देखते ही खुश हो गए।
मिस्टर कैलाश मुस्कुराते हुए बोले, “अरे विकास बेटे तुम? आओ आओ! यहाँ कैसे आना हुआ?”
विकास ने खुशबू को वहीं बाहर खड़े रहने का इशारा किया और खुद केबिन के अंदर चला गया।
मिस्टर कैलाश ने जल्दी से कहा, “अरे! गुड़िया को बाहर क्या छोड़ दिया? उसे भी ले आते!”
मिस्टर कैलाश के सामने पहुँचकर आखिर विकास की आँखों से आंसू लुढ़कने लगे। वह मिस्टर कैलाश के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गया। विकास का यह हाल देखकर मिस्टर कैलाश हड़बड़ा गए। वे तुरंत उठ खड़े हुए।
मिस्टर कैलाश विकास के पापा के अच्छे दोस्त हुआ करते थे। वे एक भले इंसान थे। विकास कई बार उनसे मिल चुका था और उनकी सज्जनता से बहुत अच्छे से परिचित था। इसी वजह से वह सीधा उनके पास आया था।
मिस्टर कैलाश ने हड़बड़ाते हुए पूछा – “अरे बेटे! क्या हुआ तुम्हें? तुम रो क्यों रहे हो?”
वे उठकर विकास के पास आए। उन्होंने रुमाल से विकास की आँखें पोंछी।
विकास रुआँसी आवाज में बोला, “अंकल! हम आपके पास हेल्प लेने के लिए आए हैं। प्लीज आप हमारी हेल्प कीजिए। कुछ नहीं तो पापा से आपकी दोस्ती के वास्ते ही कर दीजिए।”
मिस्टर कैलाश ने कहा, “अरे विकास! क्या हुआ तुम्हें? यह तुम कैसी बातें कर रहे हो? बोलो क्या हुआ? मैं तुम्हारी हेल्प जरूर करूँगा। लेकिन पहले बताओ तो सही!”
“अंकल, आपको पता ही है, पापा की डैथ के बाद मम्मी ने श्याम सिंह नाम के आदमी से शादी कर ली थी। ताकि हम लोगों को कोई दिक्कत ना हो और हमारा पालन पोषण अच्छे से हो। लेकिन वह श्याम सिंह नाम का आदमी एक नंबर का कुत्ता है। वह मुझ पर और मेरी बहन पर गलत नजर रखता है। उसने मेरी बहन की किसी गलत आदमी से सौदेबाजी की है। इसलिए मैं घर से भाग कर आपके पास आया हूँ। अंकल, मेरी मदद कीजिए।”
मिस्टर कैलाश ने जब विकास की यह बात सुनी तो वे सोच में पड़ गए। उनके चेहरे पर परेशानी के भाव दिखाई देने लगे। उन्होंने घूम कर केबिन के बाहर खड़ी खुशबू की तरफ देखा। वह बेचारी खुद में सिमटी हुई इधर उधर देख रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसे केबिन के अंदर की बातें सुनाई नहीं दे रही हो।
मिस्टर कैलाश ने विकास के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “देखो बेटे, तुम चिंता मत करो सब कुछ अच्छा हो जाएगा। और चलो पहले फ्रेश हो जाओ और कुछ खा लो। मुझसे जितना हो सकेगा मैं तुम्हारी मदद करूंगा।”
मिस्टर कैलाश ने अपने हल्के हाथों से विकास का कंधा थपथपाते हुए कहा। उनकी बात सुनकर विकास को कुछ राहत महसूस हुई।
“थैंक यू अंकल! मुझे पता था आप मेरी हेल्प जरुर करेंगे। आप बहुत अच्छे इंसान हैं। हर कोई आपके जैसा नहीं होता।”
“चलो, अब जल्दी से फ्रेश हो जाओ। उसके बाद कुछ खा पी लो। फिर हम बातें करते हैं कि आगे क्या करना है।”
मिस्टर कैलाश की बात सुनकर विकास अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ। वह बाहर आया और अपनी बहन के साथ होटल के अंदर चले गया। होटल में ही फ्रेश होकर उन दोनों ने खाना खा लिया। कुछ देर बाद मिस्टर कैलाश खुद ही उसके पास आ पहुँचे और बोले, “देखो विकास, तुम मेरे बेटे जैसे हो लेकिन यह मेरा बिजनेस है। इसलिए अगर मैं तुम्हारी हेल्प करूँगा तो तुम्हें भी इसके बदले कुछ ना कुछ करना होगा। ताकि तुम्हें आगे चलकर यह ना लगे कि मैंने तुम्हारे ऊपर कोई एहसान किया।”
मिस्टर कैलाश ने जब यह कहा तो विकास ने गौर से उनकी तरफ देखा। वह उनकी बात से बिल्कुल सहमत दिखाई दे रहा था।
विकास ने मुस्कुराते हुए कहा, “बताइए ना अंकल! आप जो भी कहेंगे मैं करने के लिए तैयार हूँ। बस हमें एक छत की जरूरत है ताकि हम खुद को सुरक्षित रख सके।”
मिस्टर कैलाश मुस्कुराते हुए बोले- “तुम आज से यहीं होटल के ही एक रूम में रह सकते हो और इसके बदले में तुम्हें होटल के स्टाफ के साथ पार्ट टाइम कुछ काम भी करते रहना होगा। बाकी अभी हमारा होटल इतना फेमस नहीं है वरना मैं तुम्हें यहीं परमानेंट काम पर रख लेता। तुम्हें अपनी रोजी चलाने के लिए कोई और काम भी ढूँढना पड़ेगा। और इसमें भी मैं तुम्हारी मदद करूँगा। लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम खुद भी कोशिश करते रहो ताकि अपने बल पर कुछ कर सको। तुम्हें किसी के सहारे की जरूरत ना पड़े।”
चेहरे पर मुस्कान लिए मिस्टर कैलाश ने जब यह बात कही तो विकास भी खुश हो गया। वह भी ठीक ऐसा ही सोच रहा था।
“थैंक यू अंकल! मुझे मंजूर है, मैं जल्द ही कोई ना कोई काम ढूँढ लूँगा।”
“ऑल द बेस्ट बेटे!”
