
तंत्र और षड्यंत्र
देश के एक प्रतिष्ठित और बिजनेसमैन परिवार को खत्म करने के लिए एक तरफ तंत्र था और एक तरफ षड्यंत्र,बीच में थी अपने परिवार की शाख बचाने में लगी चंडिका!..फिर छिड़ गई एक बड़ी जंग!.. कौन जीता? तंत्र….षड्यंत्र या चंडिका! जानने के लिए पढ़िए बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भी तेज यह कहानी तंत्र और षड्यंत्र
पहला अध्याय: गुप्त शक्ति का आह्वान
गांव के बाहरी इलाके में स्थित काली हवेली के बारे में कहा जाता था कि वहां सदियों पुरानी तांत्रिक साधनाएं होती आई हैं। अग्निदत्त, जो शक्तिशाली तांत्रिक था, वहां अपना अंतिम अनुष्ठान करने वाला था, जिससे उसे अमरत्व की प्राप्ति होती। मगर गांव के ठाकुर रणवीर सिंह को इसकी भनक लग चुकी थी।
रणवीर सिंह और उनके लोग तंत्र विद्या को एक अभिशाप मानते थे। लेकिन उन्हें यह भी पता था कि अगर अग्निदत्त सफल हुआ, तो उसकी शक्ति पूरे राज्य को तबाह कर सकती थी। इसीलिए, उन्होंने उसके खिलाफ षड्यंत्र रचने का फैसला किया।
दूसरा अध्याय: विश्वासघात का खेल
अग्निदत्त का सबसे प्रिय शिष्य, विक्रम, ठाकुर का गुप्त सहयोगी था। वह हमेशा गुरु के साथ रहता और तांत्रिक विद्या सीखता। मगर इस बार उसने अपने ही गुरु के खिलाफ साजिश रची थी। ठाकुर रणवीर ने उसे लालच दिया कि यदि वह अग्निदत्त के अनुष्ठान में विघ्न डाले, तो उसे गांव की सबसे कीमती ज़मीन और धन मिलेगा।
तीसरा अध्याय: अनुष्ठान की रात
पूर्णिमा की रात आई। हवेली में तंत्र-मंत्र की शक्तियां अपने चरम पर थीं। अग्निदत्त ने अपनी आंखें खोलीं और अग्नि कुंड में आहुति डालने लगे। चारों ओर ऊर्जा का संचार हो रहा था। मगर विक्रम, जो उनके पीछे बैठा था, ने चुपके से एक तंत्रमंत्र से छेड़छाड़ कर दी।
अचानक, हवेली में हाहाकार मच गया। मंत्रों की शक्ति विकृत हो गई और अग्निदत्त को महसूस हुआ कि कोई उसके खिलाफ षड्यंत्र कर रहा है। उसने क्रोधित होकर विक्रम की ओर देखा और अपनी सिद्ध शक्तियों से सच्चाई जान ली।
चौथा अध्याय: तंत्र बनाम षड्यंत्र
रणवीर सिंह और उसके लोग हवेली पर हमला करने के लिए तैयार थे। लेकिन अग्निदत्त अब भी शक्ति से भरपूर था। उसने विक्रम को श्राप दे दिया कि वह जीवन भर भटकता रहेगा। रणवीर सिंह के सैनिक जैसे ही हवेली में घुसे, अग्निदत्त ने महाकाली का आह्वान किया। तेज़ रोशनी फैल गई, और कुछ ही पलों में ठाकुर के सारे सैनिक धरती पर गिर पड़े।
रणवीर सिंह भयभीत होकर भागने लगा, मगर अग्निदत्त ने उसे भी अपने तंत्र से रोक लिया। उसने कहा, “तंत्र का दुरुपयोग करने वाले का अंत निश्चित है!”
रणवीर सिंह ने हाथ जोड़कर माफी मांगी, लेकिन अग्निदत्त ने उसे एक ऐसा श्राप दिया कि उसकी पीढ़ियां हमेशा डर और कष्ट में रहेंगी।
अंत: सत्य की जीत
विक्रम को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन अब देर हो चुकी थी। अग्निदत्त ने उसे शापित जीवन जीने के लिए छोड़ दिया। काली हवेली फिर से शांत हो गई, मगर गांव वालों के लिए यह रात हमेशा के लिए यादगार बन गई।
तंत्र और षड्यंत्र की इस लड़ाई में आखिरकार सत्य की जीत हुई, मगर इस जीत की कीमत बहुत बड़ी थी।