और इसी के साथ उन्होंने रूम की चाबी विकास को दे दी। वह अपनी बहन के साथ कमरे में आया और सब कुछ सेट करने के बाद उसने खुशबू की तरफ देखा। खुशबू रुआँसी हो रही थी। उसने उसे अपने गले से लगा लिया।
“चिंता मत कर गुड़िया! मैं सब कुछ ठीक कर दूँगा। तू बिल्कुल भी टेंशन मत ले।”
खुशबू विकास के गले लगकर सिसक रही थी। विकास उसे चुप कराने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद विकास ने खुशबू को अपना ख्याल रखने का कहा और खुद होटल से बाहर निकल गया। अब उसे किसी ऐसे काम की सख्त जरूरत थी। जिससे वह अपनी रोजी-रोटी चला सके।
भाग 7
“साली! हरामजादी! यह दोनों उस हरामी की नाजायज औलाद थे। और तेरे देखते ही देखते घर से भाग गए और तू कुछ भी नहीं कर पाई।”
श्याम सिंह कॉल पर बातें करने के बाद जैसे ही पीछे घूमा। उसने अपने सामने मालती को खड़े पाया और उसे अपने सामने देखते ही वह उस पर बरस पड़ा।
मालती गुस्से में बोली- “मुझे नहीं पता था श्याम सिंह, कि तू इतना नीच और पापी निकलेगा। भले ही वह तेरी सौतेली बेटी थी लेकिन थी तो बेटी ही ना! तू अपनी ही बेटी का सौदा करने निकल पड़ा। थूँ है तेरे ऊपर!”
और इतना कहते कहते मालती ने वाकई श्याम सिंह के चेहरे पर थूँक दिया। एक मिनट के लिए श्याम सिंह भी हड़बड़ा गया। लेकिन दूसरे ही पल उसका एक वजनदार झापड़ मालती के चेहरे पर पड़ा।
“हरामजादी! मैंने तुझसे शादी क्या कर ली, तू तो मुझे वाकई का परमेश्वर समझने लगी। रुक, अभी तुझे बताता हूँ कि तेरे जैसी कुतिया का क्या हाल होना चाहिए! अब तक तो मैं तुझसे बहुत प्यार और नरमी से पेश आता रहा हूँ, जिसका नतीजा यह निकला कि तू दिन ब दिन मेरे सिर पर चढ़ती जा रही है।”
इतना कहने के साथ श्याम सिंह ने झपटकर मालती के बाल अपने मुट्ठी में कस लिए और एक झटके में उसे अपनी तरफ घसीट लिया।
“छोड़ दे कुत्ते! छोड़ दे! छोड़ दे मुझे!”
मालती चीखती चिल्लाती रही लेकिन श्याम सिंह पर जैसे उसका कोई असर ही नहीं हुआ। वह मालती को बालों से पकड़कर घसीटता हुआ वापस बेडरूम में ले आया और फर्श पर ही पटक दिया।
श्याम सिंह जहरीली आवाज में फुंफकारा, “तेरा असली मजा तो मैंने आज तक लिया ही नहीं। जबकि शादी किए हुए हफ्ते बीत चुके हैं।”
कहने के साथ श्याम सिंह ने अपने मजबूत हाथों से मालती के कपड़े एक झटके में फाड़ डाले और तुरंत ही उसे पलटकर पेट के बल लेटा दिया। उसने तुरंत अपने सारे कपड़े उतार डाले और उसके बाल किसी घोड़ी की लगाम की तरह पकड़ लिए। अब वह उससे एनल सेक्स करने के लिए पूरी तरह से रेडी था।
उसने एक तेज झटका दिया। जिससे मालती के मुँह से तेज चीख निकल गई। उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। लेकिन इन आंसुओं का श्याम सिंह पर कोई असर नहीं पड़ा। वह लगातार झटके पर झटका देता जा रहा था और मालती के मुँह से एक के बाद एक तेज चीखें निकलती जा रही थी। नीचे पूरा फर्श ख़ून से लाल होता जा रहा था।
श्याम सिंह जोर से धक्का देते हुए – “कैसा लग रहा है मेरी रानी!”
मालती के बाल उसने अपनी मुट्ठियों में पूरी ताकत से कस रखे थे। हर झटके के साथ वह उसके बाल बहुत बुरी तरह से पीछे की तरफ खींच रहा था। मालती रोते रोते अब थक चुकी थी। उसका पूरा चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था। लेकिन उस शैतान को उस पर जरा भी रहम नहीं आ रहा था।
*****
विकास अपनी पीठ पर एक बैग टांगे बाइक से तेजी से मुख्य सड़क से उतरकर एक गली में बढ़ता चला जा रहा था। उसकी पोशाक से ही लग रहा था कि उसे डिलीवरी बॉय का कोई अच्छा सा काम मिल गया था और वह डिलीवरी करने जा रहा था।
“कैलाश अंकल कितने अच्छे हैं। उन्होंने न केवल अपने होटल में हम दोनों भाई बहनों के लिए रूम दिया बल्कि आने जाने के लिए यह बाइक भी उपलब्ध करवा दी। अगर उन्होंने अपनी बाइक ना दी होती तो मुझे यह जॉब भी नही मिलती।”
मन ही मन सोचता हुआ विकास गली में बाइक दौड़ाता चला जा रहा था। उसने गली के सबसे अंतिम छोर पर एक घर के सामने अपनी बाइक रोक दी और बाइक से उतरकर उस घर की डोरबेल बजाई।
पहली डोरबेल पर ही अंदर से किसी के आने की आवाज हुई और जल्दी ही दरवाजा खोल दिया गया।
सामने एक बला की खूबसूरत लड़की खड़ी थी। जो बड़ी ही अजीब नजरों से विकास को देख रही थी।
विकास मुस्कुराते हुए बोला, “मैंम यह रहा आपका ऑर्डर! आपने आलू पराठें के साथ पनीर ऑर्डर किया था!”
लड़की मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ, बिल्कुल हमने ही ऑर्डर किया था।”
उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान दिखाई दे रही थी। लड़की दरवाजे से पीछे हट गई। ऐसा लग रहा था जैसे वह विकास को अंदर आने देना चाहती थी लेकिन विकास ने आर्डर उसके आगे कर दिया।
“यह लीजिए आपका ऑर्डर और प्लीज जल्दी से पेमेंट कर दीजिए! मेरे पास समय बहुत कम है!”
विकास ने जैसे ही पैकेट आगे बढ़ाया। उस लड़की ने पैकेट पकड़ने की जगह विकास का हाथ पकड़कर तेजी से अंदर खींच लिया। असावधान सा विकास लड़खड़ाता हुआ कमरे में आकर गिरा। वह एक झटके में उठकर खड़ा हो गया।
विकास हड़बड़ाते हुए बोल उठा, “अरे! यह क्या बद्तमीजी है? आप अपना आर्डर लीजिए और पेमेंट कीजिए!”
ना चाहते हुए भी विकास अपने ऊपर कंट्रोल नहीं रख सका। लेकिन यह देखकर वह हैरान था कि वह लड़की बराबर मुस्कुराए जा रही थी। जैसे ही विकास खड़ा हुआ। वह उसके शरीर से चिपक गई और अपना हाथ उसके बदन पर फिराने लगी। उसकी आँखों में अजीब सा नशा दिखाई दे रहा था। उधर विकास अपने आप को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन लड़की जैसे जोंक की तरह उससे चिपकती जा रही थी।
विकास हड़बड़ाकर बोला, “ मैम! यह आप क्या कर रहीं हैं। मेरी पेमेंट कीजिए और मुझे जाने दीजिए। मुझे और भी ऑर्डर डिलीवर करने हैं।”
लड़की मुस्कुराते हुए बोली- “तुम्हें छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है। तुम्हारे जैसा कड़क माल बहुत कम दिखाई देता है। जब मुझे ऐसा मौका हासिल हुआ है तो मैं तुम्हें किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने वाली। तुम पैसों की टेंशन मत लो, मैं तुम्हें बहुत पैसे दूँगी। बस तुम मुझे खुश कर दो।”
उसने एक झटके में अपने एक हाथ से दरवाजा बंद कर दिया। अब वह विकास के कपड़े उतारने की कोशिश करने लगी। जबकि विकास लगातार उसे रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहा था।
अचानक लड़की ने एक झटके में विकास की पेंट में हाथ डाल दिया और ऐसा होते ही विकास बड़ी तरह से हकबका गया। उसने लड़की को जोर का धक्का दिया। इससे लड़की सामने दीवार से टकराते टकराते बची और फर्श पर जा गिरी। उसके फर्श पर गिरते ही विकास तेजी से दरवाजे की तरफ लपका। वह वहाँ से तुरंत भाग जाना चाहता था। लेकिन शायद यह इतना आसान नहीं होने वाला था।
भाग 8
विकास एक झटके में ही घर से बाहर निकलता चला गया। उसे अब पेमेंट लेने की भी परवाह नहीं थी। उधर फर्श पर पड़ी हुई लड़की आग्नेय नेत्रों से उसे बाहर निकलता हुआ देख रही थी। वह भी एक झटके में उठकर खड़ी हो गई।
लड़की मन ही मन बुदबुदा उठी, “सच ही कहा है किसी ने कि जिसे इज्जत मिलती है, साला उसे उसकी कदर ही नहीं होती। वरना तो कितने ही हरामजादे सड़कों पर लार टपकाते हुए घूमते रहते हैं। अब तो मैं इसे छोड़ने वाली नहीं। देखती हूँ, कहाँ तक भागता है।”
कहने के साथ उस लड़की ने तुरंत पास की टेबल पर रखा हुआ अपना मोबाइल फोन उठा लिया और किसी का नंबर डायल कर दिया।
उधर दूसरी तरफ बाइक दौड़ाता हुआ विकास रेस्टोरेंट की तरफ बढ़ता चला जा रहा था।
“नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैं इतना नीच नहीं हूँ। कुछ भी हो जाए मैं इस लड़की की शिकायत रेस्टोरेंट के मालिक से करके रहूँगा। मेरे साथ बद्तमीज़ी हुई है। रेस्टोरेंट का मालिक जरूर कुछ ना कुछ करेगा।”
यही सब सोचता हुआ बाइक दौड़ाता विकास रेस्टोरेंट पहुँच गया। उसने बाइक पार्किंग में लगाई और तेज कदमों से चलता हुआ रेस्टोरेंट मालिक के केबिन तक जा पहुँचा। उसका पूरा चेहरा लाल हुआ पड़ा था। साँस काफी तेज गति से चल रही थी। लेकिन जब उसकी नजर केबिन के अंदर बैठे रेस्टोरेंट के मालिक पड़ी तो ऐसा लगा जैसे उसके होश ही उड़ गए।
अपने कान पर फोन लगाए हुए रेस्टोरेंट का मालिक विकास को ही घूर रहा था। उसके चेहरे पर दौड़ रहे हाव-भाव साफ बता रहे थे कि वह विकास से बहुत बुरी तरह नाराज था।
मालिक गुस्से में गुर्राया, “यह सब क्या है? तुम्हें जरा भी तमीज नहीं है कि कस्टमर से कैसे पेश आना चाहिए। आज तुम्हारा पहला दिन है और तुमने पहले दिन ही हमारी रेपुटेशन की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी।”
मालिक की दहाड़ सुनकर एक पल के लिए विकास हक्का-बक्का अपनी जगह जड़ होकर खड़ा रह गया लेकिन फिर दूसरे ही पल,
विकास हड़बड़ाते हुए बोला- “सर… सर मैंने नहीं बल्कि उस लड़की ने मेरे साथ बदतमीजी करने की कोशिश की। वह मुझसे छेड़छाड़ कर रही थी। अजीब तरीके से छू रही थी। उसके इरादे बिल्कुल भी नेक नहीं थे।”
“अबे साले! तू बोल क्या रहा है पहले यह तो डिसाइड कर ले! तू लड़का है या लड़की? तुझे कोई लड़की कैसे छेड़ सकती है? हद है! अगर झूठ ही बोलना था तो कम से कम ढंग का झूठ तो बोलना सीख ले।”
“सर…सर मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ।”
मालिक भड़कते हुए बोला- “मेरे पास तुझसे बकवास करने का टाइम नहीं है। अगर उस लड़की ने हमारी कंप्लेंट कर दी तो हमें काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। अभी तुम जो रायता फैला कर आए हो। उसे तुम्हें ही समेटना होगा। वापस जाओ और उससे माफी मांगो। वह हमारी पुरानी क्लाइंट है और काफी पावरफुल भी। अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो इन सब चीजों की जिम्मेदारी तुम्हारे माथे आएगी और तुम काम छोड़कर यहाँ से भाग भी नहीं सकते। अगर तुमने ऐसा कुछ करने की कोशिश की तो तुम्हारी कंप्लेंट तुरंत पुलिस में की जाएगी। अब चलो यहां से निकलो।”
‘मरता क्या न करता!’ की तर्ज पर विकास भारी कदमों से रेस्टोरेंट के बाहर निकल गया। उसने घूम कर रेस्टोरेंट की तरफ इस आशा से देखा कि शायद मालिक का दिल पसीज जाए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वह यहां से भाग भी नहीं सकता था। आईडी प्रूफ तक रेस्टोरेंट के मालिक ने पहले ही जमा करवा रखी थी। आखिरकार मजबूरन उसे वापस उस कस्टमर के पास जाना पड़ा। वह जैसे उसी का इंतजार कर रही थी। दरवाजे पर खड़ी वह खूबसूरत लड़की शैतानी मुस्कुराहट के साथ विकास को देख रही थी। दरवाजे के पास पहुंचते ही विकास ने बाइक रोक दी और भारी मन से बाइक से उतर कर लड़की के पास जा पहुंचा।
लड़की मुस्कुराते हुए बोली, “बड़े हरामी हो यार। जब यहाँ प्यार से समझा रही थी तो समझ नहीं आया। अब देख ली मेरी पावर।”
और इसी के साथ उसने एक बार फिर उसका हाथ पकड़कर अंदर की तरफ खींच लिया।
विकास गिड़गिड़ाते हुए बोला- “मैम मुझे जाने दीजिए प्लीज मैम मुझे जाने दीजिए। आप जैसा सोच रही हैं मैं वैसा नहीं हूं। मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता।”
लड़की मुस्कुराते हुए बोली- “अच्छा नहीं लगता से तुम्हारा क्या मतलब है? चलो, एक बात बताओ तुम्हारी शादी हुई है।”
विकास ने जल्दी से जवाब दिया,“नहीं मैम! अभी तो मेरी उम्र ही कितनी है! वैसे भी अभी मैं पढ़ाई कर रहा हूँ। शादी की तो सोच भी नहीं सकता।”
लड़की मुस्कुराकर बोली, “तो फिर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है।”
“नहीं…नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। मेरा सारा ध्यान अपनी पढ़ाई पर ही रहता है। मैं इन सब फालतू की चीजों में नहीं पड़ता। मुझे पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बनना है।” विकास ने बताया।
लड़की हँसते हुए बोली – “यार! तू बॉडी से जितना कड़क माल लगता है, अंदर से उतना ही लूज है। देख, तूने आज तक कभी किसी लड़की का बिस्तर गर्म नहीं किया। बस इसीलिए तुझे यह सब अच्छा नहीं लगता। चल आज तुझे जिंदगी का वह मजा मिलेगा कि तुम भी क्या याद रखोगे।”
कहने के साथ लड़की ने उसे अपने बेड की तरफ धकेल दिया। कातर निगाहों से लड़की की तरफ देखता हुआ विकास बेड पर जा गिरा। उसके बस में इस समय कुछ भी नहीं था। लड़की ने एक झटके में दरवाजा बंद किया और फिर टेबल पर रखी हुई एक पुड़िया खोली और उसे उसने टेबल पर ही फैला दिया। विकास को समझते देर ना लगी कि उस पुड़िया में कुछ और नहीं बल्कि ड्रग्स थी।
विकास की घबराहट और बढ़ गई। लड़की ने एक भरपूर सांस खींचते हुए ड्रग को अपने नथुनों से अपने शरीर में दाखिल किया और फिर तुरंत विकास की तरफ घूम गई।
“कम ऑन डार्लिंग! आज खूब मजे लूटेंगे! तेरे जैसा गबरू जवान आज बहुत दिनों बाद मिला है।”
कहने के साथ लडकी ने अपने ऊपर के कपड़े उतार फेंके। वह सिर्फ टू पीस में मौजूद थी। उसका पूरा बदन सांचे में ढला हुआ था। छाती के उभार और गोलाइयाँ देख कर अच्छे अच्छों का मन डोल सकता था। मगर वह विकास ही था जो उससे छुटकारा पाने की पूरी कोशिश कर रहा था।
लड़की नशीली आंखों से उसे देखती हुई उसकी तरफ बढ़ती चली आ रही थी और इसी के साथ साथ विकास भी धीरे धीरे बेड के पिछले हिस्से की तरफ खिसकता चला जा रहा था।
भाग 9
अचानक ही लड़की विकास के ऊपर किसी भूखी लोमड़ी की तरह झपट पड़ी। आतंक भरी निगाहों से विकास उसे देखता ही रह गया। वह समझ ही नहीं पाया कि उसे क्या करना चाहिए।
इससे पहले कि वह कुछ सोच पाता, लड़की ने उसे इस कदर चूमना शुरू कर दिया जैसे वह बरसों की प्यासी हो। उसकी आंखों में वासना का तूफान नंगा नाच कर रहा था। वह अपने गुलाबी होंठ विकास के पैरों की तरफ से लगाकर धीरे धीरे उसके जिस्म के ऊपरी हिस्से को बेताबी से चूमती चली गयी। उसकी छाती की गोलाइयाँ बिल्कुल साफ साफ नुमाया हो रहीं थीं। चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था, आंखें धुत्त शराबी की तरह नशीली दिख रहीं थीं। इतनी देर से खुद को बचाने की कोशिश करते विकास के अंदर भी जैसे कुछ दरकने लगा। उसका प्रतिरोध धीरे-धीरे कम होने लगा आखिर था तो वह एक नौजवान लड़का ही, अनियंत्रित जवानी से गदराई हुई लड़की के फूल जैसे कोमल स्पर्श को आख़िर वह कब तक ठुकरा पाता। ऊपर से लड़कीं की गर्म सांसें जैसे उसकी रूह तक पहुंचने लगी थीं और शायद इसी वजह से उसके जिस्म में एक रोमांचकारी तरंग सी दौड़ गयी। ऐसा होते ही उसके हाथ खुद ब खुद लड़कीं के बदन से जा चिपके, इससे पहले कि वह कुछ कर पाता लड़कीं के नरम गर्म प्यासे होंठ उसके होंठों स जा चिपके और ऐसा होते ही दोनों एक दूसरे में इस कदर गुत्थमगुत्था हुए कि यह देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल था कि अभी-अभी कुछ देर पहले उनमें इसी चीज के लिए झड़प हो रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे वे दोनों एक दूसरे को बस पी जाना चाहते हो। अचानक विकास के हाथ बिल्कुल मशीनी अंदाज में आगे बढ़े और एक झटके में उसके उभारों पर आकर जम गए। जैसे ही ऐसा हुआ उस लड़की की आंखें अपने आप बंद हो गई। उसके मुंह से एक जबरदस्त मादक सिसकारी निकली। जो पहले ही पागल हो चुके विकास पर जैसे बिजली गिरा गयी। वह जोर शोर से उसके वक्ष मसलने लगा। अचानक लड़की ने विकास के हाथों को परे झटक दिया और दीवानगी भरी आंखों से विकास को घूरने लगी। विकास उसके इशारों का मतलब नहीं समझ पाया। वह एक पल के लिए हड़बड़ा गया। ऐसा लगा जैसे उसके सिर से अचानक ही सवार हुआ भूत तुरंत उतर गया था। आंखों में एक बार फिर से आतंक दिखाई देने लगा लेकिन लड़की के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान दिखाई दे रही थी। उसने एक झटके में विकास को कसकर पकड़ा और उसका मुंह झटके से अपने उभारों के पास ले आई। उसकी यह हरकत देखकर विकास तुरंत समझ गया कि वह क्या चाहती थी। अब वह उसकी चाहत पूरी कर रहा था और लड़की के मुंह से मादक सिसकारियां फूट रही थी। कुछ देर तक यही सब चला रहा।
बीतते हुए पलों के साथ लड़की जैसे पागल होती चली जा रही थी। आखिर में उसने एक झटके में खुद को बेड पर गिरा लिया और इसी के साथ विकास को अपने ऊपर खींचती चली गई। विकास उसकी हर हरकत का मतलब समझ रहा था। उसने भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसकी पेंटी खींचकर निकाल फेंकी।
कुछ ही देर में दोनों एक ऐसी नाव की सवारी कर रहे थे, जिसके लिए कुछ देर पहले विकास बिल्कुल भी तैयार नहीं था और वह लड़की उसी के लिए मरी जा रही थी।
लड़की मादक सिसकारियों के साथ बोली, “आह….उफ्फ.. कम ऑन बेबी! और तेज, यू आर अमेजिंग उफ्फ आह!”
विकास के मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी बल्कि वह पूरी ताकत से अपने काम में लगा हुआ था। बेड बुरी तरह से हिल रहा था।
उस लड़की की आहें कराहें पूरे कमरे में गूंज रही थी। वासना का यह तूफान जब शांत हुआ तो लड़की लुढककर बेड के एक साइड पसर गई और विकास हाँफता हुआ दूसरी साइड।
दोनों गहरी गहरी सांसें ले रहे थे। जहां लड़की के चेहरे पर संतुष्टि के भाव दिखाई दे रहे थे, वहीं विकास के चेहरे पर परेशानी और अफसोस के भाव दिखाई दे रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे जोश में आकर उसने कोई गलत काम कर दिया हो।
लड़की मुस्कुराते हुए बोल उठी, “डार्लिंग! तुम तो बहुत कमाल के हो, मजा आ गया। तुम ऐसे पहले लड़के हो जिसने मुझे हर तरह से खुश करके दिखाया लेकिन तुम्हारे अंदर बहुत अकड़ है। शुरू शुरू में तुम नौटंकी बहुत करते हो लेकिन कोई बात नहीं, इट्स अ पार्ट आफ लव। कुछ भी हो लेकिन बहुत मजा आया।”
विकास ने नफरत भरी निगाहों से लड़की की तरफ देखा।
“जोश में आकर यह मैंने क्या कर दिया? मैं तो ऐसा नहीं हूँ। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। शायद इतनी बड़ी कि मैं खुद को भी माफ नहीं कर पाऊँगा।”
सोचता हुआ वह उठकर बैठ गया। उसने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहनना शुरू कर दिए।
लड़की हैरानी भरी आवाज में बोली- “अरे! अचानक क्या हो गया डार्लिंग? अचानक से तुम्हें यह क्या हो गया?”
लड़की ने आगे बढ़कर विकास का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचने लगी। लेकिन विकास ने तुरंत उसका हाथ परे झटक दिया।
विकास गुस्से में चीखा, “तुम्हें जो करना था तुमने कर लिया। अब तुम नाश्ते की पेमेंट करो। मुझे जल्द से जल्द यहां से निकलना होगा। वरना मेरी नौकरी भी जा सकती है।”
लड़की मुस्कुराते हुए बोली, “हा हा हा! तुम बहुत मासूम हो बेबी!”
विकास हैरानी से उसका चेहरा देख रहा था। उसने दोबारा कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला लेकिन तभी उसका फोन फिर से बज उठा। उसने फोन की तरफ देखा। स्क्रीन पर उसकी बहन का नाम फ्लेश हो रहा था। उसने तुरंत कॉल रिसीव की और फोन अपने कान से लगा लिया।
“हेलो हेलो! क्या हुआ? क्या? तुम टेंशन मत लो मैं अभी आया! मैं बस पहुँच ही रहा हूँ, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो!”
और इसी के साथ उसने कॉल कट कर दी। वह जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनने लगा।
लड़की मन ही मन बोली, “किसकी कॉल थी? लगता है इसकी गर्लफ्रेंड की कॉल थी।”
लड़की के चेहरे पर डेविल मुस्कान थी। विकास ने उसकी तरफ देखा तक नहीं और आंधी तूफान की तरह बाहर निकलता चला गया। बिना नाश्ते की पेमेंट लिए वह तेजी से अपनी बाइक पर बैठा और बाइक स्टार्ट करते हुए तेजी से सड़क की तरफ दौड़ा दी।
उधर दूसरी तरफ लड़की अभी भी मुस्कुरा रही थी। उसके चेहरे के भाव बता रहे थे जैसे उसने कोई बहुत बड़ी जीत हासिल की हो।
लड़की शैतानी मुस्कुराहट के साथ बोल उठी, “तू मुझसे बचकर कहाँ जाएगा बेटे! कुछ ही देर बाद वापस मेरी चौखट पर नाक रगड़ता हुआ दिखाई देगा।”
भाग 10
विकास तेजी से बाइक दौड़ाता हुआ वहाँ पहुँचा जहाँ वह अपनी बहन के साथ रुका हुआ था। उसने जल्दी से बाइक स्टैंड पर खड़ी की और भागता हुआ उस रूम में जा पहुँचा। जब वह रूम में पहुँचा तो अंदर का नजारा देखकर परेशान हो गया।
सामने पलंग पर पड़ी हुई उसकी बहन बहुत बुरी तरह से काँप रही थी। वह तुरंत उसके पास पहुँचा।
“खुशबू, तुम्हें क्या हुआ? क्या हुआ खुशबू?” विकास ने घबराई हुई आवाज में अपनी बहन के माथे पर हाथ रखते हुए पूछा।
जैसे ही उसने उसके माथे को छुआ, बिना बताए ही उसे सब समझ में आ गया और इसी के साथ उसके माथे पर चिंता की रेखाएँ उभर आईं।
खुशबू ने कुछ बोलना चाहा, लेकिन वह बोल नहीं पा रही थी। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
“तुम टेंशन मत लो खुशबू! मैं अभी आता हूँ दवाई लेकर! चिंता मत करो!” कहने के साथ विकास उल्टे पाँव दोबारा बाहर की तरफ भागा। बाहर आकर उसने अपनी पॉकेट चेक की लेकिन उसकी जेब में एक रुपए भी नहीं थे। वह परेशान हो उठा। इस समय उसके पापा के दोस्त कैलाश अंकल भी वहाँ पर नहीं थे।
उसने तुरंत बाइक स्टार्ट की और रेस्टोरेंट जा पहुँचा, जहाँ आज उसने पहले दिन ही काम शुरू किया था, लेकिन जैसे ही वह रेस्टोरेंट पहुँचा, उसके कुछ कहने के पहले ही रेस्टोरेंट का मालिक किसी पागल कुत्ते की तरह उसकी तरफ लपका।
“क्यों बे साले, हरामखोर! तेरी इतनी हिम्मत कि तूने मेरे क्लाइंट को नाराज किया और इसी के साथ उसने विकास की कॉलर पकड़ ली। इससे पहले कि विकास कुछ कह पाता, रेस्टोरेंट के मालिक ने एक जोरदार थप्पड़ उसके चेहरे पर दे मारा।
विकास पहले ही दुखी था। इस थप्पड़ से उसकी आँखों से आँसू निकल आए। उसके अंदर विरोध करने की ताकत नहीं थी।
“सर.. सर मैंने कुछ नहीं किया, मैंने कुछ भी नहीं किया, उल्टा वह मुझसे गलत काम करवाना चाहती थी..।” उसके मुँह से पूरी बात निकली भी नहीं थी कि एक और जोरदार थप्पड़ उसे लगा।
“चल निकल यहाँ से, दोबारा यहाँ दिखाई भी मत देना, वरना तेरी बोटी करके कुत्तों के आगे डाल दूँगा।” कहने के साथ रेस्टोरेंट के मालिक ने उसे जोर का धक्का दिया। जिससे विकास वहीं जमीन पर गिर पड़ा। वह अपने आप को बहुत असहाय महसूस कर रहा था।
किसी तरह से वह अपने आप को संभालता हुआ उठकर खड़ा हुआ और थका हारा वापस अपनी बाइक की तरफ बढ़ गया। अभी वह अपनी बाइक स्टार्ट करने ही वाला था कि तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा तो वह पीछे घूम गया।
सामने पान चबाता हुआ एक आदमी खड़ा उसे देख रहा था।
“क्या हुआ तेरे को? पैसे की जरूरत है क्या?” उस आदमी ने मुस्कुरा कर पूछा।
अचानक से उसके ऐसा करने से विकास कुछ बोल नहीं पाया।
“चल आजा, मुझे पता है तेरी बहन की तबीयत खराब है और तेरे पास जेब में एक चवन्नी भी नहीं है और तुझे तेरे मालिक ने काम से भी निकाल दिया, लेकिन तू चिंता मत कर, अगर मेरी बात मानेगा तो सब कुछ सही हो जाएगा।”
विकास हैरानी से उस आदमी को देख रहा था।
“आप कौन हो?” आखिर विकास ने पूछा।
“आम खाने से मतलब रख ब्रो, पेड़ के बारे में जानने से कुछ नहीं होने वाला।” उस आदमी ने दोबारा मुस्कुराकर कहा।
उसकी बात सुनकर विकास को कुछ समझ नहीं आया कि वह क्या करे, अभी भी वह उस आदमी का चेहरा देख रहा था, तभी आदमी दोबारा बोला, “भाई तेरी बहन की तबीयत खराब है और तेरी जेब में रुपए भी नहीं हैं और तू फालतू में खड़ा-खड़ा सोच रहा है, चल ठीक है, तू सोचता रह, मैं तो चलता हूँ, मैंने सोचा तेरी कुछ हेल्प कर दूँगा, लेकिन लगता है तुझे मेरी हेल्प की जरूरत नहीं है।”
इतना कहकर वह आदमी जाने लगा, लेकिन तभी विकास बोल उठा, “सुनिए, सुनिए! मुझे आपकी हेल्प की जरूरत है।”
जैसे ही विकास ने यह बात बोली, वह आदमी मुस्कुराकर उसकी तरफ घूम गया।
“ठीक है फिर, चल मेरे साथ।” उस आदमी ने कहा।
विकास उसके साथ हो लिया। वह आदमी विकास को लेकर कुछ दूर एक ऐसी जगह पहुँचा, जहाँ पर आराम से बात की जा सके।
फिर उसने विकास से कहना शुरू किया, “देख, अगर तू चाहता है कि तेरी बहन का इलाज अच्छे से हो जाए और आगे से तेरी लाइफ में कोई दिक्कत ना आए तो तुझे मेरी बात माननी होगी और अगर तूने मेरी बात मानी तो फिर तेरी लाइफ ही बदल जाएगी।” आदमी ने कहा लेकिन विकास को जैसे कुछ समझ में नहीं आया।
“लेकिन मुझे करना क्या होगा?” विकास ने पूछा।
“अभी कुछ देर पहले तू जिन मैडम के पास से भाग कर आया था, उनके पास चला जा! वे बताएंगी। अगर उनकी बात मानेगा तो तुझे जगह जगह ठोकर नहीं खानी पड़ेगी और ना ही तुझे तेरे सौतेले बाप से डरकर भागना पड़ेगा। लेकिन अगर तूने मैडम की बात नहीं मानी तो तुझे इस शहर में टिकने की भी जगह नहीं मिलेगी, ले अभी यह पैसे रख, तुझे जरूरत होगी, पहले जा अपनी बहन का इलाज करवा, उसके बाद रिंकी मैम के पास चले जाना।”
उस आदमी ने जैसे विकास को आदेश सा दिया और उसके हाथ में नोटों की एक गड्डी थमा कर दूसरी तरफ निकल गया।
विकास कुछ देर तक उन पैसों को देखता रहा। एक बार को उसके मन में आया कि यह पैसे वह उस आदमी के मुँह पर दे मारे लेकिन फिर अचानक उसे अपनी काँपती हुई बहन का ख्याल आया तो फिर से परेशान हो गया।
मानसिक संघर्ष में उलझा हुआ विकास अपनी गाड़ी पर बैठा और तुरंत मेडिकल स्टोर की तरफ निकल गया। उसने अपनी बहन के लिए दवाई ली और खाने पीने का सामान लेकर तुरंत वापस अपने रूम पर आ गया। उसकी बहन अभी भी बुरी तरह से काँप रही थी।
उसने अपनी बहन को नाश्ता करवाया और फिर दवाई खिलाई। कुछ ही देर में उसकी बहन को आराम होने लगा।
“अगर मुझे सब कुछ सही करना है तो मुझे उस आदमी की बात माननी ही होगी, क्योंकि बाकी कोई दूसरा रास्ता मेरे पास नहीं है और अगर मैंने उसकी बात नहीं मानी तो हो सकता है वे लोग मुझे इस शहर में सच में ना रहने दे।”
सोचते सोचते वह दोबारा अपने रूम से बाहर निकला, उसने अपनी बाइक उठाई और फिर से उस लड़की के दरवाजे पर जा पहुँचा।
“मुझे पता था, तुम मेरे पास जरूर आओगे। रिंकी अगर कुछ ठान लेती है तो वह होकर ही रहता है।” रिंकी नाम की उस लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा। विकास ने कुछ नहीं कहा। वह चुपचाप उसके सामने सिर झुकाए खड़ा रहा।
“अगर मेरा कहा मानोगे तो तुम्हारी जिंदगी गुलजार हो जाएगी, वरना तुम्हें खाक होते एक मिनट भी नहीं लगेगा, चलो आ जाओ मेरे पास, कल सुबह हम एक ट्रिप पर चलेंगे और वहीं से तुम्हारी असली जिंदगी की शुरुआत होगी, फिर तुम्हें किसी की जॉब या किसी का काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” कहने के साथ रिंकी ने विकास को अपनी तरफ खींच लिया।
एक बार फिर वही सब शुरू हो चुका था, जो कुछ देर पहले हुआ था, लेकिन इस बार विकास ने वहाँ से भागने की कोई कोशिश नहीं की। वह उसका साथ दे रहा था, भले ही बेमन से।
फिर अगले ही दिन रिंकी उसको अपने साथ लेकर ऑस्ट्रेलिया के लिए निकल पड़ी और आज जो कुछ भी सिडनी के इस कमरे में हो रहा था। उसमें विकास की भी सहमति थी।
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आखिरकार विकास की तंद्रा टूटी। वह अभी भी लवली और एंजेला नाम की युवतियों से लिपटा हुआ था।
वह मन ही मन बुदबुदा उठा, “हाँ, मैं जिगोलो हूँ। वही जिगोलो, जो कुछ पैसों के खातिर अपने जिस्म का सौदा करता है। हाँ, मैं भी अपने जिस्म का सौदा कर रहा हूँ लेकिन सिर्फ और सिर्फ अपनी छोटी बहन का भविष्य सँवारने के लिए। अपनी बहन के भविष्य और सुरक्षा के लिए उसका यह भाई आग के दरिया में भी छलांग लगा सकता है।”